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फ्रंटफुट नहीं, बैकफुट पर खेले भाजपा के खिलाड़ी
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 20 Feb 2014 01:00 AM IST
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सत्र के शुरूआती दौर से बरकरार विपक्ष की आक्रामकता व एकजुटता सत्रावसान होने से पहले धड़ाम हो गई। पॉली हाउस की सब्सिडी के मुद्दे पर सरकार नेता प्रतिपक्ष और बामुश्किल आधा दर्जन वरिष्ठ विधायक अकेले पड़ गए।
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दल के चिंतक अब इस बात की वजह ढूंढने में लगे हैं कि आखिर भाजपा ज्यादातर विधायको ने इस मुद्दे से दूरी क्यों बनाई?
दिन भर नहीं चला सदन
मुद्दा मौजूं था इसीलिए दिन भर पॉली हाउस की सब्सिडी प्रकरण ने सदन नहीं चलने दिया। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, मदन कौशिक, बंशीधर भगत, हरबंश कपूर, बिशन सिंह चुफाल, तीरथ सिंह रावत इस मुद्दे पर जितने आक्रामक रहे शेष में ज्यादातर सदस्य उतने की निष्क्रय बने रहे।
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अग्रिम पंक्ति में जब नेता प्रतिपक्ष समेत आधा दर्जन सदस्य हंगामा कर रहे थे तब पिछली पंक्ति में बैठे सदस्य मुंह पर हाथ रख चिंतन में डूबे थे।
विपक्ष रहा बिखरा
हंगामा खूब हुआ लेकिन विपक्ष के भीतर खिंची लकीर स्पष्ट दिखी। नेता प्रतिपक्ष को स्वयं ही वेल में जाकर सीबीआई जांच की मांग करनी पड़ी। इस मुद्दे पर बैकफुट पर रहे भाजपा के दो तिहाई सदस्यों के चलते नेता प्रतिपक्ष को अपने दल का पूरा बैक-अप नहीं मिल सका।
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वैसे भी यदि पूरी योजना की जांच हुई तो भाजपा राज में उद्यान मंत्री रहे नेताओं का भी दायरे में आना तय है। विधानसभाध्यक्ष भी पुरानी कांग्रेस सरकार में उद्यान मंत्री रहे है। इसलिए ना समूचे विपक्ष ने बहुत जोर लगाया और ना ही स्पीकर ने हामी भरी।
एक बार तो हो गई थी जांच की तैयारी
सदन स्थगित हुआ तो संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा ह्दयेश ने पॉली हाउस की सब्सिडी के मुद्दे पर विपक्ष को बातचीत के लिए बुलाया। सूत्रों की माने तो सत्तापक्ष तो पीठ से किसी विस्तृत जांच का आदेश कराने के लिए तैयार हो गया लेकिन यह माना जा रहा था कि कहीं इसे सरकार के प्रति स्पीकर की ज्यादा सख्ती के रूप में ना देखा जाए।
सब्सिडी लेने वालों में दो और कैबिनेट मंत्रियों के नाम भी सामने आ रहे थे। यदि जांच हो जाती तो हरीश रावत को एक और परेशानी का सामना करना पड़ सकता था। और फिर जांच आदेश होते ही सतपाल महाराज व अमृता रावत की नाराजगी सरकार को झेलनी पड़ती।