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उर्स 2021: बरेली शरीफ से झंडा लेकर पिरान कलियर पहुंचा जत्था, बुलंद दरवाजे पर अदा की झंडा कुशाई की रस्म
Wed, 06 Oct 2021 08:54 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिरान कलियर (रुड़की)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिरान कलियर (रुड़की)
Published by: अलका त्यागी
Updated Wed, 06 Oct 2021 08:54 PM IST
सार
पिरान कलियर स्थित दरगाह साबिर पाक के सालाना उर्स में हर साल सैकड़ों लोग जत्थे के रूप में बरेली शरीफ से पैदल झंडा लेकर आते हैं, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते मात्र 18 लोगों का जत्था वाहनों से कलियर शरीफ पहुंचा।
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पिरान कलियर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साबिर पाक के 753वें सालाना उर्स में बुधवार को झंडा कुशाई की पहली रस्म अदा की गई। हर साल की तरह इस साल भी बरेली शरीफ से झंडा कलियर शरीफ पहुंचा। झंडा लेकर पहुंचे अकीदतमंदों का सज्जादानशीन परिवार की ओर से शाह यावर एजाज साबरी ने फूल मालाओं से स्वागत किया।
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पिरान कलियर स्थित दरगाह साबिर पाक के सालाना उर्स में हर साल सैकड़ों लोग जत्थे के रूप में बरेली शरीफ से पैदल झंडा लेकर आते हैं, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते मात्र 18 लोगों का जत्था वाहनों से कलियर शरीफ पहुंचा। जत्था चार अक्तूबर को सूफी वसीम साबरी की सरपरस्ती में बरेली से रवाना हुआ था। सूफी वसीम साबरी के साथ कमाल साबरी, हसन साबरी अजीज, अहमद साबरी, सादिक साबरी, नईम साबरी, अतीक साबरी, इमरान साबरी जत्थे में शामिल रहे। कलियर पहुंचने पर सज्जादानशीन की ओर से दरगाह मेन गेट पर शाह यावर एजाज साबरी ने झंडे के साथ आए अकीदतमंदों का फूल मालाओं के साथ स्वागत किया।
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शाम को सज्जादानशीन की सरपरस्ती में झंडे को दरगाह साबिर के बुलंद दरवाजे पर फहराकर झंडा कुशाई की पहली रस्म अदा की गई। शाह अली एजाज साबरी ने बताया कि साबिर पाक के सालाना उर्स में हर वर्ष झंडा कुसाई की रस्म को अंजाम दिया जाता है। इस बार कोरोना के चलते शारीरिक दूरी के साथ यह रस्म अदा की गई। चांद दिखाई देने के बाद मेहंदी डोरी की रस्म के साथ उर्स का विधिवत आगाज होगा। इस मौके पर पानीपत दरगाह के सज्जादानशीन हाफिज मैराज साबरी, शाह खालिक, शाह गाजी, शाह राजी, शाह असद साबरी, मुनव्वर अली, नोमी मियां, शफीक साबरी, आदिल हबीब, हैदर हबीब, शाह सुहेल, सूफी इसरार साबरी मौजूद रहे।
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नवनियुक्त सज्जादानशीन के नेतृत्व में होगी रस्म अदायगी
करीब पांच महीने पूर्व दरगाह के सज्जादानशीन शाह मंसूर एजाज साबरी के इंतकाल के बाद शाह अली एजाज साबरी को सज्जादानशीन नियुक्त किया गया था। नवनियुक्त सज्जादानशीन इस बार उर्स में तमाम रस्मों की अदायगी करेंगे। इसमें मेहंदी डोरी, कुल शरीफ, गुशल शरीफ आदि शामिल है।
जमाने से चली आ रही उर्स की रस्म
सज्जादानशीन परिवार के सदस्य शाह खालिक मियां ने बताया कि हजरत साबिर पाक के सालाना उर्स की रस्म मेहंदी डोरी की शुरुआत शाह अब्दुल रहीम साबरी कुद्दूसी के जमाने से हुई। आज भी यह रस्म दरगाह साबिर पाक के मौजूदा सज्जादानशीन अंजाम देते हैं। मेहंदी डोरी के तहत रबीउल अव्वल का चांद दिखाई देने पर ईशा की नमाज के बाद सज्जादानशीन जायरीनों, सूफी संतों एवं बस्ती के लोगों के साथ नंगे पांव अपने कदीमी (पुराने घर) रवाना होते हैं। यह आज के दौर में शाह नन्हे मियां साबरी कुद्दूसी मरहूम के घर के नाम से जाना जाता है। मेहंदी डोरी की रस्म से पहले फातिहा ख्वानी की जाती है।