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बेमौसम बारिश ने तोड़ी काश्तकारों की कमर, खेतों में बिछी ओलों की चादर
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साहिया क्षेत्र के पानुवा गांव में ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त फसल को देखते किसान।
- फोटो : VIKAS NAGAR
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने काश्तकारों की कमर तोड़ कर दी है। शनिवार शाम क्षेत्र में झमाझम बारिश के साथ 20 मिनट तक ओलावृष्टि हुई। इससे खेतों में बर्फ के समान ओलो की चादर बिछ गई। मटर की फसल पूरी तरह से चौपट हो गई। अन्य फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।
बीते शुक्रवार को भी क्षेत्र में ओलावृष्टि से मटर की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा था। कई इलाकों में मटर के पौधे पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। काश्तकारों को आर्थिक तंगी का डर सताने लगा है। मटर के साथ ही गेहूं, जौ, मसूर, आड़ू, खुमानी, पुलम, अखरोट, हरी मिर्च, प्याज आदि फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। शनिवार को क्षेत्र में हुई बारिश के बीच चापनू, अमराह, पंजिया, दधोऊ, सुरेऊ, भंजरा, अलसी, सकनी, कनबुआ, कोफ्टी, खतार, समाया, बसाया, ललोऊ, गोथान, कोठा, तारली, दातनू, बडनू, गढ़ेता, सलगा, बोहा, खमरोली, भंजरा, सुरेऊ, मलोऊ, कोथी, अस्टाड़, लोरली, मताड़, हाजा, दसोऊ, डाडुवा, कितरोली, गबेला, दोधा, सुनोड़ा, मटियाना, भुपोऊ, हिड़का, कलेथा, गोना, जगथाना, बुरायला, होडा, मंगरोली, क्वारना, टिपऊ, चंदोऊ, जिसोऊ, नेवी, कुरोली, खतासा, रानी समेत 80 से भी अधिक गांवों में ओलावृष्टि हुई। करीब 20 मिनट तक हुई ओलावृष्टि से गांव से लेकर खेतों तक ओलों की सफेद चादर बिछ गई।
पानुवा निवासी रूपराम राठौर, बसाया निवासी कांति सिंह चौहान, अलसी निवासी सियाराम खन्ना, इंदर सिंह, सकनी निवासी संतराम पंवार, ककाड़ी निवासी सरदार सिंह, कोठा तारली निवासी चतर सिंह तोमर आदि का कहना है कि उन्होंने 120 रुपये प्रति किलो की दर से मटर का बीज खरीद कर खेतों में बोया था, लेकिन ओलावृष्टि ने सब कुछ तबाह कर दिया। अधिक बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल यलो रस्ट रोग की चपेट में आ गई है। कई लोगों ने खेतीबाड़ी के लिए बैंकों से पांच से छह लाख रुपये तक का लोन भी लिया हुआ है।
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वहीं, एसडीएम डॉ. अपूर्वा सिंह ने कहा कि संबंधित राजस्व उपनिरीक्षकों से क्षतिपूर्ति के आकलन की रिपोर्ट मांगी गई है।
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बीते शुक्रवार को भी क्षेत्र में ओलावृष्टि से मटर की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा था। कई इलाकों में मटर के पौधे पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। काश्तकारों को आर्थिक तंगी का डर सताने लगा है। मटर के साथ ही गेहूं, जौ, मसूर, आड़ू, खुमानी, पुलम, अखरोट, हरी मिर्च, प्याज आदि फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। शनिवार को क्षेत्र में हुई बारिश के बीच चापनू, अमराह, पंजिया, दधोऊ, सुरेऊ, भंजरा, अलसी, सकनी, कनबुआ, कोफ्टी, खतार, समाया, बसाया, ललोऊ, गोथान, कोठा, तारली, दातनू, बडनू, गढ़ेता, सलगा, बोहा, खमरोली, भंजरा, सुरेऊ, मलोऊ, कोथी, अस्टाड़, लोरली, मताड़, हाजा, दसोऊ, डाडुवा, कितरोली, गबेला, दोधा, सुनोड़ा, मटियाना, भुपोऊ, हिड़का, कलेथा, गोना, जगथाना, बुरायला, होडा, मंगरोली, क्वारना, टिपऊ, चंदोऊ, जिसोऊ, नेवी, कुरोली, खतासा, रानी समेत 80 से भी अधिक गांवों में ओलावृष्टि हुई। करीब 20 मिनट तक हुई ओलावृष्टि से गांव से लेकर खेतों तक ओलों की सफेद चादर बिछ गई।
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पानुवा निवासी रूपराम राठौर, बसाया निवासी कांति सिंह चौहान, अलसी निवासी सियाराम खन्ना, इंदर सिंह, सकनी निवासी संतराम पंवार, ककाड़ी निवासी सरदार सिंह, कोठा तारली निवासी चतर सिंह तोमर आदि का कहना है कि उन्होंने 120 रुपये प्रति किलो की दर से मटर का बीज खरीद कर खेतों में बोया था, लेकिन ओलावृष्टि ने सब कुछ तबाह कर दिया। अधिक बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल यलो रस्ट रोग की चपेट में आ गई है। कई लोगों ने खेतीबाड़ी के लिए बैंकों से पांच से छह लाख रुपये तक का लोन भी लिया हुआ है।
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वहीं, एसडीएम डॉ. अपूर्वा सिंह ने कहा कि संबंधित राजस्व उपनिरीक्षकों से क्षतिपूर्ति के आकलन की रिपोर्ट मांगी गई है।

गास्की गांव में हुई ओलावृष्टि।- फोटो : VIKAS NAGAR

गास्की गांव में हुई ओलावृष्टि।- फोटो : VIKAS NAGAR