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कैंट बोर्ड क्षेत्र में ही यूपी के मंत्री साहब सिंह की जमीन
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 28 May 2016 09:19 AM IST
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निर्माण पर महिला ने जताई थी आपत्ति
- फोटो : AmarUjala
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यूपी के मंत्री साहब सिंह सैनी की जमीन वाले केहरी गांव के क्षेत्र पर सेंट्रल कमांड ने मुहर लगा दी है। यह जमीन कैंट बोर्ड की है। शुक्रवार को सेंट्रल कमांड लखनऊ से आई टीम ने विवादित जमीन के कैंट बोर्ड में होने पर मुहर लगाई। अब आगे की कार्रवाई कैंट बोर्ड के स्तर से ही की जाएगी।
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उत्तर प्रदेश के मंत्री साहब सिंह सैनी की केहरी गांव स्थित जमीन की जांच के लिए रक्षा मंत्री मनोहर परिकर और रक्षा सचिव के हस्तक्षेप के बाद शुक्रवार को सेंट्रल कमांड लखनऊ की टीम दून पहुंच गई। टीम में करीब 12 लोग शामिल थे। जैसे ही टीम दून पहुंची तो यहां के अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
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टीम ने कैंट बोर्ड व राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त सर्वेक्षण के बाद इसे कैंट बोर्ड की जमीन होने पर मुहर लगा दी। टीम ने एमडीडीए व कैंट बोर्ड की उस संयुक्त रिपोर्ट को संज्ञान में लिया, जिसमें इस क्षेत्र को कैंट के प्रतिबंधित मानचित्र में होना दर्शाया गया था। मगर कैंट सीईओ सुब्रत पाल ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। टीम ने दोबारा सर्वेक्षण किया तो स्पष्ट हो गया कि केहरी गांव कैंट बोर्ड के अधीन है।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टीम ने रिपोर्ट बोर्ड को सौंप दी है। इसकी एक प्रति डीएम व एसडीएम को भेजी गई है। हालांकि इस प्रकरण में कोर्ट में 30 मई को सुनवाई है। सर्वेक्षण टीम में सेंट्रल कमांड से आए निदेशक स्तर के अधिकारी एके गुप्ता, डीओ जयंत पात्रा, तहसीलदार सदर शूरवरी सिंह राणा, कैंट बोर्ड केजेई नवनीत क्षेत्री, विजय कोहली, ओम प्रकाश, लेखपाल हुकुम पाल सिंह आदि मौजूद रहे।
अवैध निर्माण तत्काल कार्रवाई करेगा बोर्ड
कैंट बोर्ड अब अवैध निर्माण की शिकायत को हल्के में नहीं लेगा। मंत्री की जमीन के मामले में कैंट बोर्ड की भूमिका पर काफी सवाल उठे। जब रक्षा मंत्रालय ने मामले का संज्ञान लिया तो बोर्ड के अधिकारी हरकत में आए। आखिरकार यह क्षेत्र कैंट बोर्ड का निकला है। अब से छावनी परिषद क्षेत्र में अवैध निर्माण की कोई शिकायत आती है, तो बोर्ड तत्काल कार्रवाई करेगा।
कैंट बोर्ड वसूलेगा टैक्स
सेंट्रल कमांड लखनऊ की टीम के संयुक्त सर्वेक्षण रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है कि यह क्षेत्र कैंट बोर्ड के अधीन है। ऐसे में कैंट बोर्ड की अगली बोर्ड बैठक में इस क्षेत्र में टैक्स लगाने पर चर्चा हो सकती है। अभी तक किसी प्रकार का टैक्स नहीं लिया जा रहा था।