Almora: आंगन में बनी टंकी में डूबने से तीन साल की बच्ची की मौत, छह घंटे तक करती रही जिंदगी के लिए संघर्ष
टंकी में डूबने के बाद मासूम ने जीवन के लिए संघर्ष किया। वहां से निकलने के बाद भी वह अस्पताल में घंटों जूझती रही।
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अल्मोड़ा के निकटवर्ती गांव पहल में तीन साल की मासूम की आंगन में बनी पानी की टंकी में डूब गई। कुछ देर बाद परिजनों की नजर उस पर पड़ी तो वे उसे लेकर बेस अस्पताल पहुंचे लेकिन उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
हवालबाग विकासखंड के पहल गांव निवासी हरीश सिंह कनवाल की तीन वर्षीय पुत्री आरोही बुधवार सुबह अपने आंगन में खेल रही थी। इस बीच उसका संतुलन बिगड़ा और वह पास में बनी पानी की टंकी में डूब गई।
परिजनों को भी घटना का पता नहीं चला। काफी देर बाद जब वह नजर नहीं आई तो परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। जब वे पानी की टंकी के पास गए तो मासूम उसमें डूबी मिली। उन्होंने तुरंत उसे बेस अस्पताल पहुंचाया लेकिन उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
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छह घंटे तक करती रही जीवन और मौत से संघर्ष
टंकी में डूबने के बाद मासूम ने जीवन के लिए संघर्ष किया। वहां से निकलने के बाद भी वह अस्पताल में घंटों जूझती रही। मासूम आरोही सुबह उठी और उसकी चहलकदमी शुरू हुई। उसकी चहलकदमी और तुतलाहट से परिजन खुश थे लेकिन उन्हें यह मालूम नहीं था कि मासूम और उनका साथ कुछ पलों का है। टंकी में डूबने के कुछ देर बाद सुबह के करीब आठ बजे परिजन उसे उपचार के लिए बेस अस्पताल लेकर दौड़े। चिकित्सक भी तत्परता दिखाकर उसके उपचार में जुट गए। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया और दवा शुरू हुई। वेंटिलेटर में वह जीवन और मौत से संघर्ष करती रही लेकिन दोपहर दो बजे के करीब वह जिंदगी की जंग हार गई और चिकित्सकों के उसे बचाने के सभी प्रयास असफल रहे।
एक दिन पूर्व सुयाल नदी में डूबने से हुई भाई-बहन की मौत
जिले में डूबने से हुई मौत का मामला लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। बीते मंगलवार को सुयाल नदी में नहाने गए भाई बहन की डूबने से मौत हो गई। बख गांव की 17 वर्षीय भावना नेगी और उसका 16 वर्षीय भाई नहाने सुयाल नदी स्थित विश्वनाथ घाट पहुंचे लेकिन दोनों देर शाम तक घर नहीं लौटे तो उनकी खोजबीन शुरू हुई। पुलिस, एसडीआरएफ ने तलाशी अभियान चलाया तो दोनों के शव रात एक बजे नदी में उतराते नजर आए। दूसरे दिन भी मासूम की टंकी में डूबने से मौत हो गई।
पानी की टंकी में डूबने से मासूम की हालत गंभीर थी। परिजनों के यहां लाने के बाद उसका उपचार शुरू हुआ और उसे बचाने के हरसंभव प्रयास किए गए लेकिन उसकी मौत हो गई।
- डॉ. अशोक कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, बेस अस्पताल, अल्मोड़ा।