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विधानसभा सत्र: प्राधिकरणों में कमियां दूर करेगी विधानसभा की कमेटी, स्पीकर ने दिए आदेश
Thu, 21 Feb 2019 08:26 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 21 Feb 2019 08:26 AM IST
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vidhansabha
- फोटो : file photo
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जिला विकास प्राधिकरणों के गठन के बाद पेश आ रहीं दिक्कतों को अब विधानसभा की कमेटी दूर करेगी। विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायकों ने बुधवार को सदन में जिला विकास प्राधिकरणों के गठन के बाद उभरी कमियों को प्रभावशाली ढंग से उठाया। विधायकों के दबाव और सरकार की पेशकश के बाद स्पीकर प्रेम चंद अग्रवाल ने कमेटी गठन के निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे पहले, सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपनी ही सरकार को प्राधिकरण गठन के बाद पेश आ रहीं समस्याओं को लेकर घेरा।
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आवास मंत्री मदन कौशिक ने कई समस्याओं पर ठोस कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने साफ किया कि जो जमीन वैध तरीके से आवंटित की गई है, उसमें नक्शे पास कराने में कोई दिक्कत नहीं होगी। जिला विकास प्राधिकरण का सवाल प्रश्नकाल में झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल ने उठाया। हालांकि उनका मूल प्रश्न जिला विकास प्राधिकरणों के ढांचे पर था, जिस पर अनुपूरक प्रश्न उठे, तो कमियों की लंबी फेहरिस्त तैयार हो गई। प्राधिकरण की कमियां गिनाने वाले विधायकों में ज्यादातर सत्ता पक्ष के थे।
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उन्होंने प्राधिकरणों में ग्रामीण क्षेत्र जोड़ने का विरोध भी किया। इसके अलावा, नई परिस्थितियों में नक्शा पास कराने में आने वालीं दिक्कतों का जिक्र भी किया। हालांकि आवास मंत्री मदन कौशिक ने कई तकनीकी चीजों को स्पष्ट किया। बाद में उन्होंने खुद ही इस मामले में कमेटी गठन की पेशकश की। इस पर स्पीकर ने विनिश्चय (निर्णय) दिया कि पूरे मामले का अध्ययन अब विधानसभा की कमेटी करेगी।
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विनियमित क्षेत्र से प्राधिकरण तक का सफर
उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश निर्माण कार्य विनियम अधिनियम 1958) अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश 2006 की धारा-3 के अंतर्गत 21 विनियमित क्षेत्र घोषित किए गए थे। इन विनियमित क्षेत्रों के सापेक्ष नवीन चकराता और चोपता को समाप्त कर दिया गया था। शेष विनियमित क्षेत्रों गैरसैंण, गौचर, चमोली-गोपेश्वर, औली, बद्रीनाथ, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, पौड़ी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, कौसानी-ल्वेशाल, चंपावत, हल्द्वानी-काठगोदाम, रामनगर, बाजपुर, किच्छा, काशीपुर और रुद्रपुर को स्थानीय विकास प्राधिकरण बना दिया गया था। बाद में स्थानीय विकास प्राधिकरणों को भी समाप्त कर 11 जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण बना दिए गए। दून जिला विकास प्राधिकरण के गठन की प्रक्रिया एमडीडीए और साडा के समायोजन न हो पाने की वजह से रुकी हुई है।