अनोखा विरोध: पंचायत प्रतिनिधियों ने एक घंटे तक धूप में किया 'तप', पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी दिया साथ
- प्रधानों को बिना संसाधनों के कोरोना संक्रमण से निपटने की जिम्मेदारी देने का विरोध
- पंचायत जनाधिकार मंच ने किया था आह्वान, पूर्व सीएम भी शामिल हुए
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उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण को लेकर ग्राम प्रधानों पर अतिरिक्त बोझ डाले जाने के विरोध में बुधवार को प्रदेश भर में सौ से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों ने एक घंटे धरना देकर विरोध जताया। सभी पंचायत प्रतिनिधियों ने एक घंटे तक धूप में बैठकर तप किया। अपने-अपने आवास पर दिए गए धरने में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी शामिल हुए।
पंचायत जनाधिकार मंच की ओर से आयोजित इस प्रदर्शन में पिथौरागढ़ से लेकर देहरादून तक के प्रतिनिधि शामिल हुए। दोपहर बाद ये सभी धूप में एक घंटे तक बैठे। मंच के संस्थापक संयोजक जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि सरकार ने ग्राम प्रधानों को संसाधन नहीं दिए और काम पकड़ा दिया। सरकार ने कहा कि प्रधानों को दस हजार रुपये दिए गए हैं। पता करने पर यह भी गलत साबित हुआ। इससे प्रधानों की छवि भी खराब हुई है।
ग्राम प्रधानों से माफी मांगे सरकार
प्रधानों को प्रवासियों को क्वारंटीन कराने की जिम्मेदारी दी गई लेकिन उन्हें मानवीय और आर्थिक संसाधन नहीं दिए गए। जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि पंचायत जनाधिकार मंच की ओर से इस धरने के जरिए यह भी मांग की गई है कि प्रदेश सरकार ग्राम प्रधानों से माफी मांगे।
प्रधानों को मानवीय और आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। एक घंटे के इस तप में नैनीताल, पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी सहित अन्य सभी जिलों से पंचायत प्रतिनिधि और समर्थक धरने पर बैठे। एक घंटे के इस तप की बाद में फेसबुक पर फोटो भी साझा की गईं।