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उत्तराखंड: कैबिनेट का फैसला, मैदान के बाद अब प्रदेश के पर्वतीय जिलों में भी खुलेंगे सैनिक स्कूल

Sat, 10 Sep 2022 12:08 AM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 10 Sep 2022 12:08 AM IST
सार

प्रदेश सरकार की ओर से देहरादून के राजीव गांधी नवोदय विद्यालय और रुद्रपुर के एएन झा इंटर कालेज को सैनिक स्कूल के रूप में चलाए जाने का प्रस्ताव है, जिसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है।

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Uttarakhand Cabinet meeting Decision: Sainik schools will soon open in hilly areas also
सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : ANI

विस्तार

उत्तराखंड में देहरादून और रुद्रपुर में सैनिक स्कूल खोलने के प्रस्ताव के बाद अब पर्वतीय जिलों में भी स्कूल खोलने की तैयारी है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया है कि भूमि और भवन की उपलब्धता के आधार पर इन स्कूलों को खोला जाएगा।   

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प्रदेश सरकार की ओर से देहरादून के राजीव गांधी नवोदय विद्यालय और रुद्रपुर के एएन झा इंटर कालेज को सैनिक स्कूल के रूप में चलाए जाने का प्रस्ताव है, जिसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है।
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से मानकों को पूरा करने वाले स्कूलों का प्रस्ताव मांगा गया था। जिस पर इन दो स्कूलों का प्रस्ताव है। इसके बाद अब अन्य स्कूलों का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक सैनिक स्कूल के लिए कम से कम सात से आठ एकड़ भूमि की जरूरत होगी।    

प्रदेश में सीधी भर्ती से भरे जाएंगे प्रधानाचार्य के 50 प्रतिशत पद 

प्रदेश के इंटरमीडिएट कॉलेजों में प्रधानाचार्य के 50 प्रतिशत पदों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति एवं शेष इतने ही पदों को विभाग सीधी भर्ती से भरेगा। अमर उजाला ने 15 अप्रैल 2022 को इस खबर को प्रकाशित किया था, जिसके बाद अब धामी कैबिनेट ने इसके प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। प्रदेश के इंटरमीडिएट कालेजों में प्रधानाचार्य के इक्का-दुक्का नहीं, बल्कि 932 पद पिछले कई वर्षों से खाली हैं। पूर्व में प्रधानाचार्य के कुछ पदों को भरा जा सके इसके लिए सरकार की ओर से पदोन्नति में छूट दी गई थी।



प्रधानाध्यापक से प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति के लिए कम से कम पांच साल की इस पद पर मौलिक सेवा को ढ़ाई वर्ष किया गया था। इसके बाद भी प्रधानाचार्य के अधिकतर पद खाली हैं। कैबिनेट की बैठक में अब निर्णय लिया गया है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत सृजित 932 पद के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन न होने पर प्रधानाचार्य पद के लिए 50 प्रतिशत पदोन्नति वरिष्ठता के आधार पर होगी। जबकि शेष 50 प्रतिशत पदों पर प्रधानाध्यापकों एवं प्रवक्ता में से समिति विभागीय परीक्षा कर चयन करेगी। 

शिक्षक संघ ने एलटी शिक्षकों की अनदेखी पर जताई नाराजगी 

राजकीय शिक्षक संघ ने प्रधानाचार्य के 50 प्रतिशत पदों को विभागीय सीधी भर्ती से भरे जाने का यह कहते हुए विरोध किया है कि इसमें एलटी शिक्षकों की अनदेखी हुई है। शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री डॉ. सोहन माजिला ने कहा कि प्रधानाध्यापक के पद पर 55 प्रतिशत सहायक अध्यापक एलटी व 45 प्रतिशत प्रवक्ता संवर्ग से पदोन्नति से भरे जाने की व्यवस्था है। जबकि प्रधानाचार्य पद पर विभागीय सीधी भर्ती के लिए एलटी शिक्षकों की अनदेखी हुई है। प्रवक्ता पद पर कम से कम 10 साल की सेवा की बाध्यता की वजह से कई प्रवक्ता भी विभागीय सीधी भर्ती से वंचित होंगे।  

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