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उत्तराखंड विधानसभा सत्र: सरकार ने 2293 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता योजनाओं के लिए जुटाए

Tue, 22 Dec 2020 12:04 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 22 Dec 2020 12:04 AM IST
सार

  • 4000 करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट लाकर भी राहत में सरकार
  • पीआरडी, पेंशन, वेतन आदि को मिलेगी राहत
  • लोक निर्माण विभाग के खाते में गए सबसे अधिक पैसे
  • वृहद निर्माण के लिए की 460 करोड़ रुपये की व्यवस्था

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Uttarakhand assembly winter session 2020 First Day All Update
विधानसभा सत्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अनुपूरक बजट के जरिये उत्तराखंड सरकार ने 2293 करोड़ रुपये केंद्र सहायतित योजनाओं के लिए जुटाए हैं। प्रदेश सरकार के लिए राहत की बात यह भी है कि कर्मचारियों के वेतन, भत्तों के लिए जितने का अनुमान लगाया गया था, उससे कम खर्च हुआ। ऐसे में सरकार पर दबाव अब अपनी योजनाओं के लिए पैसा जुटाने का है। यह बजट मंगलवार को पारित होगा। 

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सोमवार को प्रदेश सरकार ने 4063.79 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट सदन के पटल पर रखा। इसमें 2071.42 करोड़ रुपये राजस्व और 1992.37 करोड़ रुपये पूंजीगत मद में हैं। अनुपूूरक बजट में केंद्र सहायतित योजनाओं के लिए सबसे अधिक बजट की व्यवस्था की गई है। इसमें भी लोक निर्माण विभाग के खाते में सबसे अधिक बजट आया है।
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वृहद निर्माण के लिए सरकार ने 460 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। जानकारी के मुताबिक 641 करोड़ रुपये आपदा प्रबंधन के लिए रखे गए हैं। 500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत की गई है। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक के मुताबिक 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था कुंभ मेले के लिए की गई है। 
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सदन के पटल पर सरकार की ओर से एफआरबीएम के तहत दृष्टि पत्र भी रखा गया गया है। इतना साफ है कि कर्मचारियों के वेतन को लेकर सरकार राहत में है। वर्ष 2021 के मूल बजट में सरकार ने वेतन और भत्तों के लिए करीब 15106.89 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया था। इसमें से अक्तूबर तक 7745.81 करोड़ रुपये खर्च हुए। यह कुल बजट का करीब 51 प्रतिशत पाया गया। इस हिसाब से वेतन और भत्तों पर खर्च की मद में से बचत का अनुमान लगाया जा रहा है। 

नई मदों में सरकार ने होमगार्ड, पीआरडी सहित अन्य विभागों के लिए भी बजट की व्यवस्था की है। पीआरडी जवानों के लिए एक करोड़ रुपयेे का बजट रखा गया है। ऐसे में चार हजार करोड़ रुपयेे का अतिरिक्त खर्च होने और कोरोना काल की उथल पुथल के बावजूद सरकार बहुत हद तक राहत में है।

मूल बजट में राजकोषीय घाटा 7549 करोड़ रुपये रहने और राजस्व अधिशेष करीब 50 करोड़ रहने का अनुमान था। सरकार को नई व्यवस्था के तहत करीब पांच हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज भी मिल सकता है और वेतन, भत्तों की मद में भी बचत का अनुमान है। अनुपूरक बजट में कुल 39 मदों में पर्यटन, शिक्षा, लोक निर्माण विभाग आदि के लिए व्यवस्था की गई है।

याद आए पूर्व संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत

सदन के अन्य सदस्यों के बारे में तो स्पष्ट नहीं, लेकिन विपक्ष के दो विधायकों को पूर्व संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत की याद आई। कांग्रेस के मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन और कांग्रेस के ही उपनेता सदन करन माहरा ने कहा कि सदन में परंपरा कैसे निभाई जाती है यह प्रकाश पंत बता गए। इन विधायकों के मुताबिक प्रकाश पंत होते तो सदन में सरकार सोमवार को बजट न रखती। निधन के निदेश के दिन कोई और काम नहीं होता और यह सरकार पहले से जानती है। इसके बावजूद सरकार ने बजट सदन के पटल पर रखना तय किया। पंत इस तरह के मामलों को लेकर संजीदा थे।

नेता प्रतिपक्ष ने महसूस की सरकार की मजबूरी
सदन के पटल पर अनुपूरक रखने के मामले में नेता प्रतिपक्ष का नरम रख भी सामने आया। इंदिरा हृदयेश के मुताबिक सरकार अनुपूरक की अनुमति राज्यपाल से ले चुकी थी। उसे फिर राज्यपाल से अनुमति लेनी होती, लिहाजा कार्यमंत्रणा में उनकी ओर से कहा गया कि सदन में अनुपूरक को सिर्फ पटल पर ही रखा जाएगा। मजबूरी देखते हुए यह स्वीकार किया गया।

साठ सदस्य मौजूद रहे सदन में
सत्र के पहले दिन सदन में 60 विधायकों की मौजूदगी रही। विधानसभा से मिली जानकारी के मुताबिक ट्रेजरी बैंच में महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्य की मौजूदगी नहीं रही। इसके साथ ही सत्तापक्ष के विधायक मुन्ना सिंह चौहान भी आइसोलेशन में रहने के कारण सदन में नहीं आए। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल भी स्वास्थ्य कारणों से सदन में नहीं आए।

