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Uttarahand: केंद्र सरकार की विस्फोटकों का नियंत्रित उपयोग करने की हिदायत, पढ़िए पूरा मामला
Sun, 20 Feb 2022 01:25 PM IST
रेनू सकलानी
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Sun, 20 Feb 2022 01:25 PM IST
सार
सड़क बनाने और अन्य निर्माण कार्यों के लिए रॉक ब्रेकर और एक्सकेवेटर का उपयोग करने पर जोर है। ऐसे में केंद्रीय सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने हिमालयी राज्यों को एडवाइजरी भेजी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
उत्तराखंड, हिमाचल व दूसरे हिमालयी राज्यों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सड़कों और पुलों के निर्माण कार्य में चट्टानों को तोड़ने के लिए विस्फोटकों (डायनामाइट) का इस्तेमाल करने पर गंभीर चिंता सामने आई है। इसके तहत केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राज्यों के मुख्यसचिवों को हिदायत दी है।
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इन दिशा-निर्देशों में जितना संभव हो विस्फोटकों के इस्तेमाल से परहेज करने और चट्टानों को काटने व तोड़ने के लिए रॉक ब्रेकर और एक्सकेवेटर जैसे विकल्प अपनाने की सलाह दी है। इस संबंध में उत्तराखंड के मुख्य सचिव को भी मंत्रालय की ओर से पत्र भेजा गया है। मंत्रालय के अधिशासी अभियंता (एस एंड आर) संतोष प्रकाश की ओर से जारी पत्र में गृह मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति की सिफारिश का जिक्र किया गया है।
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हिमालयी क्षेत्र में पारिस्थितिकी को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके
समिति ने हिमालयी क्षेत्र में विकास परियोजनाओं के लिए विस्फोटकों के उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और विशेष रूप से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी का विवेकपूर्ण उपयोग करने की सिफारिश की है ताकि हिमालयी क्षेत्र में पारिस्थितिकी को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। पत्र में कहा गया है कि मंत्रालय में इस प्रकरण की जांच की गई।
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यह देखा गया है कि हिमालयी क्षेत्र सहित अन्य बातों के साथ-साथ पहाड़ी व पर्वतीय क्षेत्रों में विकास के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में सड़कों के निर्माण की आवश्यकता है। मंत्रालय ने विस्फोटकों के संबंध में उठाई गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह सुझाव दिया कि जहां तक संभव हो इन क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण के लिए रॉक ब्रेकर और एक्सकेवेटर का उपयोग हो सकता है।
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लेकिन अपरिहार्य परिस्थितियों में यदि जरूरी हो तो विस्फोटकों का इस्तेमाल नियंत्रित ढंग से हो। पहाड़ों को किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए नियंत्रित ब्लास्टिंग, विस्फोटकों की विशिष्ट शक्ति का उपयोग करना और डिले डेटोनेटर (जो एक व्यवहार्य तकनीक है) को अपनाया जा सकता है।
उत्तराखंड में विस्फोटकों का होता है इस्तेमाल
उत्तराखंड में राज्य सेक्टर और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़कों का निर्माण हो रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में चट्टानों को तोड़ने के लिए विस्फोटकों का इस्तेमाल सामान्य बात है। हालांकि लोनिवि मुख्यालय के स्तर पर सड़कों के निर्माण में विस्फोटकों के नियंत्रित इस्तेमाल के निर्देश हैं, लेकिन कार्यदायी संस्थाएं और ठेकेदार इसका शत-प्रतिशत पालन नहीं करते हैं।
हिमालय की पारिस्थितिकी काफी नाजुक है। उस क्षेत्र में सड़कों को बनाने में अनियंत्रित ढंग से विस्फोटकों का इस्तेमाल बहुत नुकसानदेय है। आसपास की चट्टानों में नए दरारें बन जाती हैं। बरसात के समय जब इनमें पानी भरता है तो इनमें धंसाव और भूस्खलन पैदा हो जाता है। नए लैंडस्लाइड जोन बन जाते हैं।
- इं. एचके उप्रेती, पूर्व ईएनसी, लोनिवि व एनएचएआई के रिव्यू एक्सपर्ट
निर्माण कार्यों में विस्फोटकों का प्रयोग करने पर ग्रीन ट्रिब्यूनल पहले ही सख्त नाराजगी जाहिर कर चुका है। विस्फोटकों के कारण बाहर जो नुकसान दिख रहा है वो तो कुछ भी नहीं, इससे बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौत हो जाती है। जमीन के अंदर दरारें बन जाती हैं, जिससे भूजल रिसने लगता है। डॉ.एसपी सतीए प्रोफेसर, वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी
विस्फोटकों से जो नुकसान हुआ है और होगा, उसकी कल्पना भी संभव नहीं। वह इससे वन, पर्यावरण, पारिस्थितिकीय तंत्र को बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है। यह भविष्य के बड़े पारिस्थितिकीय नुकसान का कारण बन सकता है। विभिन्न एजेंसियां कई बार इसपर नाराजगी जता चुकी हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। -प्रो. एमपीएस बिष्ट, निदेशक, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र
हिमालय की पारिस्थितिकी काफी नाजुक है। उस क्षेत्र में सड़कों को बनाने में अनियंत्रित ढंग से विस्फोटकों का इस्तेमाल बहुत नुकसानदेय है। आसपास की चट्टानों में नए दरारें बन जाती हैं। बरसात के समय जब इनमें पानी भरता है तो इनमें धंसाव और भूस्खलन पैदा हो जाता है। नए लैंडस्लाइड जोन बन जाते हैं।
- इं. एचके उप्रेती, पूर्व ईएनसी, लोनिवि व एनएचएआई के रिव्यू एक्सपर्ट
निर्माण कार्यों में विस्फोटकों का प्रयोग करने पर ग्रीन ट्रिब्यूनल पहले ही सख्त नाराजगी जाहिर कर चुका है। विस्फोटकों के कारण बाहर जो नुकसान दिख रहा है वो तो कुछ भी नहीं, इससे बड़ी संख्या में वन्यजीवों की मौत हो जाती है। जमीन के अंदर दरारें बन जाती हैं, जिससे भूजल रिसने लगता है। डॉ.एसपी सतीए प्रोफेसर, वानिकी महाविद्यालय, रानीचौरी
विस्फोटकों से जो नुकसान हुआ है और होगा, उसकी कल्पना भी संभव नहीं। वह इससे वन, पर्यावरण, पारिस्थितिकीय तंत्र को बड़ा नुकसान पहुंचा रहा है। यह भविष्य के बड़े पारिस्थितिकीय नुकसान का कारण बन सकता है। विभिन्न एजेंसियां कई बार इसपर नाराजगी जता चुकी हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। -प्रो. एमपीएस बिष्ट, निदेशक, अंतरिक्ष उपयोग केंद्र