...तो तीर्थयात्रियों को चारों धामों के आधे रास्ते में नहीं छोड़ेगी रेल, केबिल कार की संभावना पर विचार
- केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री में केबिल कार और रैक रेल की संभावना पर विचार
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उत्तराखंड में चारधाम रेल परियोजना का काम तेजी से गतिमान है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। इसके अलावा गंगोत्री और यमुनोत्री तक रेल लाइन बिछाने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) पहले ही तैयार हो चुकी है। लेकिन अब भारतीय रेलवे इससे भी आगे चारधाम जाने वाले श्रद्धालुओं को अधूरे रास्ते में न छोड़कर सीधे धामों तक पहुंचाने की योजना पर विचार कर रहा है। इसके लिए धामों तक केबिल कार और रैक रेल पहुंचाने पर विचार किया जा रहा है।
रेल विकास निगम के परियोजना प्रबंधक ओमप्रकाश मालगुडी ने बताया कि अभी तक का जो प्लान है, उसके तहत चारधाम परियोजना में बदरीनाथ में माणा तक, केदारनाथ में सोनप्रयाग, गंगोत्री में मनेरी और यमुनोत्री में बड़कोट तक रेल पहुंचाई जानी है। लेकिन पिछले दिनों रेलवे बोर्ड और आरबीएनएल की संयुक्त बैठक में चारों धामों तक रेल पहुंचाने पर विचार-विमर्श किया गया।
इसके तहत जहां तक अभी प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, उससे आगे केबिल कार और रैक रेल पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार किया गया। संभव है कि इस विचार को आने वाले दिनों में धरातल पर उतारा जाए।
धामों तक रेल की यात्रा कर सकेंगे
मालगुडी ने बताया कि यदि ऐसा होता है तो चारधाम जाने वाले यात्री सीधे धामों तक रेल की यात्रा कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि बोर्ड बैठक में अधिकतर सदस्यों ने इस विचार पर सहमति जताई है।
उन्होंने बताया कि तमिलनाड़ु के नीलगिरी में माउंटेन रेल या रैक रेल का सफल संचालन किया जा रहा है। नीलगिरी माउंटेन रेलवे तमिलनाडु में कुन्नूर से ऊटी के बीच चलती है। 46 किलोमीटर लंबी नीलगिरी माउंटेन रेलवे तमिलनाडु की एक मात्र मीटर-गेज यानी छोटी लाइन रेलवे ट्रैक है।
इसके निर्माण का प्रस्ताव अंग्रेजों के शासन काल में 1854 में रखा गया था, लेकिन पर्वतीय इलाके में निर्माण करने के दौरान आने वाली कठिनाइयों की वजह से इसका निर्माण 1891 में शुरू हुआ, जिसे पूरा होने में 18 साल का वक्त लगा और वर्ष 1908 में यह बनकर तैयार हुई।