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चमोली जलप्रलयः ऋषिगंगा आपदा के बाद बांधों पर पूर्व चेतावनी को पुख्ता करेंगे इसरो और जल आयोग

Fri, 12 Feb 2021 11:59 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 12 Feb 2021 11:59 AM IST
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Uttarakhand chamoli Glacier Burst latest news : ISRO and Water Commission will do early warning on dams after Rishiganga disaster
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

ऋषिगंगा आपदा के बाद अब बांधों की सुरक्षा और उनके ऊपर बनी झीलों को लेकर नए सिरे से चिंतन शुरू हो गया है। इसके तहत अब उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के बांधों पर पूर्व चेतावनी (अर्ली वार्निंग सिस्टम) प्रक्रिया को पुख्ता करने की कवायद शुरू हो गई है। वहीं, यूजेवीएनएल ने 12 परियोजनाओं से हाथ पीछे खींच लिए हैं।

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यूजेवीएनएल ने तय किया है कि सभी बांधों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम को पुख्ता करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और केंद्रीय जल आयोग की मदद ली जाएगी।
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यह दोनों संगठन मिलकर बांधों की सुरक्षा को परखने करने के साथ ही यहां पूर्व चेतावनी की प्रक्रिया पुख्ता करेंगे ताकि भविष्य में कोई आपदा होने की स्थिति में बचाव आसान किया जा सके। संचयी पर्यावरणीय प्रभाव की रिपोर्ट के आधार पर यह भी तय किया गया है कि उत्तरकाशी और चमोली में यूजेवीएनएल की 12 परियोजनाएं अब कभी शुरू ही नहीं होंगी। 
 

इन जल विद्युत परियोजनाओं पर अब नहीं होगा काम

पाला मनेरी-480 मेगावाट- उत्तरकाशी
भैरों घाटी - 381 मेगावाट - उत्तरकाशी
तमक लाता- 190 मेगावाट - चमोली
ऋषिगंगा-1- 70 मेगावाट - चमोली
ऋषिगंगा-2- 35 मेगावाट - चमोली
उर्गम-2- 7.5 मेगावाट - चमोली
लिमचागाड- 3.5 मेगावाट - उत्तरकाशी
असीगंगा-1 - 4.5 मेगावाट - उत्तरकाशी
असीगंगा-2 - 4.5 मेगावाट - उत्तरकाशी
असीगंगा-3 - 9 मेगावाट - उत्तरकाशी
कालीगाड - 9 मेगावाट - उत्तरकाशी
पिलंगाड-2 - 4 मेगावाट - उत्तरकाशी
 

सरकार ने किया तय, इन नदियों के ऊपरी हिस्सों पर नहीं बनेंगे बांध

यूजेवीएनएल के एमडी संदीप सिंघल ने बताया कि राज्य सरकार ने विभिन्न अध्ययनों के बाद तय किया है कि अलकनंदा, भागीरथी, धौली गंगा, ऋषिगंगा आदि नदियों के अपर रिचेज (ऊपरी हिस्सों) में कोई भी पन बिजली परियोजना नहीं बनाई जाएगी। इसी के तहत पूर्व में ही इन कई प्रोजेक्ट को रोक दिया गया था।

हम इसरो और केंद्रीय जल आयोग की मदद से बांधों पर अर्ली वार्निंग सिस्टम को और पुख्ता कर रहे हैं। उम्मीद है इसके बाद और बेहतर तरीके से किसी भी आपदा की पूर्व में ही जानकारी मिल सकेगी। 
- संदीप सिंघल, एमडी, यूजेवीएनएल

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