विधायकों का बढ़ाया भत्ता, बेरोजगारों का बैठाया भट्टा

अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 28 Jan 2014 08:13 PM IST
uttarakhand cabinet decision
उत्तराखंड में जारी राजनीतिक 'आपदा' के बीच विधायकों के वेतन, भत्ता और पेंशन आदि में इजाफा किया गया है। जबकि समूह ग की भर्ती के लिए आवेदन करने वाले बेरोजगार सामान्य अभ्यर्थी को अब पांच और एससीएसटी को तीन सौ रुपए खर्च करने होंगे। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले हुए।

विधायकों के भत्ते सौ फीसदी बढ़े

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक अब विधायकों को प्रतिमाह मिलने वाले पांच हजार वेतन की जगह दस हजार रुपए मिलेंगे। निर्वाचन क्षेत्र भत्ते की 30 हजार रुपए की राशि 60 हजार रुपए कर दी गई है। दैनिक भत्ते को एक हजार से बढ़ाकर दो हजार कर दिया गया है।

विधायक को अब प्रतिमाह तीन हजार रुपए चालक भत्ते के रूप में भी मिलेगा। अभी विधायक को छह हजार रुपए तक मेडिकल भत्ता मिलता था। जो अब प्रथम श्रेणी के अधिकारी केतर्ज पर पूरे परिवार को दिया जाएगा।

अब विधायक और परिवार को बीमारी में खर्च होने वाले मेडिकल बिलों का भुगतान किया जाएगा। इसी के अनुरूप पूर्व विधायकों को भी मिलने वाली राशि बढ़ाई गई हैं।

बेरोजगारों पर गाज
एक अन्य फैसले में सरकार ने बेरोजगारों पर गाज गिराई है। अभी समूह ग की भर्ती केलिए आवेदन नि:शुल्क होता था। कैबिनेट केफैसले केबाद सामान्य अभ्यर्थी को पांच सौ रुपए और एससीएसटी को तीन सौ रुपए खर्च करने होंगे। जबकि 2012 में सरकार ने एक शासनादेश केमाध्यम से आवेदन को नि:शुल्क किया था।

लोक सेवा आयोग की परिधि से बाहर समूह ग की सीधी भर्ती में शुल्क लगाने केपीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि प्राविधिक शिक्षा परिषद को परीक्षाएं कराने में दिक्कतें आ रही थीं। दरअसल बड़ी संख्या में आवेदन आते थे ऐसे में संबंधित विभाग पर बहुत खर्च आता था।

अभी तक जिस विभाग में भर्ती होती थी वही परीक्षा का खर्च वहन करता था। हालांकि कैबिनेट ने यूजेवीएनएल, यूपीसीएल और पिटकुल में 1057 रिक्त पदों को मंजूरी दी है। जिसका विज्ञापन हो चुका है और लाखों आवेदन आए हैं।

कैबिनेट केफैसले के मुताबिक अब प्रदेश के औद्योगिक संस्थानों (सिडकुल)में मिश्रित भू-उपयोग पर आधारित उद्योगों को बिना किसी वित्तीय छूट के मिश्रित उद्योग स्थापित करने की छूट होगी। अभी तक एक जैसे ही उद्योग लगाए जा सकते थे।

कैबिनेट ने समाज कल्याण विभाग के संरचनात्मक ढांचे के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी है। सिंचाई विभाग के विभागीय संरचना के अधीन अभियांत्रिकी संवर्ग में चार मुख्य अभियंता स्तर का पुनर्गठन किया जाएगा। वहीं राज्य के सेवारत, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को स्थाई सम्पत्ति केअन्तरण पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट को मंजूरी दी है।

गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जातियों केमजदूरों व भूमिहीन कृषकों को दस नाली भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। इसकेलिए सरकार खेती की जमीन खरीद कर उपलब्ध कराएगी।

बोर्डिंग भत्ते में 25 प्रतिशत की वृद्घि
कैबिनेट ने उत्तराखंड दंत शल्यक सेवा नियमावली को भी मंजूरी दी है। प्रदेश में अब दंत चिकित्सकों के पदों की संख्या बढ़कर 105 हो जाएगी। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग केअंतर्गत नर्सिंग संवर्ग के कार्मिकों को नर्सिंग एवं बोर्डिंग भत्ते में 25 प्रतिशत की वृद्घि की है। कैबिनेट ने यूकेलिप्टस, पापलर आदि इमारती एवं कोमल प्रकाष्ठ प्रजातियोंएवं गैर प्रकाष्ठ वन उपज को अभिवहन नियमावली 2012 केप्राविधानों से मुक्त करने का फैसला लिया है।

सीमांत सड़क के लिए नियमों में ढील
आपदा केबाद सीमांत क्षेत्रों की खस्ताहाल जर्जर सड़कों केनिर्माण के लिए सरकार ने नियमों में ढील दी है। सीमा सड़क संगठन और आईटीबीपी को सीमान्त क्षेत्रों में सड़क का निर्माण कार्य करने के लिए खनन पट्टा स्वीकृत किया है।

जबकि अभी नई माइनिंग पॉलिसी केतहत टेंडर प्रक्रिया से पट्टों का आवंटन होता है। कैबिनेट ने बीआरओ और आईटीबीपी को सीमांत जनपदों में टेंडर में छूट गए लॉट को आधार मूल्यों के अनुसार आवंटित किया जाएगा।

इतना ही नहीं ईंट मिट्टी एवं सड़क भरान के लिए साधारण मिट्टी की खुदान को खनन संक्रियाओं से मुक्त कर दिया गया है। अब बीआरओ एवं आईटीबीपी सड़क निर्माण में आसानी से मिट्टी की खुदाई कर सकेंगे। कैबिनेट ने उत्तराखंड सड़क संरचना सुरक्षा विधेयक 2014 को विधानसभा में पुन:स्थापित करने को मंजूरी दी है।

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