उत्तराखंड: आज विस के मानसून सत्र का चौथा दिन, इन मामलों पर रहेगी विपक्ष की निगाह
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कांग्रेस के सामने मुद्दे बेहिसाब हैं, लेकिन सरकार की घेराबंदी की सटीक रणनीति कहीं खोई सी है। छोटे सत्र में सरकार की प्रभावी घेराबंदी का कांग्रेस ने दावा किया था, लेकिन तीन दिन के अनुभव कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं।
इन तीन दिनों में ज्वलंत मुद्दों पर कांग्रेस रस्म अदायगी करते हुए दिखाई दी है। कहने को उसने तमाम मुद्दों को छुआ जरूर है, लेकिन सरकार पर उसका जो असर होना चाहिए था, वह सिरे से गायब दिख रहा है। इन स्थितियों के बीच, आज एक बार फिर विपक्ष पर निगाह रहेगी।
कांग्रेस इस पूरे सत्र में अभी तक अपने सहारे आगे बढ़ती नहीं दिखाई दी है। उसने महंगाई, अतिक्रमण, कानून व्यवस्था, गन्ना किसानों का भुगतान, मलिन बस्तियों का मालिकाना हक जैसे मुद्दे उठाए तो हैं, लेकिन मामला जमा नहीं है।
सरकार को अन्य मामलों में भी वह प्रभावी ढंग से घेर नहीं पाई कांग्रेस
कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे को उठाने में कांग्रेस की देरी किसी की भी समझ से बाहर हो सकती है। इसी तरह, सरकार को अन्य मामलों में भी वह प्रभावी ढंग से घेर नहीं पाई है। यह अलग बात है कि कई मौकों पर अपने कमजोर होमवर्क के कारण सरकार के मंत्री फंसते हुए नजर आए।
दरअसल, कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि वह दबाव बनाने के लिए सदन की कार्यवाही को बाधित करने के पक्ष में नहीं है। इसीलिए वैल पर आने, हंगामा करने, वॉकआउट करने जैसे विकल्पों का न्यूनतम प्रयोग किया गया है।
इन स्थितियों के बीच, सवाल इस बात का भी है कि सदन की कार्यवाही बाधित किए बिना अपने तर्कों और सटीक रणनीति से कांग्रेस क्यों नहीं सरकार को कई मामलों में प्रभावी ढंग से घेर पाई है। हालांकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ऐसा कतई नहीं मानते कि विपक्ष सत्र में कहीं कमजोर पड़ रहा है। उनका कहना है कि कांग्रेस ने कम समय में ज्यादा विषय उठाए हैं।
लोकायुक्त पर माहौल गरमाएगी कांग्रेस
भ्रष्टाचार और जीरो टॉलरेंस का जिक्र करते हुए लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी के सवाल को कांग्रेस सदन में उठाएगी। 2017 में भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में सौ दिन के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति करने का वादा कांग्रेस याद दिलाने की कोशिश करेगी। इस क्रम में एनएच-74 मुआवजा घोटाले पर चर्चा होनी तय माना जा रहा है।
त्रिवेंद्र सरकार कई मर्तबा लोकायुक्त पर अपना स्टैंड जाहिर कर चुकी है। फिलहाल लोकायुक्त को तैनात करने पर सरकार का कोई इरादा नहीं दिखता। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनके मंत्री कई बार कह चुके हैं कि वह ऐसी व्यवस्था बनाएंगे कि लोकायुक्त की जरूरत नहीं पडे़गी। हाल ही में एनएच-74 मुआवजा घोटाले में दो आईएएस अफसरों के निलंबन के फैसले के बाद सरकार जीरो टालरेंस के दावे को लेकर और उत्साहित है। कांग्रेस की कोशिश इस उत्साह की हवा निकालने है। नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश का कहना है कि डेढ़ साल में त्रिवेंद्र सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति हवा हवाई साबित हुई है। एनएच-74 घोटाले में एनएचएआई के अफसरों पर कोई कार्रवाई न किया जाना इस दावे की पोल खोलता है। नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, सोमवार को नियम 310 के तहत लोकायुक्त को नियुक्त करने का मसला उठाया जाएगा।
सरकार भी भ्रष्टाचार पर चर्चा को तैयार
भ्रष्टाचार, जीरो टॉलरेंस और लोकायुक्त के मसले पर विपक्ष के हमलों का सामना करने के लिए ट्रेजरी बेंच भी पूरी तरह से तैयार है। भाजपा पहले से मानकर चल रही है कि मानसून सत्र में भ्रष्टाचार और जीरो टॉलरेंस के मसले को विपक्ष जरूर उठाएगा। इसलिए तर्कों और तथ्यों से लैस होकर जवाब देने की उसकी भी तैयारी है। कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के अनुसार, सरकार भ्रष्टाचार, लोकायुक्त ही नहीं, बल्कि हर एक विषय पर विपक्ष के आरोप का जवाब देने के लिए तैयार है।