उत्तराखंड कैबिनेट: पर्वतीय क्षेत्र की महिलाओं को राहत, खेती किसानी, उद्योग में मिल सकेगा बैंक लोन
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की महिलाओं को भूमि का सहखातेदार बनाने की घोषणा पर बुधवार को कैबिनेट की मुहर लगने पर प्रदेश की पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को बड़ी राहत की उम्मीद है। इसी के साथ कैबिनेट ने बेटियों को पैतृक संपत्ति का अधिकार देने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगा दी। संपत्ति पर हक न होने के कारण महिलाओं को बैंक लोन नहीं मिल रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए ही यह घोषणा की गई थी। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी इससे राहत मिलने की उम्मीद है।
महिलाओं को गोल खातों का सह खातेदार बनाने की योजना पर सरकार पिछले लंबे समय से काम कर रही थी। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी भी बनाई गई थी। खुद मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की थी और पर्वतीय जिलों में इस घोषणा को महिला किसानों के लिए खासी राहत वाला बताया गया था। चुनावी वर्ष में महिलाओं यह तोहफा देकर सरकार ने एक बड़े वर्ग का दिल जीतने की कोशिश भी की है।
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने की थी इसकी घोषणा
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कुछ समय पहले ही महिलाओं को सहखातेदार बनाने की घोषणा पौड़ी के एक कार्यक्रम में की थी। प्रदेश में बेटियों को अधिकार देने का मामला पहले से ही जारी था। मुख्यमंत्री की इस घोषणा को हाल ही में आयोजित सत्र के दौरान विधेयक के रूप मे लाने की तैयारी भी थी। न्याय विभाग की राय न मिल पाने के कारण यह मामला उस समय टल गया था।
यह व्यवस्था की गई
महिलाओं को भूमि पर सहखातेदार का अधिकार देने के लिए राजस्व विभाग ने जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा-130 में नई धारा 130(1)को जोड़ने का प्रस्ताव किया है। इसमें कुछ शर्तें भी जोड़ी गईं हैं। शर्तों के मुताबिक महिलाओं को यह अधिकार मात्र पैतृक संपत्ति पर ही मिलेगा। तलाक होने पर यह अधिकार खुद ही समाप्त हो जाएगा।
संक्रमणीय अंतरणीय अधिकार वाले भूमिधर पुरुष के जीवन काल में जीवन यापन करने वाली पत्नी ही सहखातेदार होगी। अभी तक विधवा, पुत्र और अविवाहित महिला का ही विरासत की भूमि पर हक था।
अब इसमें संतानहीन, परित्यक्ता पुत्री को भी यह अधिकार दिया गया है। परित्यक्ता को भी परिभाषित किया गया है और इसमें सात साल तक पति का पता न लगने पर परित्यक्ता मान लेने का प्रावधान जोड़ा गया है।