अमर उजाला बेस संवाद : पर्यटकों को बॉर्डर पर पढ़ाए जाते हैं पुराने नियम, स्मार्ट सिटी का रजिस्ट्रेशन बन गया मुसीबत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली, यूपी, हरियाणा जैसे राज्यों से सभी नियमों के तहत होटल की बुकिंग और स्मार्ट सिटी वेबसाइट पर पंजीकरण कराकर आने वाले पर्यटकों को बॉर्डर से नियमों का हवाला देकर लौटा दिया जाता है। अमर उजाला बेस संवाद में होटल इंडस्ट्री से जुड़े युवाओं ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
बेस संवाद में शामिल प्रिंस होटल के मालिक प्रफुल्ल माथुर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से अनलॉक की गाइडलाइंस आईं, उनमें लगातार परिवर्तन हुए। पर्यटकों ने उत्तराखंड का रुख करना तो शुरू कर दिया, लेकिन उनकी परेशानियों की जमीनी हकीकत बेहद कड़वी है।
उन्होंने बताया कि ऐसे तमाम मामले सामने आए हैं, जब पर्यटक बुकिंग पहले से कराने के बाद मसूरी आ रहा था, लेकिन बॉर्डर पर पहुंचते ही पुलिस ने उससे कोविड सर्टिफिकेट मांगा। उन्होंने बताया भी कि अब कोविड सर्टिफिकेट या कोविड जांच की जरूरत नहीं है।
इसके बावजूद पुलिस ने यह कहते हुए उन्हें लौटा दिया कि अभी हमारे पास कोई दिशा-निर्देश नहीं आए हैं। प्रफुल्ल का कहना है कि निश्चित तौर पर यह सरकारी मशीनरी की असफलता है। शासन से एक आदेश जारी तो हो जाता है, लेकिन कई-कई दिन बाद तक बॉर्डर पर लागू नहीं हो पा रहा है।
काशमांडा लॉज के मालिक दिनकर प्रताप सिंह भी इस बात से इत्तफाक रखते हैं। उनका कहना है कि पर्यटन को सुगम बनाने की सरकार की योजना बॉर्डर पर आकर असफल हो रही है। बॉर्डर पर सबसे पहले दिशा-निर्देश पहुंचाने की जरूरत है, क्योंकि पर्यटक का सामना सबसे पहले यहीं सरकार से होता है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ दिनों में बड़ी संख्या में पर्यटक कोविड टेस्ट न कराने की वजह से मायूस होकर लौट गए हैं। पर्यटकों के बीच इसका संदेश बेहद नकारात्मक जा रहा है। वहीं, होटल इंडस्ट्री की उम्मीदों पर भी पानी फिर रहा है।
स्मार्ट सिटी का रजिस्ट्रेशन मुसीबत
उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के लिए स्मार्ट सिटी वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन भी सबसे बड़ी चुनौती बन रहा है। पर्यटक पहले तो बमुश्किल पंजीकरण कराते हैं। फिर जब उत्तराखंड आते हैं तो बॉर्डर पर उन्हें लाइन में लगकर दोबारा पंजीकरण कराना पड़ता है।
हिमालय क्लब के मालिक तरु वैश्य का कहना है कि पर्यटकों के लिए होटल की बुकिंग के बाद सबसे बड़ा सिरदर्द स्मार्ट सिटी वेबसाइट है। सरकार जो आदेश आज जारी करती है, वह कई-कई दिन बाद जाकर वेबसाइट में अपडेट होते हैं। इस वजह से पर्यटकों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पूरे देश में अनलॉक की सुविधा निर्बाध मिल रही है लेकिन उत्तराखंड में आज भी स्मार्ट सिटी वेबसाइट पंजीकरण का बैरियर लगा हुआ है। होटलेयिर रूचिर का कहना है कि स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर पंजीकरण की बाध्यता को सरकार को तुरंत हटा देना चाहिए। बाकी राज्यों में पर्यटन काफी रफ्तार पकड़ने लगा है, लेकिन उत्तराखंड में पंजीकरण जैसी बाधाओं की वजह से तेजी नहीं आ पा रही है।
पंजीकरण के बाद भी कतार क्यूं
देहरादून हो या नैनीताल, सभी जगहों पर पर्यटकों को स्मार्ट सिटी वेबसाइट पर पंजीकरण कराने के बाद भी कतार में लगना पड़ रहा है। इसके पीछे वजह यह है कि ऐसे सभी पर्यटकों की अलग से जानकारी बॉर्डरों पर रखी जा रही है। जबकि नियम के हिसाब से ऑनलाइन पंजीकरण होने के बाद अलग से पंजीकरण नहीं होना चाहिए।
सुरक्षित हैं दून के होटल और लॉज
उत्तराखंड आने की चाहत रखने वाले पर्यटकों को प्रदेश के होटल, लॉज मालिकों ने कोरोना से सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। उन्होंने अमर उजाला बेस संवाद के माध्यम से अपील की है कि वह बेधड़क घूमने आएं। सभी होटल और लॉज सुरक्षित हैं।
अमर उजाला बेस संवाद में होटल इंडस्ट्री से जुड़े प्रशांत कुमार ने कहा कि लगातार सभी कमरों को सैनिटाइज कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कमरे में इस्तेमाल होने वाली हर चीज को सैनिटाइज किया जा रहा है। इसलिए पर्यटकों के यहां ठहरने में कोई खतरा नहीं है। होटल इंडस्ट्री से जुड़े दिनकर प्रसाद का भी यही कहना है। उन्होंने बताया कि उनके यहां काम करने वाले कर्मचारियों को भी कोरोना से बचाव के लिए मास्क और सैनिटाइजर इस्तेमाल करने को दिया गया है। वे ग्लव्स पहनकर ही काम कर रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वह निश्चिंत होकर उत्तराखंड आएं।
दिनकर प्रसाद ने कहा कि सबसे पहला मकसद यह है कि पर्यटक किसी भी तरह से कोरोना की जद में न आए। इसके लिए कर्मचारियों की भी लगातार थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। खान-पान की चीजों को भी खास बचाव के साथ पर्यटकों के सामने पेश किया जा रहा है। क्लब संचालक तरुवर वैश्य का कहना है कि सभी गतिविधियों में पहली प्राथमिकता के तौर पर सैनिटाइजेशन, मास्क, ग्लव्स और सोशल डिस्टेसिंग का ख्याल रखा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की सेहत का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है ताकि किसी भी पर्यटक के लिए कोई परेशानी पैदा न हो। उन्होंने पर्यटकों से अपील की है कि वह सुरक्षित हैं, इसलिए उत्तराखंड घूमने जरूर आएं। एक होटल के मालिक अभिनव कर्णवाल ने भी सभी पर्यटकों से अपील की है कि वह सुरक्षित सफर पर आएं। यहां से सुरक्षित ही वापस जाएं।
सरकार साथ दे तो पटरी पर लौटेगा पर्यटन कारोबार
कोरोना के मामलों में कमी आने के साथ ही राज्य में पर्यटन कारोबार एक बार फिर गति पकड़ने लगा है। प्रमुख पर्यटन स्थल मसूरी और नैनीताल के ज्यादातर होटल वीकेंड के लिए पहले ही बुक हो चुके हैं। अन्य दूसरी जगहों पर भी पर्यटन गतिविधियां शुरू हो गई हैं। पर्यटन कारोबारी भी इसको लेकर खासे उत्साहित हैं। हालांकि पिछले कुछ माह के दौरान उन्होंने बहुत नुकसान भी सहा है। पहले कोरोना और बाद में सरकार की कमियों का खामियाजा पर्यटन सेक्टर को भुगतना पड़ा है। अमर उजाला की ओर से आयोजित बेस संवाद में कारोबारियों ने पर्यटन व्यवसाय की बदहाली का ठीकरा सरकार के सिर फोड़ा।
मसूरी स्थित प्रिंस होटल के प्रफुल्ल माथुर, नैनीताल होटल इंडस्ट्री एसोसिएशन के रुचिर शाह, रामनगर कॉर्बेट नेशनल पार्क के नेचर गाइड प्रशांत कुमार, काष्मांडा लॉज के दिनकर प्रताप, हिमालय क्लब के तरुवर वैश्य और नंद रेजिडेंसी के अभिनव कर्णवाल ने राज्य के पर्यटन सेक्टर की स्थिति और सरकार की भूमिका पर अपनी राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार और सरकारी सिस्टम के बीच समन्वय की कमी, पर्यटन बेहतरी के लिए देर से उठाए गए कदम, बार-बार बदलते नियम और पर्यटन गतिविधियों के प्रचार-प्रसार की कमी ने कोरोना के बाद उत्तराखंड के पर्यटन व्यवसाय को खासा नुकसान पहुंचाया है।
दूसरी ओर, पर्यटन व्यवसायी कोरोना से बड़े पैमाने पर नुकसान की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना के दौरान कारोबार पूरी तरह बंद रहा। ज्यादातर कारोबारियों ने इस दौरान भी अपने स्टाफ को तनख्वाह दी। इससे उनके सामने भी आर्थिक संकट गहरा गया है। ऐसे में अब वो भी सरकार से कुछ रियायतों की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे पर्यटन सेक्टर एक बार फिर गति पकड़ सके।