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चारधाम यात्रा 2020: केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद अब तक 151 श्रद्धालु करा चुके ऑनलाइन पूजा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 03 Jun 2020 08:16 PM IST
सार

  • प्रतिदिन दिन बाबा केदार की दो या तीन पूजाएं हो रही ऑनलाइन
  • फोन और मेल के जरिए करा रहे लोग बुकिंग

Unlock-1 In Uttarakhand Chardham yatra: ़151 Pilgrims Done Kedarnath dham online puja till now
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण भक्त और भगवान के बीच बनी दूरी को ऑनलाइन पूजा के जरिए कम किया जा रहा है। केदारनाथ धाम में कपाटोद्घाटन के बाद से देश के विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालुओं द्वारा बाबा केदार की 151 पूजा व आरती कराई जा चुकी हैं। इन श्रद्धालुओं को डाक से प्रसाद भेजा जा रहा है।



केदारनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 29 अप्रैल को खुल गए थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के श्रद्धालु धाम नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में भक्तजन ऑनलाइन माध्यम से बाबा केदार के दर्शन कर रहे हैं। धाम में प्रतिदिन देश के विभिन्न प्रांतों से दो से तीन श्रद्धालुओं द्वारा बाबा केदार की सुबह की पूजा, आरती व सायंकालीन आरती ऑनलाइन कराई जा रही हैं।



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देवस्थानम बोर्ड के कार्याधिकारी नमर्देश्वर प्रसाद जमलोकी ने बताया कि कपाटोद्घाटन के बाद से केदारनाथ में कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड आदि प्रांतों के श्रद्धालुओं द्वारा अभी तक पूजाएं ऑनलाइन कराई जा चुकी हैं।

इन सभी भक्तों के घर के पते पर प्रसाद डाक से भेजा जा रहा है। बताया कि मेल और कॉल के जरिए लोग ऑनलाइन पूजा के लिए बुकिंग कर रहे हैं। धाम में मुख्य पुजारी समेत 11 कर्मचारियों का स्टॉफ मौजूद है। कपाटोद़्घाटन के बाद से महाभिषेक एक, रुद्राभिषेक दो, आरती 12 , शोडशोपचार 24 और नित्य नियम भोग पूजा पाठ एवं कर्पूर आरती 112, ऑनलाइन हो चुकी हैं।

रामबाड़ा से गरूड़चट्टी तक पुराना पैदल मार्ग होगा पुनर्जीवित

केदारनाथ में निर्माण कार्य
केदारनाथ में निर्माण कार्य
केदारनाथ में पुनर्निर्माण जोर पकड़ने लगे हैं। आदिगुरू शंकराचार्य के समाधि स्थल के पुनर्निर्माण के साथ ही तीर्थ पुरोहितों के भवन, सरस्वती नदी पर घाट व आस्था पथ का कार्य चल रहा है। वहीं रामबाड़ा से गरूड़चट्टी तक पुराने पैदल मार्ग को पुनर्जीवित करने के लिए सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई पूरी होने के बाद लगभग साढ़े तीन किमी पैदल मार्ग का निर्माण किया जाएगा।

बीते दो वर्ष से मंदिर के पीछे आदिगुरू शंकराचार्य के समाधि स्थल का पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है। कार्यदायी संस्था वुड स्टोन कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा समाधि का राफ्ट तैयार किया जा चुका है। इसी राफ्ट पर समाधि स्थल बनाया जाना है। सरस्वती नदी किनारे घाट निर्माण और मंदिर तक आस्था पथ भी बनाया जा रहा है।

आने वाले समय में इस मार्ग से दिव्यांग श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे।  दूसरी तरफ जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग द्वारा गरूड़चट्टी को केदारनाथ मंदिर से लिंक करने के लिए मंदाकिनी नदी पर 60 मीटर स्पान के पुल के एंबेडमेंट का कार्य लगभग पूरा किया जा चुका है।

सबकुछ ठीक रहा तो दो माह में पुल को जोड़ दिया जाएगा। इन दिनों कार्यदायी संस्थाओं के एक सौ से अधिक मजदूर धाम में मौजूद हैं। टीम प्रभारी वुड स्टोन कंस्ट्रक्शन कंपनी, केदारनाथ मनोज सेमवाल का कहना है कि केदारनाथ में सरस्वती नदी पर घाट व आस्था पथ का कार्य दो माह में पूरा हो जाएगा। आदिगुरू शंकराचार्य के समाधि स्थल और तीर्थ पुरोहितों के आवासीय भवनों के निर्माण में डेढ़ वर्ष का समय लग सकता है।
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