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उत्तराखंड विधान सभा सत्रः पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत, आवास एवं अन्य सुविधाओं का बिल पास

Tue, 10 Dec 2019 10:20 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 10 Dec 2019 10:20 AM IST
सार

  • बगैर चर्चा के पांच अन्य विधेयक भी ध्वनिमत से पारित

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Uttarakhand assembly session 2019 Bill of relief, housing and other facilities passed to former cm
विजय बहुगुणा पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच प्रदेश सरकार ने बगैर चर्चा के सोमवार को उत्तराखंड भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुविधा (आवासीय एवं सुविधाएं) विधेयक, 2019 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। ये विधेयक लाकर सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ी राहत दी है। उन पर सरकारी दरों से 25 प्रतिशत अधिक आवास किराया दरें लागू होंगी।

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उन्हें 31 मार्च 2019 से पहले तक का बिजली और पानी के बिलों का भुगतान अपनी जेब से देना होगा। पूर्व मुख्यमंत्रियों में जनरल बीसी खंडूड़ी ने अपने बकाया बिलों का भुगतान कर दिया है। बाकी पूर्व मुख्यमंत्रियों पर लाखों रुपये बकाया है।
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सोमवार को सदन में सरकार ने पांच अन्य विधेयकों को भी पारित कराया इनमें उत्तराखंड पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2019 है, जिसमें सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला के चुनाव लड़ने पर शैक्षिक अर्हता का प्रावधान किया है। इसके अलावा एक साथ दो पद धारण पर रोक में कई धाराएं जोड़ी गई हैं। सदन में कारखाना (उत्तराखंड संशोधन) विधेयक भी पारित हो गया। इसके जरिये सरकार छोटे उद्योगों को राहत देगी।
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इसमें कारखाना अधिनयम 1948 की विभिन्न धाराओं में संशोधन किए गए हैं। शोर शराबे के मध्य सरकार ने ध्वनिमत से संविदा श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) (उत्तराखंड संशोधन) विधेयक, 2019 पारित किया। इस विधेयक में पचास से कम श्रमिक वाले संस्थानों या ठेकेदारों को पंजीयन एवं लाइसेंस की बाध्यता से बाहर करने का प्रावधान किया गया है।

पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा

उत्तराखंड कृषि उत्पाद मंडी (विकास एवं विनियमन) ( संशोधन) विधेयक पारित कर सरकार ने जैविक उत्पादों के विपणन, क्रय विक्रय एवं प्रसंस्करण के लिए निधि के गठन का रास्ता साफ कर दिया है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा।

चाय बागान, प्रसंस्करण व वैकल्पिक ऊर्जा सेक्टर में 30 साल की लीज पर दी जा सकेगी भूमि, विधेयक पास

प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में चाय बागान, प्रसंस्करण और वैकल्पिक ऊर्जा सेक्टर के लिए भी भूमि 30 साल की लीज पर दी जा सकेगी। साथ ही भूमि खरीद फरोख्त की सीलिंग की सीमा को भी हटाकर उसे 30 एकड़ कर दिया गया है। ये प्रावधान उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (संशोधन) विधेयक में किए गए हैं।

प्रदेश सरकार ने इस विधेयक को सोमवार को पारित करा दिया। विधेयक में ये प्रावधान औद्योगिक निवेशन और विकास कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा विधेयक में दिव्यांग स्त्रियों को विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के तहत कृषि भूमि के आवंटन में पांच प्रतिशत के आरक्षण की व्यवस्था की गई है।

पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास भत्ते मामले में हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों का आवास भत्ता व अन्य सुविधाओं पर हुए खर्चे को माफ करने के संबंधी अध्यादेश के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने याची को छूट दी है कि यदि सरकार इस बीच इससे संबंधित कोई एक्ट लाती है तो याचिकाकर्ता उसे न्यायालय में चुनौती देने को स्वतंत्र है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

देहरादून की रूरल लिटिगेशन संस्था ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार की ओर से पूर्व मुख्यमंत्रियों के अवशेष किराए को माफ करने के अध्यादेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, नारायण दत्त तिवारी, विजय बहुगुणा और रमेश पोखरियाल ‘निशंक’  को घर खाली कर ब्याज समेत बाजार मूल्य से किराया जमा करने को कहा था।

मामले में चली सुनवाई के बाद न्यायालय आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की मृत्यु हो जाने और भगत सिंह कोश्यारी के महाराष्ट्र का राज्यपाल बन जाने के चलते उन्हें नोटिस की श्रेणी से बाहर रखा गया है। पक्षों को सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निर्णय सुरक्षित रख लिया।

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