स्टिंग मामले में रावत को राहत, सीबीआई जांच की अधिसूचना वापस
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उत्तराखंड कैबिनेट ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई जांच कराने की अधिसूचना वापस ले ली है। इस प्रकरण की जांच राज्य द्वारा गठित एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) से कराई जाएगी। इंदिरा हृदयेश की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। इस दौरान सीएम मौजूद नहीं रहे।
उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने के एक दिन पहले आए सीएम हरीश रावत के स्टिंग ने सियासत में हड़कंप मचा दिया था। स्टिंग हरीश रावत द्वारा सरकार बचाने के लिए कथित खरीद-फरोख्त के बारे में था। स्टिंग आने के एक दिन बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।
स्टिंग सामने आने के बाद भाजपा और बागी विधायकों ने मामले की जांच सीबीआई से किए जाने की मांग की थी। जिसके बाद राज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी जिसे केंद्र ने स्वीकार कर लिया था।
सीबीआई ने शुरू कर दी थी जांच
केंद्र के आदेश के बाद सीबीआई ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। मामले में स्टिंगकर्ता ने स्टिंग की सीडी की मूल प्रति दिल्ली में सीबीआई को सौंप दी थी।
पूछताछ के लिए सीबीआई ने हरीश रावत को भी बुलाया था पर हरीश रावत सीबीआई के सामने पेश नहीं हुए थे। सीबीआई के सामने न जाने पर इंदिरा हृदयेश ने तब कहा था कि रावत सुप्रीम कोर्ट का आदेश मान रहे हैं और वह सीबीआई के सामने पेश नहीं होंगे। जांच चल ही रही थी इसी बीच विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट में रावत ने बहुमत साबित कर लिया और मुख्यमंत्री बहाल हो गए।
इसके बाद आज कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में हरीश रावत के स्टिंग मामले की सीबीआई जांच कराने की अधिसूचना रद्द कर दी है।
राज्य के पास जांच वापस लेने का अधिकार ही नहीं: बहुगुणा
ऐसा कोई उदाहरण आज तक नहीं देखा कि किसी एजेंसी ने अपने सीएम के खिलाफ जांच रिपोर्ट दी हो। जो जांच करते हैं उनके सर्विस रिकॉर्ड सीएम के हाथ में रहते हैं। आखिर हरीश रावत सीबीआई से डर क्यों गए? सिक्किम और केरल के दो मामलों में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला है कि सीबीआई जांच की सिफारिश करने के बाद राज्य के पास उसे वापस लेने का अधिकार नहीं रहता। अच्छा होता कि हरीश सीबीआई का सामना करते और जनता का विश्वास जीतते। अपनी एजेंसी से यदि निर्दोष साबित हुए तो भी संदिग्ध रहेंगे।
- विजय बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री
जब हरीश रावत दावा कर रहे हैं कि उन्होंने कुछ नहीं किया तो फिर सीबीआई से क्यों भयभीत हो गए। सीबीआई जांच से उनका भागना यह बताता है कि जो वह स्टिंग में कह रहे हैं पूरी तरह से सही है। इससे साबित होता है कि हरीश रावत ने विधायकों की खरीद फरोख्त की है। हरीश इस समय राज्य के मुखिया हैं, राज्य में ऐसी कोई एजेंसी नहीं है जो उनके खिलाफ जांच कर सके। इसलिए अपने कृत्यों को छुपाने के लिए सीबीआई से जांच वापस लेने का निर्णय हुआ है।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, वरिष्ठ भाजपा नेता
सीबीआई जांच की वैधानिकता पर था सवाल: किशोर
-किशोर उपाध्याय, अध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस कमेटी
भगतदा बोले
अच्छा होता कि हरीश रावत जांच में सीबीआई को सहयोग करते और खुद को निर्दोष साबित करने के साक्ष्य सामने रखते। इससे जनता के बीच बिगड़ी उनकी छवि को सुधारा जा सकता था। लेकिन हरीश ने सीबीआई से जांच वापस लेने की जो योजना बनाई है, उससे लगता है कि उन्हें खुद के ऊपर भरोसा नहीं है। वो मुख्यमंत्री हैं और अच्छी तरह जानते हैं कि काफी सिफारिशों के बाद जांचें सीबीआई को दी जाती हैं और यहां सीबीआई से वापस ली जा रही है। लेकिन ये पब्लिक है सब जानती है।
-भगत सिंह कोश्यारी, भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री