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UPSC Toppers की सफलता की यह कहानी युवाओं में भर देगी आगे बढ़ने का जोश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 29 Apr 2018 07:12 AM IST
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vishakha dabral
- फोटो : amar ujala
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यूपीएससी सिविल परीक्षा 2017 के इन टॉपर्स की कहानी युवाओं में जोश भर देने वाली है।
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एक पुलिस अधिकारी पिता अब अपने ‘अफसर बिटिया’ को सैल्यूट करेंगे। यह मौका मिला है संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा से, जिसमें देहरादून निवासी बीपी डबराल की बेटी विशाखा डबराल ने देशभर में 134वीं रैंक हासिल की है। वह आईपीएस अधिकारी बनने जा रही हैं। उनके पिता बीपी डबराल पुलिस महकमे में सीओ ट्रैफिक (हरिद्वार) हैं। बेटी की इस उपलब्धि पर पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।
देहरादून के तुनवाला निवासी डबराल परिवार के लिए शुक्रवार की शाम खुशियां लेकर आई। इसके साथ ही मौका लाई उनके पिता के लिए बेटी को सैल्यूट करने का मौका। दरअसल, परिवार की बेटी विशाखा डबराल ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 134वीं रैंक हासिल की है। विशाखा इस रैंक पर आईपीएस अफसर बनेंगी। उनके पिता बिरेंद्र प्रसाद डबराल पहले ही पुलिस महकमे में बतौर सीओ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विशाखा का कहना है कि भले ही पुलिस महकमे में उनके पापा उन्हें सैल्यूट करें, लेकिन बेटी को आगे बढ़ाने के मामले में मैं उन्हें हमेशा सैल्यूट करूंगी।
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विशाखा की 12वीं तक की पढ़ाई गुरुनानक एकेडमी से हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से बीए किया। बीए में उन्होंने इतिहास और अर्थशास्त्र चुना। वर्ष 2015 में ग्रेजुएशन के बाद विशाखा ने सिविल की तैयारी शुरू की। सेल्फ स्टडी के दम पर वर्ष 2016 में सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। विशाखा ने हिम्मत नहीं हारी। माता रश्मि डबराल और पिता ने हमेशा अफसर बनने के लिए प्रेरित किया। 2017 में नए सिरे से तैयारी कर सिविल सेवा परीक्षा दी। इसका नतीजा 134वीं रैंक के तौर पर सामने आया। विशाखा ने बताया कि लगन और मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।
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लिस्ट में नाम नहीं आने से न हों निराश
विशाखा का कहना है कि जिन युवाओं का नाम सिविल सेवा परीक्षा की सूची में नहीं है, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। अपनी गलतियों को पहचानें और दोबारा तैयारी में जुट जाएं। निश्चित तौर पर सफलता मिलेगी। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा के लिए रोजाना समाचार पत्र पढ़ने और विषय को समझने की सलाह भी दी। विशाखा ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा पास करने के लिए जरूरी है कि आप डेडिकेशन के साथ तैयारी करें।
बोरागांव की संजना ने सिविल सेवा परीक्षा पास कर रचा इतिहास
upsc
नाचनी (पिथौरागढ़) में तल्लाजोहार के बोरागांव की मूल निवासी संजना आर्य ने देश में 704वीं रैंक के साथ सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली है। संजना ने पहले ही प्रयास में यह परीक्षा पास की है। गौर करने वाली बात यह है कि संजना ने परीक्षा की तैयारी भी अपने बूते की है, इसके लिए उन्होंने किसी तरह की कोचिंग भी नहीं ली।
24 नवंबर 1990 को रमेश राम और हरिप्रिया आर्य के घर में पैदा हुई इस होनहार बेटी ने 12वीं तक की शिक्षा दिल्ली कान्वेंट स्कूल से हासिल की। बीए लेडी श्रीराम कॉलेज दिल्ली और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से समाजशास्त्र विषय से एमए की शिक्षा ग्रहण की। अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में संजना ने बताया कि वह वर्ष 2014 से सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहीं थी। रोजाना 12 से 14 घंटे पढ़ाई करती थीं। बताया कि उन्होंने इसके लिए किसी तरह की कोचिंग नहीं ली।
पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास करने से संजना काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में उनका चयन प्रोफेसर के पद के लिए हो गया था, लेकिन भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने की चाह के कारण उन्होंने इस पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार को दिया। संजना के पिता रमेश राम दिल्ली शिक्षा विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। माता हरिप्रिया आर्य दिल्ली के संत निरंकारी कन्या महाविद्यालय में प्रवक्ता हैं।
24 नवंबर 1990 को रमेश राम और हरिप्रिया आर्य के घर में पैदा हुई इस होनहार बेटी ने 12वीं तक की शिक्षा दिल्ली कान्वेंट स्कूल से हासिल की। बीए लेडी श्रीराम कॉलेज दिल्ली और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से समाजशास्त्र विषय से एमए की शिक्षा ग्रहण की। अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में संजना ने बताया कि वह वर्ष 2014 से सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहीं थी। रोजाना 12 से 14 घंटे पढ़ाई करती थीं। बताया कि उन्होंने इसके लिए किसी तरह की कोचिंग नहीं ली।
पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास करने से संजना काफी खुश हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में उनका चयन प्रोफेसर के पद के लिए हो गया था, लेकिन भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने की चाह के कारण उन्होंने इस पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार को दिया। संजना के पिता रमेश राम दिल्ली शिक्षा विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। माता हरिप्रिया आर्य दिल्ली के संत निरंकारी कन्या महाविद्यालय में प्रवक्ता हैं।
लगातार दूसरे साल पाई सिविल सेवा परीक्षा में सफलता
manish joshi
देहरादून के मनीष जोशी ने लगातार दूसरे साल सिविल सेवा परीक्षा में कामयाबी का झंडा बुलंद किया है। उन्होंने परीक्षा में ऑल इंडिया 867वीं रैंक हासिल की है। इन दिनों वह हैदराबाद में इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) का प्रशिक्षण ले रहे हैं। मनीष की लगातार कामयाबी से परिवार में खुशी की लहर है।
मूलरूप से चकराता के अस्टार गांव और देहरादून में सरस्वती विहार, अजबपुर निवासी एआर जोशी के परिवार के लिए शनिवार का दिन खुशियां लेकर आया। देवबंद में पीएनबी के सीनियर मैनेजर एआर जोशी के बड़े बेटे मनीष जोशी ने लगातार दूसरे साल सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की।
मनीष वर्ष 2016 की सिविल सेवा परीक्षा में भी कामयाब हो चुके हैं, जिसके तहत वह आईआरएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं। मनीष की 12वीं तक की शिक्षा सेंट थॉमस कॉलेज से हुई। इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से मेकैनिकल इंजीनियरिंग की। इसी दौरान उनका चयन एक प्राइवेट कंपनी में 15 लाख रुपये के पैकेज पर हो गया, लेकिन वह सिविल सेवा में जाना चाहते थे। लिहाजा तैयारी में जुट गए। उन्होंने सेल्फ स्टडी के दम पर यह कामयाबी हासिल की। मनीष की मां उर्मिला जोशी ने बताया कि वह इन दिनों हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
मूलरूप से चकराता के अस्टार गांव और देहरादून में सरस्वती विहार, अजबपुर निवासी एआर जोशी के परिवार के लिए शनिवार का दिन खुशियां लेकर आया। देवबंद में पीएनबी के सीनियर मैनेजर एआर जोशी के बड़े बेटे मनीष जोशी ने लगातार दूसरे साल सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की।
मनीष वर्ष 2016 की सिविल सेवा परीक्षा में भी कामयाब हो चुके हैं, जिसके तहत वह आईआरएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं। मनीष की 12वीं तक की शिक्षा सेंट थॉमस कॉलेज से हुई। इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से मेकैनिकल इंजीनियरिंग की। इसी दौरान उनका चयन एक प्राइवेट कंपनी में 15 लाख रुपये के पैकेज पर हो गया, लेकिन वह सिविल सेवा में जाना चाहते थे। लिहाजा तैयारी में जुट गए। उन्होंने सेल्फ स्टडी के दम पर यह कामयाबी हासिल की। मनीष की मां उर्मिला जोशी ने बताया कि वह इन दिनों हैदराबाद में प्रशिक्षण ले रहे हैं।