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Uniform Civil Code: यूसीसी लागू होने के बाद क्या हो सकते हैं प्रावधान, जानें ड्राफ्ट रिपोर्ट की खास बातें

Fri, 02 Feb 2024 03:43 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 02 Feb 2024 03:43 PM IST
सार

Uniform Civil Code News: कल कैबिनेट बैठक में यूसीसी ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी मिलने के बाद इसे छह फरवरी को विधानसभा में पेश किया जाएगा। संभावना है कि यूसीसी ड्राफ्ट में कई बड़े प्रावधान किए हैं। 
 

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Uniform Civil Code Expected provisions In Draft Report Uttarakhand news in Hindi
समान नागरिक संहिता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड में जल्द ही समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने जा रहा है। शुक्रवार को विशेषज्ञ समिति की अध्यक्ष जस्टिस (सेनि) रंजना प्रकाश देसाई और उनकी टीम ने ड्राफ्ट रिपोर्ट सीएम पुष्कर सिंह धामी को सौंप दी है। अब कल कैबिनेट बैठक में यूसीसी ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी मिल सकती है। जिसके बाद इसे छह फरवरी को विधानसभा में पेश किया जाएगा। यूसीसी ड्राफ्ट में कई बड़े प्रावधान किए हैं। 

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ये हैं ड्राफ्ट के संभावित प्रावधान

1- लड़कियों की विवाह की आयु बढ़ाई जाएगी, जिससे वे विवाह से पहले ग्रेजुएट हो सकें। 
 2- विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। बगैर रजिस्ट्रेशन किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। ग्राम स्तर पर भी शादी के रजिस्ट्रेशन की सुविधा होगी। 
 3- पति-पत्नी दोनों को तलाक के समान आधार उपलब्ध होंगे। तलाक का जो ग्राउंड पति के लिए लागू होगा, वही पत्नी के लिए भी लागू होगा। फिलहाल पर्सनल लॉ के तहत पति और पत्नी के पास तलाक के अलग-अलग ग्राउंड हैं। 
 4- पॉलीगैमी या बहुविवाह पर रोक लगेगी। 
 5- उत्तराधिकार में लड़कियों को लड़कों के बराबर का हिस्सा मिलेगा। अभी तक पर्सनल लॉ के मुताबिक लड़के का शेयर लड़की से अधिक है।
  6- नौकरीशुदा बेटे की मृत्यु पर पत्नी को मिलने वाले मुआवजे में वृद्ध माता-पिता के भरण पोषण की भी जिम्मेदारी होगी। अगर पत्नी पुर्नविवाह करती है तो पति की मौत पर मिलने वाले कंपेंशेसन में माता-पिता का भी हिस्सा होगा। 
 7- मेंटेनेंस: अगर पत्नी की मृत्यु हो जाती है और उसके माता पिता का कोई सहारा न हो, तो उनके भरण पोषण का दायित्व पति पर होगा।
 8- एडॉप्शन: सभी को मिलेगा गोद लेने का अधिकार। मुस्लिम महिलाओं को भी मिलेगा गोद लेने का अधिकार, गोद लेने की प्रक्रिया आसान की जाएगी। 
 9- हलाला और इद्दत पर रोक होगी। 
 10- लिव इन रिलेशनशिप का डिक्लेरेशन आवश्यक होगा। ये एक सेल्फ डिक्लेरेशन की तरह होगा जिसका एक वैधानिक फॉर्मैट लग सकती है।
 11- गार्जियनशिप- बच्चे के अनाथ होने की स्थिति में गार्जियनशिप की प्रक्रिया को आसान किया जाएगा। 
 12- पति-पत्नी के झगड़े की स्थिति में बच्चों की कस्टडी उनके ग्रैंड पैरेंट्स को दी जा सकती है।
13- जनसंख्या नियंत्रण को अभी सम्मिलित नहीं किया गया है।

सोशल मीडिया में भी यूसीसी के ड्राफ्ट पर धामी की वाहवाही
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट मिलते ही सोशल मीडिया में भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मुहिम को वाहवाही मिलने लगी। दिनभर नामी शख्सियत से लेकर सोशल मीडिया इंफ्यूलेंसर ने यूसीसी के ड्राफ्ट पर सीएम धामी के फैसले की जमकर तारीफ की।

कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भारत, श्रेष्ठ भारत विजन को देवभूमि से धामी सरकार सच में बदल रही है। शुक्रवार को जैसे ही यूसीसी की कमेटी ने ड्राफ्ट मुख्यमंत्री को सौंपा तो सोशल मीडिया में हैशटैग यूसीसी इन उत्तराखंड तेजी से ट्रेंड हो गया। देखते ही देखते ड्राफ्ट के समर्थन में देशभर से सोशल मीडिया इंफ्यूलेंसर से लेकर बड़ी शख्सियत, विचारक एवं टिप्पणीकार आगे आ गए।

सोशल मीडिया में ट्वीट, पोस्ट, शेयरिंग, ग्रफिक्स, वीडियो के साथ यूसीसी पर धामी सरकार के निर्णय का समर्थन होने लगा। हर कोई इस फैसले पर मुख्यमंत्री धामी के मुरीद दिखे और बेबाकी से लिखते गए कि समान नागरिक संहिता कानून समय की जरूरत है। खासकर यूसीसी के समर्थन में सबसे ज्यादा लोग सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्वीटर) पर ट्रेंड करते नजर आए।

प्रीति गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक भारत-श्रेष्ठ भारत का विजन सच में बदल रहा है। रमेश सोलंकी ने लिखा कि समृद्धि और समानता की दिशा में यूसीसी से देवभूमि एक समृद्ध समाज की ओर कदम बढ़ा रहा है।

सौरभ गुप्ता नाम के यूजर ने मुख्यमंत्री धामी के इस ऐतिहासिक निर्णय की बधाई देते हुए लिखा कि निश्चित तौर पर यह सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जल्द ही यूसीसी को कानून बनाकर उत्तराखंड में लागू भी कर दिया जाएगा।

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