Uttarakhand: पर्वतीय जिलों में स्थायी शिक्षकों के 10 हजार से अधिक पद खाली, शिक्षक नहीं चढ़ रहे पहाड़
पारदर्शी तबादलों के लिए तबादला एक्ट बना फिर भी शिक्षक पहाड़ नहीं चढ़े। राज्य लोक सेवा और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से भर्ती में देरी भी इसकी वजह है।
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प्रदेश के पर्वतीय जिलों में स्थायी शिक्षकों के 10,946 पद खाली हैं। इसमें 6,632 पद माध्यमिक और 4,314 बेसिक शिक्षा के हैं। पारदर्शी तबादलों के लिए तबादला एक्ट बनने के बाद भी शिक्षकों के पहाड़ न चढ़ने और राज्य लोक सेवा एवं अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से भर्ती में देरी इसकी वजह बताई जा रही है।
विधानसभा में प्रश्नकाल में विधायक संजय डोभाल के प्रदेश के पर्वतीय जिलों में शिक्षकों की कमी के सवाल पर शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया, पर्वतीय जिलों में प्रवक्ताओं के 4,253 और सहायक अध्यापक एलटी के 2,379 पद खाली हैं। इन खाली पदों के विपरीत प्रवक्ता पद पर 2,594 और सहायक अध्यापक एलटी के पद पर 1,123 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं।
45 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं
बेसिक शिक्षा में 516 प्राथमिक विद्यालयों और 45 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं। प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 3,253 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 500 पद खाली हैं। शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने कहा, जिलों में शिक्षकों की समय-समय पर सेवानिवृत्ति, पदोन्नति, तबादले आदि से शिक्षकों के खाली पदों की संख्या बदलती रहती है।
कहा, सभी खाली पदों पर शिक्षकों की उपलब्धता की आदर्श स्थिति कभी संभव नहीं है। खाली पदों को स्थानांतरण, समायोजन, पदोन्नति और सीधी भर्ती आदि के माध्यम से भरे जाने का यथासंभव लगातार प्रयास किया जाता रहा, ताकि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो।
सीआरपी, बीआरपी भर्ती में एससी को मिलेगा 19 प्रतिशत आरक्षण
विधानसभा में विधायक ममता राकेश की ओर से पूछे गए तारांकित प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने कहा, सीआरपी, बीआरपी के पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से तैनाती की जाएगी। अनुसूचित जाति के लिए 19, अनुसूचित जनजाति के लिए चार और अन्य पिछड़ा वर्ग में 14 प्रतिशत के आरक्षण की व्यवस्था है। मंत्री ने यह भी बताया कि इन पदों को भरने के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी का चयन कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के शासनादेश के अनुसार किया जाएगा।
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डायटों के लिए अलग से होगी शिक्षकों की भर्ती
प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की एक वजह राज्य के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में विद्यालयों से शिक्षकों को तैनात किया जाना है। शिक्षा मंत्री ने अमर उजाला से बातचीत में बताया, प्रदेश में जो डायट हैं, उनका अलग कैडर व नियमावली नहीं है। सरकार इसके लिए अलग कैडर व नियमावली बनाने जा रही है। वर्तमान में विद्यालयों से डायटों में शिक्षकों की तैनाती की जा रही, जिससे स्कूल खाली हो रहे हैं। इनके लिए कैडर व नियमावली बनने से इनमें अलग से नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी, जबकि इनमें तैनात शिक्षक मूल तैनाती पर जाएंगे।