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उत्तराखंड सरकार की गलती भुगत रहे बेरोजगार

Tue, 13 Sep 2016 08:26 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 13 Sep 2016 08:26 AM IST
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unemployed surfers due to uttarakhand government
harish rawat

प्रदेश सरकार की एक गलती के कारण उत्तरकाशी में जौनपुर और रवाईं घाटी क्षेत्र के एक लाख युवाओं को ओबीसी प्रमाण पत्र का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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राज्य सरकार की ओर से इन समुदायों को जारी किया गया ओबीसी प्रमाण पत्र केंद्रीय सेवाओं में मान्य नहीं है। वजह, प्रमाण पत्र संकल्प संख्या वर्ष 2011 के बजाय वर्ष 1993 की व्यवस्था के अनुसार जारी हो रहा है। जब तक वर्ष 2011 के अनुरूप संशोधित शासनादेश के अनुसार प्रमाण पत्र जारी नहीं होगा, यह समस्या बनी रहेगी।
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दरअसल, उत्तरकाशी जिले के जौनपुर और रर्वाइं घाटी को उत्तर प्रदेश का हिस्सा रहने के दौरान 1993 में अन्य पिछड़ा वर्ग में आरक्षण का लाभ मिलता रहा। अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 2004 में इसी व्यवस्था को जस का तस अपना लिया गया। हालांकि क्षेत्र के लोगों को केंद्र सरकार की किसी भी सेवा और संस्थान में आरक्षण का लाभ नहीं मिला।
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तब स्थानीय लोगों ने करीब सात साल तक इसे केंद्र की आरक्षण सूची में लाने के प्रयास किए। 2011 में राज्य सरकार की तरह केंद्र सरकार ने भी चिह्नित जातियों को अनुमोदित कर अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी का आरक्षण देने पर सहमति जताई। लेकिन एक छोटी सी तकनीकी खामी के चलते पिछले पांच साल में एक भी युवा को केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है।

जारी प्रमाण पत्र में अब भी जो संकल्प संख्या का जिक्र है, वह केंद्र के 1993 में जारी राजपत्र की संकल्प संख्या है, जबकि रवाईं जौनपुरी की संकल्प संख्या वर्ष 2011 की है।


यह है तकनीकी खामी
नियमानुसार 2011 में जब केंद्र सरकार ने क्षेत्र को आरक्षण का लाभ देने पर सहमति जताई तभी एक नया संकल्प पत्र लगाया जाना था। इसके अनुसार आरक्षण प्रमाण पत्र पूर्व में 1993 के बजाय वर्ष 2011 की व्यवस्था के अनुसार देने का जिक्र किया जाना था। नया संकल्प पत्र न होने के चलते नेशनल काउंसिल ऑफ बैकवर्ड क्लासेस परीक्षण के दौरान 1993 की व्यवस्था के अनुसार पूरे क्षेत्र को उत्तर प्रदेश का हिस्सा मान रहा है। जिसके तहत वहां के निवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है।

मुहिम में जुटे हैं डॉ. कपिल 
ओबीसी प्रमाण पत्रों की त्रुटि को सुधारने के लिए बड़कोट के डा. कपिल देव ने मुहिम चला रखी है। कपिल ने संशोधित शासनादेश जारी करने के लिए शासन के उच्चाधिकारियों से भी मुलाकात की। उनका कहना है कि सिर्फ संकल्प संख्या की वजह से रवाल्टा और जौनपुर समुदाय के अभ्यर्थियों को केंद्रीय प्रवेश परीक्षाओं और भर्तियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है। एक लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रमाण पत्र जारी हो चुका हैं, जिनमें संशोधन अनिवार्य है।

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