उत्तराखंडः शहरों में भूमि मुआवजे के बदले मिलेगा सर्टिफिकेट, किसी बिल्डर को भी बेचने का मिलेगा अधिकार
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अब अगर शहरी क्षेत्रों में आपकी जमीन सड़क या पार्किंग के विस्तारीकरण की जद में आएगी तो आपको उसके अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिलेगा। इसके बजाय जितनी जमीन इसके दायरे में जाएगी, उसके बराबर फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) सर्टिफिकेट मिलेगा। इसके लिए सरकार जल्द ही ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट एक्ट (टीडीआर) यानी हस्तांतरणीय विकास अधिकार कानून लेकर आ रही है। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
महाराष्ट्र, गुजरात, पुडुचेरी, ओडिशा की तर्ज पर टीडीआर की तैयारी अंतिम चरण में चल रही है। इसका फायदा उन लोगों को होगा, जिनकी जमीन पार्क, पार्किंग या सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही है। सरकार इस जमीन को निशुल्क लेगी यानी इसका कोई मुआवजा नहीं देगी। इसके बदले में रिहायशी क्षेत्र के बराबर हस्तांतरणीय अतिरिक्त तल क्षेत्र (ट्रांसफरेबल एफएआर) प्राप्त कर सकते हैं। ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट (टीडीआर) का सर्टिफिकेट इसके लिए प्रदान किया जाएगा।
इस सर्टिफिकेट को प्राधिकरण में दिखाकर दूसरी जगह भूमि पर मकान या कॉमर्शियल भवन बनाने में एफएआर का उपयोग किया जा सकता है। खुद उपयोग नहीं करना चाहता है तो दूसरे व्यक्ति को एफएआर बेच कर जमीन की कीमत प्राप्त कर सकता है। एफएआर से मतलब यह होगा कि वह अपनी जमीन पर कितना निर्माण कर सकता था। अब इस एफएआर यानी निर्माण एरिया को ऐसी जगह बेच सकता है जहां बिल्डर या कोई अन्य अपने प्रोजेक्ट में अतिरिक्त निर्माण की अनुमति चाहते हैं।
इस नियम से ऐसी होगी व्यवस्था
इसके लिए टीडीआर अथॉरिटी का गठन होगा जो कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों को सेंडिंग और रिसीविंग जोन में बांटेगी। ग्रीन बेल्ट, सड़क और पार्किंग की जमीन को सेंडिंग जोन घोषित कर एफएआर या टीडीआर सर्टिफिकेट दिया जाएगा। फिर इसे बेचने के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी जमीन को रिसीविंग जोन बनाया जाएगा। यहां अथॅारिटी के जरिये एफएआर की खरीद-फरोख्त होगी। जितना भी निर्माण अधिकार मिला है, उसे कलेक्टर गाइडलाइन से ज्यादा कीमत पर बेचा जाएगा। प्रोजेक्ट जल्दी शुरू करने के लिए सरकार भी लोगों से खुद यह सर्टिफिकेट खरीद लेगी और फिर इसे बिल्डरों को नीलामी के जरिये बेचा जाएगा।
अभी तक ऐसे होता है भू अधिग्रहण
अभी तक किसी भी योजना के तहत सड़क चौड़ीकरण या पार्क या पार्किंग विस्तारीकरण के लिए भूमि-अधिग्रहण का कानून लागू होता है। इस कानून के तहत पहले उस क्षेत्र में सर्वेक्षण होता है। इसके बाद जिन प्रभावितों की जमीन उस दायरे में आ रही है, उनकी खसरा-खतौनी की जानकारी ली जाती है। इसके बाद उसका प्रकाशन किया जाता है। प्रकाशन पर आपत्तियों की सुनवाई होती है। इस सुनवाई के बाद इसका मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह लंबी प्रक्रिया है लेकिन टीडीआर बेहद कम समय में काम करेगा।
ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट एक्ट को उत्तराखंड में लागू करने की योजना के तहत इसका अध्ययन किया जा रहा है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में यह एक्ट लागू है। वहां की व्यवहारिकता को भी देखा जा रहा है। भविष्य में इस पर फैसला लिया जाएगा।
- शैलेश बगोली, सचिव, शहरी विकास एवं आवास
ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट एक्ट को उत्तराखंड में लागू करने की योजना के तहत इसका अध्ययन किया जा रहा है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में यह एक्ट लागू है। वहां की व्यवहारिकता को भी देखा जा रहा है। भविष्य में इस पर फैसला लिया जाएगा। - शैलेश बगोली, सचिव, शहरी विकास एवं आवास