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उत्तराखंड बजट 2020: बुनियादी विकास के लिए धन जुटाना त्रिवेंद्र सरकार के लिए चुनौती 

Thu, 27 Feb 2020 04:30 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 27 Feb 2020 04:30 AM IST
सार

  • वेतन, पेंशन और ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है आधा बजट

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uttarakhand budget 2020 :  funds for basic development is challenge for trivandra government
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

प्रदेश सरकार का आधा बजट कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन और भत्तों और पुराने कर्ज के ब्याज चुकाने पर ही खर्च हो रहा है। किफायत बरतने और प्रशासनिक सुधारों के तमाम उपायों के बावजूद ये खर्च सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर है। नतीजा यह है कि सरकार के पास सड़क, पानी, स्वास्थ्य, रोजगार सरीखे बुुनियादी आवश्यकताओं का पूरा करने के लिए पैसा नहीं है। त्रिवेंद्र सरकार अपना तीसरा बजट पेश करने जा रही है। लेकिन उसके लिए बुनियादी विकास के लिए धन जुटाना इस बार भी पहले जितना चुनौतीपूर्ण रहेगा। 

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जहां तक वेतन, पेंशन और ब्याज का मसला है तो इनका बढ़ता आकार सरकार के काबू से बाहर हो रहा है। आंकड़े इस तथ्य की तस्दीक करते हैं। भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक की राज्य के वित्त पर दी गई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016-17  प्रदेश सरकार ने वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज की ब्याज अदायगी पर 16,464 करोड़ रुपये खर्च किए। वित्त विभाग के आंकड़ों के हिसाब 2016-17 में प्रदेश सरकार के बजट का आकार 35,609 करोड़ रुपये का था। यानी बजट के अनुपात में केवल वेतन, पेंशन ब्याज का खर्च 46.23 प्रतिशत था।
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2019-20 में ये बढ़कर 57 फीसदी के पार पहुंच चुका है। राज्य सरकार के आंकड़ों के हिसाब से एजी ने 2020-21 में सिर्फ वेतन खर्च का ही जो अनुमान लगाया है वह 16,960 करोड़ रुपये है। यदि सरकार कोई उपाय नहीं करती है तो इसके 2021-22 तक बढ़कर 18,826 करोड़ पहुंचने के आसार हैं। ये तो वेतन का आंकड़ा है। 2016-17 से 2021-22 तक पेंशन का ही खर्च 3,723 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,759 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। 

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कर्ज लेने की लत सरकार की शायद ही टूटेगी

आय के सीमित साधन होने की वजह से खुले बाजार से कर्ज लेने की लत सरकार की शायद ही टूटेगी। इस हिसाब से कर्ज के ब्याज लौटाने पर ही सरकार को 2021-22 तक 7271 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। कुल मिलाकर पिछली सभी सरकारों की तरह त्रिवेंद्र सरकार भी वेतन, पेंशन और ब्याज के त्रिकोण में फंसी है और इससे बाहर निकलना उसके लिए आसान नहीं है।

लगातार बढ़ता जा रहा है वेतन, पेंशन और ब्याज का खर्च  

मद    2016-17    2017-18    2018-19    2019-20    2020-21    2021-22
वेतन    9,570    11,212    13765    15279    16,960    18826
पेंशन    3,170    4272    5,352    6,958    9,045    11,759 
ब्याज    3,723    4,178    4,906    5,627    6398    7,271
कुल    16,464    20,141    24,024    27,865    32,404    37,856

नोट: आंकड़े भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के हैं। 2016-17 के आंकड़े वास्तविक हैं। बाकी संकेतक हैं।

सरकार का सालाना राजस्व व्यय

वर्ष     बजट    वेतन/पेंशन/ब्याज प्रतिशत
2016-17    35609    46.23
2017-18    42,725    47.14
2018-19    45585    52.70
2019-20    48663    57.26
........................................................................
नोट: आंकड़े प्रदेश सरकार के वित्त विभाग के हैं।

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