विधानसभा का चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं हरक सिंह रावत
उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता हरक सिंह रावत 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने पार्टी से अनुरोध किया है कि उनको संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
वह चुनाव लड़ने के बजाए दूसरों को लड़वाना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी का निर्णय अंतिम होगा। उनके आग्रह पर पार्टी जो फैसला करेगी, वह स्वीकार करेंगे। जबकि हरक सिंह रावत ने इससे पहले कई विधानसभा सीटों पर संभावनाएं तलाशते नजर आए थे।
हरक सिंह रावत ने कहा कि वह तो 2012 का चुनाव भी नहीं लड़ना चाहते थे, लेकिन उस समय वह नेता प्रतिपक्ष थे और पार्टी ने कहा कि चुनाव लड़ो तो लड़ना पड़ा। हरक ने कहा कि विधायक बनने के बाद वह मंत्री भी नहीं बनना चाहते थे।
2012 में कांग्रेस की सरकार बनने के तीन माह बाद जब कार्यकर्ताओं का दबाव बढ़ा तो वह इसके लिए तैयार हुए और अकेले ही मंत्री पद की शपथ ली। हरक सिंह ने कहा कि अब तक वे दस चुनाव लड़ चुके हैं। विधायक के लिए सात बार चुनाव लड़ा, जिसमें वे पांच बार विजयी रहे। दो बार एमपी के लिए भी चुनाव लड़ा।
2014 के लोकसभा चुनाव में पौड़ी गढ़वाल से बीसी खंडूड़ी के मुकाबले कांग्रेस को कोई प्रत्याशी नजर आया तो उन्हें चुनाव लड़ना पड़ा। पूरे देश में कांग्रेस के विरोध में हवा थी, लिहाजा चुनाव हारना पड़ा। इसके अलावा वह एमएलसी का भी एक चुनाव लड़े हैं, जिसमें हार का सामना करना पड़ा था। हरक ने बताया कि अब वह खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं, दूसरों को लड़वाना चाहते हैं।
नरकंकालों पर राजनीति कर रहे सीएम : हरक
पूर्व मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने कहा कि केदारघाटी में मिल रहे श्रद्धालुओं के नरकंकालों पर राजनीति कर सीएम हरीश रावत अपनी डूबती नाव को बचाने का व्यर्थ प्रयास कर रहे हैं। आपदा पीड़ितों की मदद करने की बजाय सीएम जनता की गाढ़ी कमाई नाच गाने पर लुटा रहे हैं।
भाजपा मंडल कार्य समिति की बैठक में शामिल होने आए पूर्व मंत्री रावत ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नरकंकालों पर राजनीति कर रहे हैं। तीन साल से केदारनाथ में सीएम ने कोई खोजबीन अभियान नहीं चलाया।
विधानसभा चुनाव नजदीक आता देख मुख्यमंत्री रावत नरकंकालों के सहारे अपनी डूबती नाव को बचाने में लग गए। उन्होंने कहा कि जनता सब जानती है, आपदा पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री ने क्या किया। बेरोजगार युवाओं को गुमराह करने के लिए सीएम इन दिनों अब साठ हजार पदों पर नियुक्ति का राग अलाप रहे हैं।
कहा, पार्टी हाईकमान चाहेगी तो मैं चुनाव लडूंगा। कोटद्वार, यमकेश्वर सीट से चुनाव लड़ने की व्यक्तिगत इच्छा पार्टी के लिए कुर्बान करने की बात कही। यदि पार्टी हाईकमान मेरा उपयोग सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए करना चाहती है तो मैं इसके लिए भी पूरी तरह से तैयार हूं।