पहली बार इतने घंटे चली सदन की कार्रवाई, रार और तकरार के बीच 39957 करोड़ का बजट पास
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उत्तराखंड विधानसभा के इतिहास में पहली बार आनन-फानन में अनुपूरक सूची लाकर प्रदेश सरकार ने 39957.13 करोड़ रुपये का उत्तराखंड विनियोग विधेयक(बजट) पारित कर दिया।
इस दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा काटा। विभागीय अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सरकार ने जीएसटी बिल में संशोधन के बहाने पेश अनपूरक सूची में लोकायुक्त और ट्रांसफर बिल पर गठित प्रवर समिति के प्रतिवेदन और त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट को शामिल करते हुए उन्हें सदन पटल पर रख दिया।
बजट पारित करने और तीनों रिपोर्ट पटल पर रखने के बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इससे विपक्ष बौखला उठा। जमकर नारेबाजी के बीच उसने सदन से वाकआउट कर दिया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने सरकार पर विपक्ष को अंधेरे में रखने का आरोप लगाया।
इतिहास में पहली बार चली इतने घंटे कार्रवाई
इतिहास में पहली बार सदन की कार्यवाही रात 11 बजकर 50 मिनट तक चली। इससे पूर्व विपक्ष सदन में पेश 14 विभागीय अनुदानों मांगों में से 11 पर कटौती प्रस्ताव लाया जो चर्चा के बाद गिर गए।
विभागीय अनुदान मांगों की स्वीकृति के बाद वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने देर रात सदन पटल पर उत्तराखंड विनियोग विधेयक 2017 को पुर:स्थापित करने की सदन से अनुज्ञा मांगी और इस विचार के बाद इसे पारित कर दिया गया। बता दें कि गत आठ नवंबर को वित्त मंत्री ने विधानसभा में अपना पहला करमुक्त शून्य घाटे का बजट पेश किया था
सदन की कार्यवाही का नया कीर्तिमान
उत्तराखंड विधानसभा में एक कार्यदिवस पर सबसे लंबी कार्यवाही का नया कीर्तिमान स्थापित हो गया। वर्ष 2002 में 11 बजकर 11 मिनट तक सदन की कार्यवाही चली थी। मगर इस चतुर्थ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बृहस्पतिवार को सदन की कार्यवाही 11 बजकर 50 मिनट तक चली।
आधी रात तक सदन चलाने पर विपक्ष का हंगामा
सदन की कार्यवाही आधी रात तक संचालित होने पर विपक्ष ने सदन में खूब हंगामा काटा। विपक्षी सदस्य करन माहरा वेल में आ गए। इस बीच पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने सदन की कार्यवाही जारी रखने पर एतराज जताया। उन्होंने कहा कि 12 बजे के बाद अगला दिवस शुरू हो जाएगा। नियमत: यह उचित नहीं है। इस पर संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि 12 बजे के बाद सदन की कार्यवाही जारी रहने पर सरकार नई कार्यसूची लाएगी। ये सदन तय करेगा। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन का वह भी हिस्सा हैं। यदि बहुमत के दम पर सरकार ने ऐसा किया तो विपक्ष पांच साल के सदन का त्याग कर देगा।
आधी रात तक सदन चलाने पर विपक्ष का हंगामा
इन विभागीय बजट को मिली मंजूरी
विभाग - रुपये
मंत्रिपरिषद- 56 करोड़,90 लाख 67 हजार
न्याय प्रशासन- 95 करोड़ 60 लाख, 89 हजार
राजस्व व सामान्य प्रशासन-1291करोड,21 लाख 87 हजार
लोक सेवा आयोग- 4 करोड़, 55 लाख, 73 हजार
पुलिस एवं जेल- 726 करोड़, 37 लाख 67 हजार
चिकित्सा एवं परिवार कल्याण- 1139 करोड़, 75 लाख, 26 हजार
सूचना- 30 करोड़, 11 लाख 71 हजार
समाज कल्याण-925 करोड़ 98 लाख 29 हजार
ग्राम्य विकास- एक हजार 454 करोड़ 31 लाख 23 हजार
ऊर्जा- 92 करोड़ 72 लाख 32 हजार
लोक निर्माण विभाग- 1176 करोड़ 67 लाख 27 हजार
उद्योग- 156 करोड़ 16 लाख 81 हजार
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति- 166 करोड़ 40 लाख 47 हजार
पूर्ववर्ती सरकार के समय से त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट दबाये रखी गई थी। इस रिपोर्ट की एटीआर में तत्कालीन कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व तत्कालीन कृषि सचिव ओम प्रकाश को आयोग ने क्लीन चिट दी है। लेकिन पूर्व सरकार ने जनता को अंधेरे में रखा, जबकि इस रिपोर्ट को छह माह के भीतर सदन पटल पर रखना था। सरकार ने लोकायुक्त और ट्रांसफर बिल के प्रतिवेदन सदन पटल पर रख दिए हैं। अगले सत्र में इन पर चर्चा होगी।
- मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता, प्रदेश सरकार
हम सदन चलाने में सत्ता पक्ष का पूरा सहयोग कर रहे थे, लेकिन संख्या बल के आधार पर सरकार ने संसदीय परंपराओं को ताक पर रखकर अनुपूरक कार्यसूची ला दी। वह भी आखिरी वक्त पर। विपक्ष को विश्वास में नहीं लिया गया, जिसका कड़ा विरोध करते हैं। सरकार का यही रुख रहा तो विपक्ष कार्यमंत्रणा की बैठकों में शरीक नहीं होगा।
- डॉ. इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष