{"_id":"61ee695fda0fcc5ba71e1bc9","slug":"uttarakhand-assembly-election-2022-kedarnath-seat-ground-report","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड विस सीट परिचय: केदारनाथ में सड़क, स्वास्थ्य और संचार के मुद्दे, पर्यटन व तीर्थाटन में नहीं हुआ काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड विस सीट परिचय: केदारनाथ में सड़क, स्वास्थ्य और संचार के मुद्दे, पर्यटन व तीर्थाटन में नहीं हुआ काम
Mon, 24 Jan 2022 02:33 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग
संवाद न्यूज एजेंसी, रुद्रप्रयाग
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 24 Jan 2022 02:33 PM IST
सार
उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद अस्तित्व में आई केदारनाथ विधानसभा में भाजपा और कांग्रेस को बारी-बारी से प्रतिनिधित्व का मौका मिला है। 2002 व 2007 में भाजपा और 2012 व 2017 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की।
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भगवान आशुतोष के द्वादश ज्योतिर्लिंग श्रीकेदारनाथ धाम सहित द्वितीय केदार मद्महेश्वर व तृतीय केदार तुंगनाथ के साथ ही शक्तिपीठ मां काली की पावन भूमि कालीमठ का गौरव लिए केदारनाथ विस में दूरस्थ गांवों के लिए अधर में लटके मोटर मार्गों की सैंद्धांतिक व वित्तीय स्वीकृति भी मिली है। लेकिन स्वास्थ्य, शिक्षा के लिए कई गांवों के ग्रामीण व नौनिहाल आज भी मीलों नापने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद अस्तित्व में आई केदारनाथ विधानसभा में भाजपा और कांग्रेस को बारी-बारी से प्रतिनिधित्व का मौका मिला है। 2002 व 2007 में भाजपा और 2012 व 2017 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। अविभाजित यूपी यह क्षेत्र बदरी-केदार विस का हिस्सा था। विस के सबसे दूरस्थ गौंडार, तोषी, चौमासी, चिलौंड, ब्यूंखी सहित कई गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित थे। राज्य बनने के बाद 2002 में अस्तित्व में आई केदारनाथ विस के दो दशक के सफर में इन गांवों को सुविधाओं के लिए अब भी टकटकी आंखों से इंतजार करना पड़ रहा है। भले ही गौंडार व तोषी गांव के लिए मोटर मार्ग निर्माण शुरू हो चुका है।
विज्ञापन
साथ ही गड्गू व चिलौंड के लिए सड़क स्वीकृत हो चुकी है। लेकिन केदारनाथ आपदा के आठ वर्ष बाद भी मुख्य पड़ाव गौरीकुंड हाशिए पर है। यहां न तो गर्मकुंड का पुरोद्धार हो पाया और न यहां सुविधाएं जुट सकी हैं। वहीं, आपदा प्रभावित गांव आज भी विस्थापन की राह देख रहे हैं। केदारघाटी में आज भी खून जांच तक की लैब नहीं खुल पाई है। यहां के सरकारी अस्पताल रेफर सेंटर बने हुए हैं। 2021 में त्रियुगीनारायण सहित क्षेत्र के कई गांवों में स्वास्थ्य सहित अन्य सुविधाओं के लिए ग्रामीणों ने आमरण अनशन भी किया था।
विज्ञापन
अब तक चुने गए विधायक
2002 व 2007 में भाजपा से आशा नौटियाल।
2012 में कांग्रेस से शैलारानी रावत और 2017 में मनोज रावत।
वादे पूरे/अधूरे
पांच वर्षों में पर्यटन, तीर्थाटन के क्षेत्र में कोई काम नहीं किया गया है। केदारनाथ के अलावा अन्य किसी भी मठ-मंदिर व पर्यटक स्थलों की सुध नहीं ली गई है। केदारघाटी की पूरी जनता शुरू से लेकर आज तक केदारनाथ पर ही निर्भर है। शीतकालीन पर्यटन/तीर्थाटन व एडवेंचर पर कार्य होना चाहिए, जिससे लोगों को बारामासी रोजगार के अवसर पैदा हो सके।
