उत्तराखंड: एस्केप चैनल के बाद अब अतिक्रमण की समस्या को सुलझाने में उलझेगी सरकार
- एस्केप चैनल के आदेश को निरस्त कर सरकार ने एक गुत्थी सुलझाई, दूसरी में उलझने को तैयार
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उत्तराखंड सरकार ने एस्केप चैनल के आदेश को निरस्त कर ये विवाद तो शांत कर दिया, लेकिन अब उसके सामने अतिक्रमण के मसले को सुलझाने की चुनौती है। हरिद्वार की हर की पैड़ी का एस्केप चैनल का विवाद दो पाटों के बीच फंसने जैसा है। हर की पैड़ी से होकर बह रही गंगा को हरीश रावत की सरकार ने एस्केप चैनल घोषित किया था।
रावत का कहना था कि एनजीटी के आदेश के तहत मैदानी क्षेत्रों में गंगा और उसकी सहायक नदियों के 300 मीटर के दायरे में निर्माण ध्वस्त किया जाना था। हर की पैड़ी से होकर बह रही गंगा को एस्केप चैनल घोषित कर यह निर्माण बचा लिया गया। इसमें कई धार्मिक संस्थाएं भी हैं।
नई सरकार के बनने के बाद से ही गंगा सभा सहित संत समाज ने एस्केप चैनल के आदेश को निरस्त करने की मांग शुरू की थी। 2017 से लेकर 2019 तक यह मामला आश्वासनों और जांच-पड़ताल तक ही सिमटा रहा। 2019 में हरीश रावत हरिद्वार में संत समाज के बीच पहुंचे और उन्होंने एस्केप चैनल के आदेश को भूल करार दिया।
रावत ने उस समय फेस बुक पोस्ट में लिखा कि यह भूल व्यवहारिक समझ के आगे आस्था को किनारे रखने की थी। अब वर्तमान सरकार इस भूल को सुधारे। बुधवार को प्रदेश सरकार ने एस्केप चैनल के 14 दिसंबर 2016 के आदेश से एस्केप चैनल से संबंधित धारा को हटा दिया।
अब प्रदेश सरकार के सामने और बड़ी चुनौती उठ खड़ी हुई है। सरकार अगर यहां बह रही गंगा के 500 मीटर के दायरे में निर्माण हटाने का फैसला करती है तो वह एक वर्ग को नाराज कर सकती है। निर्माण नहीं हटाती है तो एनजीटी के आदेश को न मानने के आरोप का सामना सरकार को करना पड़ सकता है। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक के मुताबिक सरकार इस मामले की जांच कर रही है। समय आने पर इस पर भी फैसला लिया जाएगा।
2016 के आदेश में इस भाग को हटाया गया
एस्कैप चैनल - सर्वानंद घाट से शमशान घाट खड़खड़ी व हर की पैड़ी से होते हुए डामकोठी तक व डामकोठी के पश्चात सतीघाट कनखल होते हुए दक्ष मंदिर तक बहने वाले भाग को एस्केप चैनल माना जाता है। उक्त क्षेत्र में जल प्रवाह नियंत्रित होने के कारण बाढ़ से प्रभावित होने की संभावना नहीं है।
एनजीटी साफ कर चुकी है क्या है अतिक्रमण
2016 के आदेश के तहत यह भी साफ किया गया था कि नदी के तटीय क्षेत्र में किस सीमा तक निर्माण प्रतिबंधित होगा। एनजीटी के आदेश के तहत नदी तट से 200 मीटर तक का क्षेत्र प्रतिबंधित क्षेत्र माना गया और इसमें सिर्फ घाट का निर्माण, नदी तट विकास ही अनुमति दी गई। 200 मीटर से 300 मीटर तक का क्षेत्र रेग्यूलेटरी जोन माना गया और इस क्षेत्र में मठ, मंदिर आदि के सशर्त निर्माण को मंजूरी दी गई।
कब क्या हुआ
14 दिसंबर 2016 - एस्केप चैनल से संबंधित शासनादेश जारी किया गया। यह शासनादेश उस समय सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने आवास विभाग की ओर से जारी किया था।
2017- विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने इस शासनादेश को निरस्त करने का आश्वासन दिया था। उसी समय से शासनादेश को निरस्त करने की मांग हो रही थी।
14 जुलाई, 2020 - पूर्व सीएम हरीश रावत हरिद्वार में संतों के बीच पहुंचे और उन्होंने कहा कि उनसे भूल हो गई है, त्रिवेंद्र सरकार इस भूल को सुधारे।
16 जुलाई, 2020- प्रदेश सरकार ने कहा कि हरीश रावत की सरकार के दौरान जारी हुआ आदेश निरस्त होगा।
23 नवंबर, 2020- कुंभ की तैयारी बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एस्केप चैनल के आदेश को निरस्त करने की घोषणा की और कहा कि जल्द ही यह आदेश जारी होगा।
02 दिसंबर, 2020- शासन की ओर एस्केप चैनल को निरस्त करने का आदेश जारी।