मोदी जी, हम UP में नहीं रहना चाहते हैं
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उत्तराखंड से सटी यूपी के नजीबाबाद क्षेत्र के सीमांत गांवों को उतराखंड में शामिल करने की मुहिम एक बार फिर शुरू हो गई है।
सीमावर्ती जनसंघर्ष समिति ने पूर्वी गंगनहर के आधार पर सीमांकन करने की मांग प्रधानमंत्री से की है।
सीमावर्ती जनसंघर्ष समिति के अध्यक्ष मनमोहन दुदपुड़ी ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
मूलभूत सुविधाओं के लिए उत्तराखंड पर निर्भर गांव
ज्ञापन में कहा गया है कि पूर्वी गंगनहर हरिद्वार से निकलकर यूपी के जनपद बिजनौर के गांव गुलालवाली से होकर ढ़किया बावन सराय से गुजरी है।
इन दोनों ग्राम पंचायतों के बीच नहर के उतरी दिशा का क्षेत्र व कालागढ़ व कादराबाद क्षेत्र का उत्तराखंड में विलय कर दिया जाए।
यह समूचा क्षेत्र यूपी के तहसील, जनपद मुख्यालय से काफी दूर है और उत्तराखंड के नजदीक होने के है। यह क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं के लिए भी उत्तराखंड पर ही निर्भर है।
पहले भी दो साल तक किया था संघर्ष
गौरतलब है कि 33 ग्राम पंचायतों के 185 गांवों को उतराखंड में शामिल करने के लिए वर्ष 2008 में जन आंदोलन शुरू किया गया था।
दो वर्ष तक कड़ा संघर्ष करने के साथ 16 जून 2010 को उतराखंड-यूपी सीमा पर घंटों चक्का जाम किया गया था।
उस समय संघर्ष समिति की कमान संभालने वालों में मनमोहन दुदपुड़ी, परमजीत सिंह पम्मा, भगवत शर्मा, प्रेमलाल जखमोला, जगदीश नैथानी, बलवंत चौहान, कैप्टन सुखविंदर सिंह, राजू तोमर सहित 25 लोग शामिल थे।