सुरेंद्र जीना कर्मठ थे, केसी पुनेठा जुझारू: सीएम
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा सत्र की कार्यवाही में वर्चुअल भाग लिया। उन्होंने दिवंगत विधायक सुरेंद्र सिंह जीना, पूर्व विधायक केसी पुनेठा, सुंदरलाल मंद्रवाल, अनुसूया प्रसाद मैखुरी और तेजपाल सिंह पंवार के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

स्वर्गीय सुरेंद्र सिंह जीना का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि जीना युवा, कर्मठ और ऊर्जावान विधायक थे। अभिवादन करने का उनका अपना तरीका था। उनके असमय जाने से हम सभी अत्यंत दुखी हैं। उन्होंने पूर्व विधायक केसी पुनेठा को भी याद किया। उन्होंने कहा कि पुनेठा का जुझारू व सहनशील व्यक्तित्व था।

पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष अनुसूया प्रसाद मैखुरी का स्मरण के बारे में उन्होंने कहा कि वह अत्यंत विनम्र और सज्जन थे। वर्ष 2002-03 में एक आंदोलन के दौरान उन्हें गंभीर चोट लगी तो मैखुरी ने उनका हाथ पकड़ कर अस्पताल जाने को कहा।

सीएम ने पूर्व विधायक स्वर्गीय सुंदरलाल मंद्रवाल को सही मायनों में गांधीवादी बताया। उन्होंने कहा कि वह विनम्र और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व थे। उनमें कोई अहम नजर नहीं आता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व विधायक तेजपाल सिंह पंवार सीधी और सपाट बात करते थे। उन्होंने कभी असत्य का सहारा नहीं लिया।

मंत्री धन सिंह ने अफसरों को बीच बैठक से लौटाया

उच्च शिक्षा राज्यमंत्री धन सिंह रावत ने अपनी विधानसभा श्रीनगर गढ़वाल की सड़कों के काम की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जाहिर की। लोनिवि व पीएमजीएसवाई के इंजीनियरों से वह इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने कुछ अफसरों को बीच बैठक से लौटा दिया। उन्होंने सचिव लोनिवि को तत्काल एक पत्र भेज लापरवाह अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

राज्यमंत्री धन सिंह रावत अपनी विधानसभा क्षेत्र की सड़कों को लेकर लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। इन बैठकों में उन्होंने लोनिवि व पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को सड़कों के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। लेकिन इन निर्देशों के बावजूद सड़कों की प्रगति संतोषजनक नहीं है। सड़कों की प्रगति का हाल जानने के लिए राज्यमंत्री ने सोमवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में बैठक की। बैठक में लोनिवि के अधिकारी मौजूद थे। बैठक में मंत्री ने पुरानी सड़कों की मरम्मत और डामरीकरण की धीमी गति के बारे में अफसरों का जवाबतलब किया और उन्हें जमकर फटकार लगाई।

बैठक में पीएमजीएसवाई के पुलों एवं मार्गों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान ईडा-नौगांव मोटर मार्ग सौंठी बैंड तक मिलाने और थलीसैंण-जखोला मोटर मार्ग पर आ रहे राजकीय महाविद्यालय थलीसैंण के खेल मैदान की सुरक्षा के लिए दीवार बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने चाकीसैंण-जाख मोटर मार्ग को पीएमजीएसवाई से लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि माजरामहादेव -नौलीसैंण मोटर मार्ग, समैया-बसोला मोटर मार्ग के डामरीकरण एवं सौन्दर-ऐंठी मोटर मार्ग पर पुल की डीपीआर जल्द तैयार करें।

बैठक में पीएमजीएसवाई के अधिकारियों ने बताया कि उनके पास सड़कों के मरम्मत हेतु बजट की भारी कमी है। इसके लिए राज्य सरकार को अलग से व्यवस्था करनी होगी। बैठक में प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग हरिओम शर्मा, मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग पौड़ी अयाज अहमद, मुख्य अभियंता पीएमजेएसवाई केपी उप्रेती, अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग पौड़ी राजेश चंद्र शर्मा, अधिशासी अभियंता पाबौं दिनेश मोहन गुप्ता, अधिशासी अभियंता श्रीनगर प्रत्यूष कुमार, अधिशासी अभियंता बैजरों आदर्श गोपाल सिंह, अधिशासी अभियंता पीएमजीएसवाई महेन्द्र सिंह, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी श्रीनगर मुकेश सकलानी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

सड़कों के नाम लेकर पूछा तो बगले झांकने लगे अफसर
बैठक में मंत्री ने देघाट-समैया-जगतपुरी-बूंगीधार मोटर मार्ग, बूंगीधार-बीरू की धुनी-नक्चुलाखाल मोटर मार्ग, उफरैंखाल-सराईखेत मोटर मार्ग एवं चैखाल-उफरैंखाल मोटर मार्गों के मरम्मत एवं डामरीकरण की प्रगति रिपोर्ट मांगी। इस पर विभागीय अधिकारी बगलें झांकने लगे। अधिकारियों की खामोशी देख मंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने उन्हें बैठक से चले जाने के निर्देश दिए। 

बैठकों में निर्देश दिए, फिर भी ढिलाई
बैठक में राज्यमंत्री ने कहा कि इन सड़कों के बारे में पूर्व में दो बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में स्वयं विभागीय सचिव आरके सुधांशु भी मौजूद थे, लेकिन सड़कों का मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो पाया।

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