- नितिन जमलोकी, निवासी रविग्राम-फाटा
राज्य बनने के बाद से हमारे गांव सहित अन्य कई गांव सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। ग्रामीण मीलों पैदल नापने को मजबूर हैं। बीते चार विस चुनाव के बाद किसी भी जनप्रतिनिधि ने दूरस्थ गांवों की सुध नहीं ली। बुखार की दवा के लिए छह-सात किमी पैदल नापना नसीब बना हुआ है।
- जगत सिंह रावत, ग्राम प्रधान तोषी
जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद आमजन में मूलभूत सुविधाओं को लेकर जो उम्मीद जगी थी, वह पूरी नहीं हो पाई हैं। केदारनाथ विस के गांव के लोग निराश व हताश महसूस कर रहे हैं।
- दिवाकर गैरोला, निवासी त्रियुगीनारायण
आपदा के बाद से कई गांवों में लोग खतरे की जद में रहकर जीवन यापन को मजबूर हैं। लेकिन इस दिशा में सरकार हो चाहे विधायक, किसी ने भी ठोस प्रयास नहीं किए। दूसरी तरफ बैंक सेवा के लिए कई गांवों के लोगों को मीलों अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। रोजगार की दृष्टि से भी केदारनाथ विस के कस्बों/बाजारों के लिए कोई योजना नहीं न सकी। यहां आजिविका का मुख्य साधन सिर्फ छह माह की यात्रा है।
- ओम प्रकाश भट्ट, निवासी कोटमा-कालीमठ
प्रमुख मुद्दे
आपदा प्रभावित गांवों की सुरक्षा व विस्थापन के लिए ठोस पहल नहीं हो पा रही है।
केदारनाथ के अलावा अन्य तीर्थ स्थलों के प्रचार-प्रचार व तीर्थाटन से जोड़ने के प्रचार नहीं हो पाए हैं।
उच्च शिक्षा दम तोड़ रही है। यहां विद्यापीठ डिग्री कॉलेज में सुविधाओं का अभाव और सिर्फ बीए कक्षाओं का संचालन हो रहा है।
ऊखीमठ और गुप्तकाशी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों व संसाधनों का टोटा बना है।
केदारघाटी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर खून जांच तक की सुविधा नहीं है।
मतदाता
कुल मतदाता - 89473
महिला मतदाता - 45518
पुरूष मतदाता - 43955
विधायक बोले
पांच वर्ष का कार्याकाल अच्छा रहा, मेरे स्तर से जो बेहतर हो सकता था, उसे धरातल पर उतारने का प्रयास किया है। लेकिन प्रदेश सरकार से मुझे सहयोग नहीं मिला। बावजूद 18 करोड़ 75 लाख की विधायक निधि में से सिर्फ 12 लाख रुपये शेष हैं। पूरे प्रदेश में केदारनाथ विस में पहली बार स्कूलों में वर्चुअल क्लास शुरू कराईं गईं। सीएचसी अगस्त्यमुनि व पीएचसी ऊखीमठ में एक्स-रे मशीन स्थापित करने की कार्रवाई चल रही है। विस में स्यालसौड़ सहित 12 खेल मैदान बन रहे हैं। अगस्त्यमुनि खेल मैदान का सुधारीकरण व समतलीकरण किया है। 160 ग्राम पंचायतों में ग्राम पुस्तकालय की स्थापना की जा रही है। साथ ही लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए 18 स्थानों पर मांगल, खुदेड़ गीत प्रतियोगिताएं आयोजित की गई हैं। मिसिंग लिंक मार्गों पर भी कार्य चल रहा है।
- मनोज रावत, विधायक केदारनाथ विस
विपक्ष
पांच वर्ष में विधायक ने सिर्फ सरकार से सहयोग न मिलने की बात कही है। गांवों में भ्रमण के दौरान वास्तविक स्थिति पता चल रही है। विधायक निधि से अस्पताल, शिक्षा, संचार जैसी सुविधाएं दुरस्त की जा सकती थीं। लेकिन पूरे विस क्षेत्र में कहीं भी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर नहीं किया गया है।
- कुलदीप रावत, 2017 विस चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे