उत्तराखंड में एनआरसी लागू करने को लेकर सीएम के पक्ष में आए दो मंत्री, कहा-कैबिनेट में लाएं प्रस्ताव
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद अब उनकी सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों ने भी कहा कि उत्तराखंड में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर लागू करना जरूरी है। सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में (एनआरसी) लागू करने के संकेत दिए थे। इस पर अब उन्हें अपने मंत्रियों का समर्थन मिला है।
मंगलवार को पीएम मोदी का जन्मदिवस मनाने प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों ने एनआरसी पर मुख्यमंत्री के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और इसकी गरिमा और संस्कृति की रक्षा के लिए यदि राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर लागू करने पर विचार हो रहा है तो ये स्वागत योग्य है। दोनों ही मंत्रियों ने कहा कि प्रदेश मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री जब ये प्रस्ताव लाएंगे तो वे इसका समर्थन करेंगे।
सबको समझने की आवश्यकता है। खतरा महसूस तो नहीं हुआ है लेकिन ये हकीकत है कि जहां शांत होता है, वहीं अपराध के पलने की संभावना होती है। हिमालय प्रदेश है हमारा। दुर्गम क्षेत्र हैं। मूल निवासी होते हुए हम नहीं जा सकते। क्या गारंटी है कि हिंदुस्तान का बड़े से बड़ा अपराधी यहां बैठा हो। देवभूमि की गरिमा को बनाए रखने के लिए एनआरसी बहुत आवश्यक है। मुख्यमंत्री के बयान का पुरजोर समर्थन करता हूं।
- अरविंद पांडेय, विद्यालयी शिक्षा मंत्री
अगर थोड़ा असम को अध्ययन करें तो वहां बहुत से बाहर के लोग बसें हैं। यहां बाहर के लोग न आएं, ये मुख्यमंत्री तय करेंगे। हमारे यहां बाहर के लोग आ रहे हैं। इससे यहां के ताने बाने में बदलाव आ रहा है। ये यथावत रहे संस्कृति रक्षा हो, उस पर विचार विमर्श होना चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री जो भी तय करेंगे, हम उनके साथ हैं।
- सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री
पूर्व दायित्वधारी मंत्री ने भी की मांग
भाजपा नेता व पूर्व दायित्वधारी अजेंद्र अजय ने उत्तराखंड में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने के मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि के वैशिष्टय को कायम रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एनआरसी जरूरी है। उन्होंने प्रदेश के पर्वतीय भूभाग में जमीन की खरीद फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने और उसे विशेष क्षेत्र अधिसूचित करने की मांग की।
यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि सामरिक दृष्टि से उत्तराखंड का यह हिमालयी क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। पर्वतीय क्षेत्र के निवासियों की विशिष्ट भाषाई व सांस्कृतिक पहचान रही है। अत्यंत संवेदनशील सीमा के निकट लगातार बदल रहा सामाजिक ताना बाना खतरे का कारण बन सकता है।
इससे असम जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। यह भूभाग आदिकाल से सनातन धर्म की आस्था और हिंदू की प्रेरणा रहा। इसकी पवित्रता व उसके आध्यात्मिक व सांस्कृतिक स्वरूप को बरकरार रखने के लिए संपूर्ण पर्वतीय क्षेत्र को विशेष क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया जाना चाहिए।
विधायक निधि भी समाप्त होनी चाहिए: पांडेय
त्रिवेंद्र सरकार के विद्यालयी शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने एक बार फिर से विधायक निधि समाप्त करने की बात कही है। उनका कहना है कि जब वे पहली बार विधायक चुनकर आए थे, तो उन्होंने विधायक निधि समाप्त करने की पैरवी की थी। पांडेय ने यह बात तब कही जब उनसे पूछा गया कि मंत्रियों व विधायकों का टैक्स सरकारी खजाने से भरा जा रहा है।
इस बहाने पांडेय ने विधायक निधि खत्म करे का जिक्र छेड़कर नई बहस को जन्म दे दिया। वर्तमान में प्रत्येक विधायक को 3.75 करोड़ रुपये की विकास निधि मिलती है। कई विधायक तो वित्तीय वर्ष के दौरान इस विकास निधि का उपयोग तक नहीं कर पाते। इस धनराशि के उपयोग और दुरुपयोग को लेकर भी अकसर बहस और आरोप-प्रत्यारोप के दौर चलते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दलों के भीतर से ही विधायक निधि को समाप्त करने की मांग उठती रही है। इनकम टैक्स के बहाने पांडेय इस मुद्दे को फिर से छेड़ दिया है।
सरकार मंत्री का टैक्स क्यों भरे, मैं तो खुद ही भरता हूं: महाराज
वरिष्ठ मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि सरकार को मंत्री का टैक्स नहीं भरना चाहिए। वे तो अपना टैक्स खुद ही भरते हैं? यह पूछे जाने पर कि मंत्रियों व विधायकों के टैक्स का भुगतान सरकारी खजाने से भरा जा रहा है। इस पर महाराज ने कहा कि वे इसकी जांच कराएंगे कि क्या ऐसा है।