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उत्तराखंड: विधानसभा के शीतकालीन सत्र में न सरकार में दिखी धार, न विपक्ष में पैनापन
अरुणेश पठानिया, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 08 Dec 2018 02:52 PM IST
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विधानसभा के शीतकालीन सत्र में न तो सत्ता पक्ष में धार दिखी न ही विपक्ष के तेवरों में पैनापन नजर आया। चार दिन चले इस सत्र में विपक्ष जन सरोकार के मुद्दों को प्रभावी ढंग नहीं उठा पाया। कांग्रेसी सदस्यों ने सनसनी फैलाने के कोशिश की, लेकिन विपक्ष की असल भूमिका में एक बार फिर भाजपा विधायक ही दिखे। ‘अपनों’ के तीखे सवालों पर ट्रेजरी बेंच में केवल प्रकाश पंत ही सरकार की लाज बचाते दिखे जबकि बिना अध्ययन के पहुंचे अधिकांश मंत्रियों की खूब किरकिरी हुई।
सत्र में सरकार ने 2452.41 करोड़ का अनुपूरक बजट करवाने के साथ कई विधेयक पास करवाए। सदन में प्रचंड बहुमत के चलते सरकार के लिए यह कतई मुश्किल भी नहीं था। इसके अलावा सदन में सरकार और विपक्ष एक हिचकोले खाती किश्ती पर सवार दिखे, जबकि भाजपा विधायकों ने इस किश्ती जमकर सवारी की। प्रश्नकाल से लेकर नियमों के तहत हुई चर्चाओं में कांग्रेस से कहीं अधिक भाजपा विधायकों ने ट्रेजरी बेंच की मुश्किलें बढ़ार्इं। विपक्ष का आलम यह रहा कि बेशकीमती एक दिन उन्होंने सदन के बाहर एक विधायक से सुरक्षा कर्मियों की हुई कहासुनी पर नाराजगी दिखाने में ही निकाल दिया।
प्रदेश में दो ही मुद्दे लोकायुक्त और गैरसैंण
कांग्रेस एक बार फिर लोकायुक्त और गैरसैंण पर ही फोकस दिखी। सत्ता पक्ष को इन मुद्दों पर हर बार विपक्ष घेरने की कोशिश करता है, जबकि उसे इसके परिणाम का पहले से अंदाजा है। सरकार ने हर बार की तरह इस बार भी दोनों मुद्दों पर वही जवाब दिया और विपक्ष ने उसी अंदाज में वॉकआउट किया। अंतर केवल इतना रहा कि इस बार नेता प्रतिपत्र इंदिरा हृदयेश ने लोकायुक्त के साथ स्टिंग प्रकरण को जोड़ने की कोशिश की।
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न सेहत की बात न कानून-व्यवस्था की फिक्र
पहाड़ में गर्ववती महिलाओं की प्रसव के दौरान स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने और सड़क पर होने वाले प्रसव विपक्ष के लिए कोई मुद्दा ही नहीं बन सके। स्वास्थ्य के क्षेत्र में कमजोर स्थिति पर कोई मुद्दा नहीं आया। सिर्फ केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने गैरसैंण पर चर्चा के दौरान इसका जिक्र किया। राजधानी में लूट की घटनाओं के बावजूद कानून व्यवस्था मुद्दा नहीं बना।
अध्यक्ष की नसीहत भी बेअसर
प्रश्न प्रहर में सवालों के जवाब देने में कई मंत्रियों की सत्र के दौरान किरकिरी हुई। स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल की मंत्रियों को होमवर्क कर की नसीहत भी काम नहीं आई। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय, पशुपालन राज्यमंत्री रेखा आर्य, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को भाजपा विधायकों ने ही कई सवालों पर निरुत्तर कर दिया।
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सत्र में सरकार ने 2452.41 करोड़ का अनुपूरक बजट करवाने के साथ कई विधेयक पास करवाए। सदन में प्रचंड बहुमत के चलते सरकार के लिए यह कतई मुश्किल भी नहीं था। इसके अलावा सदन में सरकार और विपक्ष एक हिचकोले खाती किश्ती पर सवार दिखे, जबकि भाजपा विधायकों ने इस किश्ती जमकर सवारी की। प्रश्नकाल से लेकर नियमों के तहत हुई चर्चाओं में कांग्रेस से कहीं अधिक भाजपा विधायकों ने ट्रेजरी बेंच की मुश्किलें बढ़ार्इं। विपक्ष का आलम यह रहा कि बेशकीमती एक दिन उन्होंने सदन के बाहर एक विधायक से सुरक्षा कर्मियों की हुई कहासुनी पर नाराजगी दिखाने में ही निकाल दिया।
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प्रदेश में दो ही मुद्दे लोकायुक्त और गैरसैंण
कांग्रेस एक बार फिर लोकायुक्त और गैरसैंण पर ही फोकस दिखी। सत्ता पक्ष को इन मुद्दों पर हर बार विपक्ष घेरने की कोशिश करता है, जबकि उसे इसके परिणाम का पहले से अंदाजा है। सरकार ने हर बार की तरह इस बार भी दोनों मुद्दों पर वही जवाब दिया और विपक्ष ने उसी अंदाज में वॉकआउट किया। अंतर केवल इतना रहा कि इस बार नेता प्रतिपत्र इंदिरा हृदयेश ने लोकायुक्त के साथ स्टिंग प्रकरण को जोड़ने की कोशिश की।
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न सेहत की बात न कानून-व्यवस्था की फिक्र
पहाड़ में गर्ववती महिलाओं की प्रसव के दौरान स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने और सड़क पर होने वाले प्रसव विपक्ष के लिए कोई मुद्दा ही नहीं बन सके। स्वास्थ्य के क्षेत्र में कमजोर स्थिति पर कोई मुद्दा नहीं आया। सिर्फ केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने गैरसैंण पर चर्चा के दौरान इसका जिक्र किया। राजधानी में लूट की घटनाओं के बावजूद कानून व्यवस्था मुद्दा नहीं बना।
अध्यक्ष की नसीहत भी बेअसर
प्रश्न प्रहर में सवालों के जवाब देने में कई मंत्रियों की सत्र के दौरान किरकिरी हुई। स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल की मंत्रियों को होमवर्क कर की नसीहत भी काम नहीं आई। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय, पशुपालन राज्यमंत्री रेखा आर्य, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को भाजपा विधायकों ने ही कई सवालों पर निरुत्तर कर दिया।