स्मृति शेष: हर गांव तक सड़क पहुंचाना चाहते थे विधायक जीना, लेकिन अधूरा रह गया सपना
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उत्तराखंड के विधायक सुरेंद्र सिंह जीना ने भिकियासैंण और सल्ट विधानसभा का विधायक रहते हुए क्षेत्र में कई विकास कार्यों को अंजाम दिया। विधायक जीना क्षेत्र के हर गांव तक सड़क पहुंचाने की बात कहते थे। उनका कहना था कि जब गांव-गांव में सड़क, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएं पहुंचेंगी तभी वहां से पलायन रुकेगा। उन्होंने अपनी विधायक निधि से काफी बजट सड़कों के निर्माण के लिए दिया।
उन्होंने भिकियासैंण में राजकीय महाविद्यालय की स्थापना, विद्युत वितरण खंड कार्यालय, आरईएस सब डिविजन कार्यालय, मुंसिफ कोर्ट की स्वीकृति, पर्यटन में मासी, केदार, भिकियासैंण मंदिरों का सौंदर्यीकरण किया। सल्ट विधायक रहते हुए उन्होंने पेयजल आपूर्ति की बड़ी योजनाओं को मंजूरी दिलाई। इनमें बरकिंडा-मानिला, कोटेश्वर-शशिखाल, हंसीढूंगा-गूजरकोट पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण, वदनगढ़-झिमार, गढ़कोट-सराईखेत पंपिंग योजनाओं की स्वीकृति शामिल हैं।
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इसके अलावा उन्होंने स्याल्दे और मानीला महाविद्यालयों को यूजीसी मान्यता, स्याल्दे महाविद्यालय में भवन व छात्रावास निर्माण, तल्ला सल्ट महाविद्यालय की स्थापना, मानिला में विद्युत सब स्टेशन का निर्माण, मरचूला-चित्तौड़खाल तक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित, स्याल्दे-मानीला-सराईखेत में स्टेडियम निर्माण सहित कई कार्य करवाए।
मंत्री बनने की इच्छा नहीं हो सकी पूरी
विधायक सुरेंद्र सिंह जीना लगातार तीन बार विधायक चुने गए लेकिन मंत्री पद नहीं पा सके। तीसरी बार विधायक बनने पर उनके समर्थकों को पूरा भरोसा था कि वह मंत्री जरूर बनाए जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पिछले कुछ समय से मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार में भी उन्हें प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
हमेशा के लिए खामोश हो गई बेबाक धारदार आवाज
50 साल की उम्र में सियासत का जो अंदाज विधायक सुरेंद्र सिंह जीना का रहा, वह नई पीढ़ी के नेताओं के लिए एक मिसाल है। बुनियादी सवालों और कमजोर वर्ग के पक्ष में सदन के भीतर अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हो जाने का साहस जीना सरीखे नेताओं में ही था। विधानसभा के सभामंडल में कार्यवाही के दौरान उनका चुटीला अंदाज समूचे सदन को गुदगुदा देता था। किसी ने नहीं सोचा था कि वो चुटीली, बेबाक व धारदार आवाज हमेशा के लिए यूं खामोश हो जाएगी।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल कहते हैं, यह मेरी व्यक्तिगत क्षति है। मुझे सदन में जीना की सक्रियता के वे दृश्य याद आ रहे हैं। वह जिस सक्रियता के साथ सदन के भीतर अपने क्षेत्र व लोगों की समस्याओं को उठाते थे, प्रश्न करते थे, तर्क-वितर्क करते थे, वह सभी के लिए एक सीख बन गई थी।
सियासी जानकारों की राय में जीना ने जायज मसलों पर अपना पक्ष रखने में कभी संकोच नहीं किया। बेशक उनके सवालों पर कई बार उन्हीं की पार्टी की सरकार को असहज होना पड़ जाता था। लेकिन उन्होंने अपनी बात मजबूती से रखी और उनकी बात के बहाने यदि विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलने की कोशिश की तो वह अपनी सरकार की ढाल भी बन गए। कर्मचारियों, उपनल कर्मियों, संविदा कर्मियों की मांगों को उन्होंने प्रश्नों, अनुपूरक प्रश्नों के जरिये बार-बार उठाया।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत कहते हैं, वह एक बहुत अच्छे विधायक थे। निर्भीकता से अपनी बात कहते थे। वह मुख्यमंत्री के रूप में मेरा ध्यान सबसे ज्यादा अपनी आकृष्ट करने वाले विधायक थे। अपने कर्तव्य पालन में मेरी कठोर आलोचना करने से भी नहीं चूकते थे। उनके दुखद निधन पर मेरे पास शब्द नहीं हैं।