उत्तराखंड विधानसभा सत्र 2020: विधानसभा की कार्यवाही में वर्चुअल शामिल होने के बनेंगे नियम
- सीएम के ट्वीट के विपक्ष ने सदन में बनाया मुद्दा, स्पीकर ने दी व्यवस्था
- कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने व्यवस्था के तहत उठाया सवाल
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उत्तराखंड विधानसभा में वर्चुअल उपस्थिति के लिए अब नियम बनाया जाएगा। मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की वर्चुअल उपस्थिति को लेकर सदन में उठे विवाद के बाद पीठ की ओर से यह निर्देश जारी किया गया।
नेता सदन त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बार सत्र शुरू होने से ठीक पहले कोरोना संक्रमित हुए थे। ऐसे में मुख्यमंत्री को वर्चुअल तरीके से सदन की कार्यवाही से जोड़ा गया। सोमवार को दिवंगत विधायकों को मुख्यमंत्री ने इसी तरीके से श्रद्धांजलि दी। विवाद मंगलवार को खड़ा हुआ। मुख्यमंत्री के अधिकारिक ट्वीटर हैंडल में कहा गया कि उत्तराखंड के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही में प्रतिभाग किया।
इसी को कांग्रेस के मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन आदि ने मुद्दा बनाया और कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि वर्चुअल प्लेटफार्म पर सीएम सदन की कार्यवाही का हिस्सा हैं की नहीं। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि वर्चुअल के लिए कार्यसंचालन नियमावली में कोई व्यवस्था नहीं है।
काजी ने इस मामले को व्यवस्था के प्रश्न के तहत उठाया और कहा कि सामान्य स्थिति में यह चल जाएगा लेकिन मत विभाजन, अविश्वास प्रस्ताव के दौरान यह विवाद का विषय बनेगा। काजी ने यह भी कहा कि ऑनलाइन नोटिस या प्रश्न लगाने का भी कार्य संचालन नियमावली में कोई प्रावधान नहीं है।
कुछ विधायकों को अलग बिठाने पर यह मामला पहले भी उठा था। उस समय विधानसभा की ओर से कहा गया था अलग कमरे को भी सभा मंडप का हिस्सा माना गया है और विधानसभा की ओर से इस बारे में आदेश कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण के कारण इस बार सामाजिक दूरी के नियम के तहत सभा मंडप में कुल 39 विधानसभा सदस्य है।
शेष 30 के लिए विधानसभा में ही अलग कमरे में बैठने की व्यवस्था की गई है और इन्हें वर्चुअल तरीके से सभा मंडप से जोड़ा गया है। पीठ की ओर से कार्यसंचालन नियमावली में वर्चुअल और ऑनलाइन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया।