यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को भेजा पत्र, कहा- छात्रों पर फीस के लिए दबाव न बनाएं
- यूजीसी ने कहा- लॉकडाउन में छात्रों से सहानुभूति से पेश आएं सभी संस्थान प्रबंधन
- जारी किया नोटिस, अब नाम के आगे विवि नहीं लिख सकेंगे डीम्ड संस्थान
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लॉकडाउन के दौरान छात्रों पर फीस जमा कराने का दबाव बनाने वाले संस्थानों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पत्र भेजा है। यूजीसी ने कहा है कि ऐसे संस्थान इस मुश्किल समय में छात्रों के साथ सख्ती न बरतें। इसके बजाय वह सहानुभूति रखें।
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से कहा है कि वे छात्रों को तुरंत फीस देने के लिए बाध्य न करें और व्यक्तिगत मामलों को सहानुभूतिपूर्वक देखें। चांसलर और प्रिंसिपल को लिखे पत्र में यूजीसी ने कहा है कि छात्रों और अभिभावकों की शिकायत मिली थी कि विश्वविद्यालय और कॉलेज वार्षिक, सेमेस्टर ट्यूशन शुल्क, परीक्षा शुल्क इत्यादि के तत्काल भुगतान पर जोर दे रहे हैं।
यूजीसी ने कहा कि पत्र के अनुसार अभिभावक लॉकडाउन के कारण वित्तीय कठिनाई का सामना करने के शुल्क का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए यह अनुरोध किया जाता है कि मौजूदा कठिन परिस्थितियों के मद्देनजर, विश्वविद्यालय और कॉलेज वार्षिक/सेमेस्टर शुल्क, शिक्षण शुल्क, परीक्षा शुल्क आदि के भुगतान के संबंध में कठिन समय को देखते हुए विचार कर सकते हैं, जब तक की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती। वहीं यदि संभव हो तो छात्रों के लिए वैकल्पिक भुगतान विकल्पों की पेशकश करने पर भी विचार किया जा सकता है।
अब नाम के आगे विवि नहीं लिख सकेंगे डीम्ड संस्थान
यूजीसी ने देशभर के सभी 127 डीम्ड संस्थानों को नोटिस जारी किया है। इसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि वह अपने नाम के साथ विश्वविद्यालय शब्द का इस्तेमाल न करें। यदि ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसमें उत्तराखंड के तीन संस्थान भी शामिल हैं।
अभी तक ग्राफिक एरा डीम्ड संस्थान, एफआरआई और गुरुकुल कांगड़ी विद्यापीठ हरिद्वार अपने नाम के आगे विवि शब्द का प्रयोग करते थे। इन्हें डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी घोषित किया जा चुका है। यूजीसी ने यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद लागू की है।