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Uttarakhand Election 2022: उत्तराखंड क्रांति दल ने पांच और प्रत्याशियों के नामों का किया एलान, अब तक 45 उम्मीदवारों की सूची जारी
Tue, 25 Jan 2022 04:21 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 25 Jan 2022 04:21 PM IST
सार
उत्तराखंड क्रांति दल पिछले विधानसभा चुनाव में भले ही बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाया है, लेकिन टिकटों को लेकर यहां मारामारी राष्ट्रीय पार्टियों से कम नहीं है।
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उक्रांद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तराखंड क्रांति दल ने पांच विधानसभा प्रत्याशियों की एक और सूची जारी कर दी। दल के केन्द्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने बताया कि कोटद्वार सीट पर हिन्दू एकता आंदोलन पार्टी और उक्रांद मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। उक्रांद ने हिन्दू एकता आंदोलन पार्टी के कैप्टन मुकेश रावत को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं गंगोलीहाट से हरिप्रसाद लोहिया, हल्द्वानी से रवि वाल्मीकि, रानीपुर (हरिद्वार) से प्रवीण कुमार सैनी और थराली से कस्वी लाल शाह को उम्मीदवार बनाया है।
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दल के केंद्रीय प्रवक्ता विजय बौड़ाई ने बताया कि दल अब तक 45 प्रत्याशियों की सूची जारी कर चुका है। बुधवार तक एक और सूची जारी हो सकती है। उक्रांद की विभिन्न दलों के साथ सीटों पर तालमेल के लिए बातचीत जारी है ताकि सभी बची सीटों पर मजबूत प्रत्यशियों को चुनाव में उतारा जा सके।
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उत्तराखंड में क्षेत्रीय दल नहीं दिखा पा रहे असर
राज्य गठन में अहम भूमिका निभाने वाले क्षेत्रीय दल पिछले कुछ चुनावों में कोई खास असर नहीं दिखा पाए हैं। यही वजह है कि प्रदेश की सियासत भाजपा और कांग्रेस के ईद-गिर्द ही सिमटी हुई है। प्रदेश में कई क्षेत्रीय दल और संगठन हैं, लेकिन क्षेत्रीय सरोकारों की राजनीति करने वाले यह क्षेत्रीय दल सियासी परवान नहीं चढ़ सके हैं। वह सत्ता की दहलीज तक नहीं पहुंच सके हैं।
आधे अधूरे प्रयासों के चलते यह दल वह चाहे उत्तराखंड क्रांति दल हो या उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, उत्तराखंड महिला मंच, उत्तराखंड जनवादी पार्टी, उत्तराखंड लोकतांत्रिक मोर्चा, राष्ट्रीय लोकनीति पार्टी, जनसेवा मंच, राज्य स्वराज पार्टी, राष्ट्रीय हिंदू आंदोलन पार्टी, राष्ट्रीय जनतांत्रिक पार्टी, जय महाभारत पार्टी रही हो भाजपा और कांग्रेस के सामने तीसरे विकल्प नहीं बन पाए हैं। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी इन दलों से जुड़े कुछ लोगों की ओर से चुनाव से ठीक पहले तीसरे विकल्प की कवायद के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसकी कवायद में जुड़े लोगों का खुद मानना है कि इसमें देरी हुई है।
उक्रांद का इस तरह गिरता चला गया ग्राफ
उत्तराखंड क्रांति दल के राज्य गठन के बाद 2002 में हुए चुनाव में चार विधायक चुनकर आए। इसके बाद से दल का सियासी ग्राफ गिरना शुरू हुआ। यही वजह रही कि 2017 के चुनाव में दल खाता भी नहीं खोल पाया।
चुनाव में सभी क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश में जनता को तीसरा विकल्प दिया जा सके। हालांकि इस कवायद में कुछ देरी हुई है।
- एसएस पांगती, पूर्व आईएएस
जनता भाजपा और कांग्रेस से निराश है, यही वजह है कि इस बाद उक्रांद का मत प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में बढ़ेगा।
- विजय बौडाई, केंद्रीय प्रवक्ता उक्रांद