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Uttarakhand: कैबिनेट का फैसला, भाषा संस्थान को छह साल बाद मिलेंगे स्थायी अधिकारी-कर्मचारी
Wed, 14 Feb 2024 07:21 PM IST
अलका त्यागी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Wed, 14 Feb 2024 07:21 PM IST
सार
Uttarakhand Cabinet Decision: धामी कैबिनेट ने बुधवार को भाषा संस्थान एवं अकादमियों के विभागीय ढांचे के पुनर्गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
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भाषा संस्थान का मिलेंगे कर्मचारी
- फोटो : Istock(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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विस्तार
उत्तराखंड में स्थानीय बोली, भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2010 में उत्तराखंड भाषा संस्थान की स्थापना की गई थी। इसके बाद वर्ष 2018 में इसका एक्ट बना, लेकिन तभी से संस्थान अस्थाई कर्मचारियों के भरोसे चल रहा था, अब संस्थान में सहायक निदेशक और शोध अधिकारी सहित 42 पद सृजित होंगे।
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कैबिनेट में आए प्रस्ताव के मुताबिक, उत्तराखंड भाषा संस्थान के तहत गठित हिंदी, उर्दू, पंजाबी एवं लोक भाषा एवं बोली अकादमियों का उद्देश्य हिंदी, उर्दू, पंजाबी एवं लोक भाषा और बोलियों का विकास संवर्धन, शोधकार्य, मानकीकरण, अनुवाद कार्य करना है।
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वर्तमान में उत्तराखंड भाषा संस्थान का कार्य नितांत अस्थायी सृजित पदों एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के माध्यम से किया जा रहा है। बताया गया कि विभाग में करीब 14 पीआरडी कर्मचारी तैनात हैं। संस्थान में सहायक निदेशक, प्रकाशन अधिकारी, शोध अधिकारी सहित कई पदाें सहित कुल 51 पद सृजित करने का प्रस्ताव रखा गया था।
कैबिनेट ने इसमें से 42 पदों को सृजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। संस्थान में स्थाई अधिकारी, कर्मचारी मिलने से स्थानीय बोली, भाषा को बढ़ावा दिए जाने के काम को गति मिलेगी।