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उत्तराखंड: सिर्फ एक दिन का हो सकता है विधानसभा सत्र, कैबिनेट बैठक में हुई चर्चा

Thu, 17 Sep 2020 09:19 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 17 Sep 2020 09:19 PM IST
सार

  • कैबिनेट ने किया विचार, विधानसभा अध्यक्ष से विचार-विमर्श के बाद होगा फैसला
  • कैबिनेट ने माना कोविड के बढ़ते मामलों के बीच में सत्र का आयोजन जोखिम से भरा
  • 25 सितबंर से पहले सत्र कराने की भी है मजबूरी

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Uttarakhand Cabinet meeting: assembly session may Complete in one day
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देेखते हुए अब विधानसभा सत्र एक दिन में भी सिमट सकता है। बृहस्पतिवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में विधानसभा सत्र के आयोजन को लेकर भी विचार विमर्श किया गया। मंत्रिमंडल ने माना की कोविड के बढ़ते संक्रमण के कारण विधानसभा सत्र को लंबी अवधि के लिए संचालित करना बेहद चुनौतीपूर्ण और सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा है।

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मंत्रिमंडल ने इस बात पर भी विचार किया कि अन्य राज्यों ने इस हालात में क्या उपाय किए। बताया गया कि अन्य राज्यों ने भी विधानसभा सत्र की अवधि को कम किया। इसे देखते हुए मंत्रियों के बीच एक दिन के सत्र को लेकर भी सहमति बनी। 
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सूत्रों के मुताबिक सरकार यह फैसला करने से पहले विधानसभा अध्यक्ष की राय लेगी। खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल से बात करेंगे। इसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसके साथ ही सरकार की निगाह 20 सितंबर को होने वाली विधानसभा की कार्यसमिति की बैठक पर भी है। कार्यसमिति में नेता सदन त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ ही नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश सहित अन्य सदस्य भी शामिल है। कार्यसमिति की बैठक में भी इस मसले पर बात की जा सकती है। 
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प्रदेश में 23 सितंबर से विधानसभा सत्र प्रस्तावित है और इसकी अधिसूचना जारी की जा चुकी है। विधानसभा सत्र 25 सितंबर तक होना है। तीन दिन के सत्र में सरकार अब तक लाए गए अध्यादेशों को विधेयक के रूप में पारित कराने की तैयारी में है। खास बात ये भी है कि सत्र आयोजित करना सरकार की मजबूरी भी है। अंतिम सत्र 25 मार्च को देहरादून में ही समाप्त हुआ था। छह माह के अंदर कम से कम एक बार सत्र आयोजित करना जरूरी भी है। इस हिसाब से सत्र का आयोजन 25 मार्च से पहले होना जरूरी है।

दूसरी ओर, स्थिति ये है कि कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखते हुुए सभी सदस्यों की मौजूदगी में सत्र आयोजित करना विधानसभा के लिए कठिन है। ऐसे में हाइब्रिड सत्र पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत सत्र से कुछ विधायकों को वर्चुअल तरीके से जोड़ा जाएगा।

सचिवालय में सत्र के संचालन की उम्मीद अब और बढ़ी

सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में विधानसभा सत्र आयोजित करने की संभावना अब और अधिक हो गई है। बृहस्पतिवार को सीएम के साथ संयुक्त निरीक्षण के बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने स्वीकार किया कि पर्याप्त जगह और सुविधाओं की दृष्टि से सभागार उपयुक्त है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। 

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्य सचिव ओम प्रकाश सहित विधानसभा और सचिवालय के अधिकारियों ने सभागार का संयुक्त निरीक्षण किया। दोनों ही नेताओं ने सभागार को सदस्यों के सामाजिक दूरी के नियमों के तहत बैठने, विधानसभा और सचिवालय के सत्र से जुड़ने वाले कर्मियों की सुरक्षा, वीडियो कांफ्रेंस की सुविधा आदि के हिसाब से परखा। निरीक्षण के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि स्थान की उपलब्धता के हिसाब से सभागार उपयुक्त है। इतना होने पर भी इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इसे अभी विकल्प के रूप में ही देखा जा रहा है। नेता सदन त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ ही नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश सहित अन्य सदस्य भी शामिल है। कार्यसमिति की बैठक में भी इस मसले पर बात की जा सकती है। 

प्रदेश में 23 सितंबर से विधानसभा सत्र प्रस्तावित है और इसकी अधिसूचना जारी की जा चुकी है। विधानसभा सत्र 25 सितंबर तक होना है। तीन दिन के सत्र में सरकार अब तक लाए गए अध्यादेशों को विधेयक के रूप में पारित कराने की तैयारी में है। 

खास बात ये भी है कि सत्र आयोजित करना सरकार की मजबूरी भी है। अंतिम सत्र 25 मार्च को देहरादून में ही समाप्त हुआ था। छह माह के अंदर कम से कम एक बार सत्र आयोजित करना जरूरी भी है। इस हिसाब से सत्र का आयोजन 25 मार्च से पहले होना जरूरी है।

दूसरी ओर, स्थिति ये है कि कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखते हुुए सभी सदस्यों की मौजूदगी में सत्र आयोजित करना विधानसभा के लिए कठिन है। ऐसे में हाइब्रिड सत्र पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत सत्र से कुछ विधायकों को वर्चुअल तरीके से जोड़ा जाएगा।

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