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शिकंजा : आयुर्वेद विवि की वित्तीय शक्तियां भी छिनी, कुलपति के खिलाफ शुरू हुई जस्टिस केडी शाही की जांच

Wed, 13 Jul 2022 07:27 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 13 Jul 2022 07:27 PM IST
सार

आयुर्वेद विवि पर शिकंजा और अधिक कड़ा हो गया है।कुलपति के खिलाफ नियम विरुद्ध पदोन्नति लेने और अनियमितता बरतने की जांच जस्टिस केडी शाही शुरू कर चुके हैं और अब विवि की वित्तीय एवं आहरण अधिकार भी छीन लिए गए हैं।

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Uttarakhand Ayurved University: financial powers of University were also snatched away
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वित्तीय अनियमितताओं एवं सरकारी संपत्ति व धन के दुरुपयोग को लेकर अब उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की सभी वित्तीय एवं आहरण अधिकार भी छीन लिए गए हैं। शासन ने अग्रिम आदेशों तक ये सारे अधिकार तत्काल प्रभाव से देहरादून के जिलाधिकारी में निहित करने के आदेश जारी किए हैं।

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सचिव आयुर्वेद डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने इस संबंध में मंगलवार को आदेश जारी किए। इसके साथ आयुर्वेद विवि पर शिकंजा और अधिक कड़ा हो गया है। इससे पूर्व शासन विवि में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच के लिए जांच समिति बना चुका है। कुलपति के खिलाफ नियम विरुद्ध पदोन्नति लेने और अनियमितता बरतने की जांच जस्टिस केडी शाही शुरू कर चुके हैं और अब विवि की वित्तीय एवं आहरण अधिकार भी छीन लिए गए हैं।
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जारी आदेश में कहा गया है कि विवि में भ्रष्टाचार, शासकीय संपत्ति एवं धन का दुरुपयोग करने, बिना शासन की अनुमति के सृजित पदों से अधिक की तैनाती करने, प्रवेश परीक्षाओं में धांधली करने व अन्य नियम विरुद्ध कार्य करने की शिकायतें हैं। वित्तीय अनियमितताओं पर लेखा परीक्षा विभाग ने विवि में ऑडिट कराया।
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ऑडिट की रिपोर्ट में अनियमितताएं पाई गईं। इन अनियमितताओं पर विवि प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। उसकी इस विफलता और शासकीय आदेशों की निरंतर की जा रही अवहेलना को शासन ने असंवैधानिक, अवैध तथा नियम विरुद्ध माना है। शासन ने जनहित और कार्यहित में विधि का शासन लागू करने के लिए विवि के समस्त वित्तीय एवं आहरण वितरण के अधिकार जिलाधिकारी देहरादून में निहित कर दिए हैं। 

सीएस की बैठक में हुआ था फैसला

भ्रष्टाचार, नियुक्तियों धांधली के आरोपों के लिए चर्चित आयुर्वेद विवि की शासन ने लेखा परीक्षा विभाग से स्पेशल ऑडिट कराया था। 20 नवंबर 2019 को लेखा विभाग ने ऑडिट रिपोर्ट दी। ऑडिट रिपोर्ट पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया।

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विवि ने स्वायत्तता को बनाया ढाल

भ्रष्टाचार की शिकायतों पर शासन ने जब-जब विवि से जवाब मांगा, विवि ने इसकी अनदेखी की। विवि की स्वायत्तता को जवाबदेही से बचने की ढाल बनाया। शासन ने अपर सचिव एसएस वल्दिया की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई। लेकिन विवि ने जांच कमेटी को कोई दस्तावेज नहीं दिया और बैरंग लौटा दिया।

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