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मानव रहित विमान बनेगा खेती में मददगार
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Mon, 10 Aug 2015 01:58 PM IST
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उत्तराखंड में आने वाले समय में मानव रहित विमान (यूएवी) की मदद से खेती होगी। पंत नगर विश्वविद्यालय जल्द इस तकनीक का ट्रायल करने जा रहा है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का दावा है कि इस नई तकनीक से फसल का उत्पादन तो बढ़ेगा ही, लागत भी कम होगी।
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पंत नगर विश्वविद्यालय फसल का उत्पादन बढ़ाने और उस पर आने वाली लागत को कम करने के लिए नई तकनीक विकसित करने का काम कर रहा है। इसी के तहत खेती में मानव रहित विमान के इस्तेमाल की योजना बनाई गई।
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पंत नगर विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभागाध्यक्ष अजीत सिंह नैन कहते हैं कि यूएवी का इस्तेमाल खेती में करने पर काफी समय से काम चल रहा था, अब यह ट्रायल की स्थिति में पहुंच चुका है। इस तकनीक में यूएवी को इलाके में उड़ाया जाएगा।
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यूएवी में लगे बेहद संवेदनशील और उच्च क्षमता वाले हाइपर स्पेक्ट्रल कैमरे जमीन की ऐसी तस्वीर खींचेंगे, जिसको सामान्य तौर नहीं देखा जा सकता है। इन फोटोग्राफ का प्रयोगशाला में विश्लेषण कर वैज्ञानिक सटीक तरीके से भूमि में पोषक तत्वों की स्थिति, उसमें नमी का पता कर सकेंगे।
इसके अलावा कितना खाद डालना है यह भी बताया जा सकेगा। इसके अलावा यूएवी से फसलों में होने वाली बीमारी, कीटों के हमले का भी पता चलेगा। इसके बाद वैज्ञानिक उससे निपटने के तरीके भी बता सकेंगे।
कई बार किसान बिना जरूरत या ज्यादा खाद का इस्तेमाल खेती में करते हैं, जो कि पानी के जरिए फूड चेन में पहुंच जाता है। इस प्रदूषण को रोकने में इस तकनीक से सहायता मिलेगी। कम खाद डालने से उस पर आने वाली लागत भी कम होगी।
लाभ
- फसल का उत्पादन बढ़ेगा
- खेती करने की लागत कम होगी
- अनावश्यक खाद आदि का इस्तेमाल कम होगा
- प्रदूषण रोकने में भी मददगार
चुनौतियां
- 2050 तक 450 मीट्रिक टन खाद्यान्न की पड़ेगी जरूरत
- अभी केवल 280 मीट्रिक टन खाद्यान्न का होता उत्पादन
वैज्ञानिक खेतों की स्थिति यूएवी के जरिए जान सकेंगे। जमीन का सटीक आकलन हो सकेगा। भविष्य में खेती की जमीन नहीं बढ़नी है, ऐसे में तकनीक और दूसरे माध्यमों को विकसित कर उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
- डॉ. जे कुमार, रजिस्ट्रार, पंत नगर विश्वविद्यालय