स्टोन क्रेशर चाहिए तो करना होगा खनन पट्टे का पक्का इंतजाम, दोगुना हुआ लाइसेंस शुल्क
- 10 साल के लिए मिलेगी अनुमति, नीति में संशोधन के प्रस्ताव पर प्रदेश मंत्रिमंडल ने लगाई मुहर
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उत्तराखंड में अब उन्हीं व्यक्तियों या फर्मों को स्टोन क्रेशर, स्क्रीनिंग प्लांट, हाट मिक्स व रेडमिक्स प्लांट लगाने की इजाजत होगी, जिनके नाम पर खनन पट्टा होगा या फिर उन्होंने खनन पट्टाधारक से एमओयू हस्ताक्षरित कर रखा हो।
पट्टे का पक्का इंतजाम करने पर ही सरकार स्टोन क्रेशर और प्लांट लगाने की अनुमति देगी। स्टोन क्रेशर नीति में ये नए प्रावधान किए गए हैं। औद्योगिक विकास विभाग ने नीति में संशोधन का प्रस्ताव बुधवार को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में रखा था।
कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नीति में ये प्रावधान भी किया गया है कि स्टोन क्रेशर या प्लांट लगाने की अनुमति अब पांच वर्ष के स्थान पर 10 वर्ष के लिए दी जाएगी। लेकिन इसके लाइसेंस शुल्क में बढ़ोतरी कर दी गई है।
नए संशोधन पहले से संचालित स्टोन क्रेशर और स्क्रीनिंग, हाट मिक्स व रेडमिक्स प्लांट पर रिन्यूवल के दौरान ही लागू होंगे। रिन्यूवल शुल्क कुल शुल्क का एक प्रतिशत होगा।
नए संशोधन अवैध खनन को रोकने और खनन से होने वाली आय में बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से किए गए हैं। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान नीति के संबंध में यह जानकारी भी दी।
लाइसेंस शुल्क में बढ़ोतरी
नए स्टोन क्रेशर लगाने के लिए मैदानी क्षेत्र में लाइसेंस शुल्क 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये और पर्वतीय क्षेत्र में पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया गया है। स्क्रीनिंग प्लांट लगाने के लिए मैदानी क्षेत्र में दो लाख रुपये के स्थान पर चार लाख और पर्वतीय क्षेत्र में एक लाख के स्थान पर दो लाख रुपये लिया जाएगा।
इतने फासले पर लग सकेगा प्लांट
मैदानी क्षेत्र में स्टोन क्रेशर या स्क्रीनिंग प्लांट नदी से तीन किमी के फासले पर ही लगाया सकेगा। अभी तक ये मानक 500 मीटर की दूरी का था। स्क्रीनिंग प्लांट धार्मिक स्थल, स्कूल व आबादी से दूरी के मानक अब 100 मीटर के स्थान पर 300 मीटर होगा।
पर्वतीय क्षेत्र में स्टोन क्रेशर व स्क्रीनिंग प्लांट नदी से न्यूनतम दूरी 250 मीटर होगी, जबकि धार्मिक स्थल, स्कूल, व आबादी से ये फासला 150 मीटर तक होगा।
मोबाइल प्लांट को भी अनुमति
राष्ट्रीय राजमार्ग और ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना में डिमांड के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने नीति में मोबाइल प्लांट लगाने का भी प्रावधान किया है। इसकी अनुमति वार्षिक आधार पर जिलाधिकारी देंगे। वही शुल्क भी निर्धारण करेंगे।
संचालक के लिए ये करना होगा जरूरी
स्टोन क्रेशर व स्क्रीनिंग प्लांट के संचालक को टैंपर प्रूफ इलेक्ट्रानिक मीटर लगाना होगा। उन्हें वित्तीय लेखे डबल इंट्री अकाउंटिंग सिस्टम के अनुसार अनिवार्य रूप से तैयार करने होंगे। वे खरीद फरोख्त का सारा भुगतान चेक, बैंक ड्राफ्ट, आरटीजीएस के माध्यम करना होगा। प्रत्येक तिमाही में कुल क्रशिंग क्षमता का कम से कम 80 प्रतिशत क्रश किया जाना अनिवार्य होगा।