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हरिद्वार से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में उमा

Mon, 30 Sep 2013 06:52 PM IST
शेषमणि शुक्ल/ अमर उजाला, देहरादून
शेषमणि शुक्ल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 30 Sep 2013 06:52 PM IST
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Uma preparing to fight Lok Sabha elections in Haridwar

मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी उमा भारती एक बार फिर लोकसभा में जाने की तैयारी कर रही हैं। अबकी बार वे गंगा को अपना जरिया बना रही हैं और हरिद्वार में चुनावी जमीन तैयार करने में जुटी हैं।

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संकेत भी मिलने लगे
उनके आने का संकेत इससे भी मिलने लगे हैं कि केंद्रीय मंत्री हरीश रावत हरिद्वार से हटने की जुगत भिड़ा रहे हैं। उमा भारती गंगा रक्षा के बहाने पिछले कुछ महीनों से ज्यादा सक्रिय हुई हैं। इस सक्रियता को देखते हुए ही भाजपा का एक बड़ा तबका उनके हरिद्वार से चुनाव लड़ने के संकेत दे रहे हैं।
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गंगा और हरिद्वार एक-दूसरे के पूरक हैं। धर्म नगरी में इस भावनात्मक मुद्दे को सहजता से भुनाया जा सकता है। साथ ही संत समाज को अपने साथ जोड़ा जा सकता है। भाजपा के पास हरिद्वार से वैसे भी कोई दमदार प्रत्याशी नजर नहीं आ रहा है।
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हरीश रावत की छटपटाहट
स्थानीय विधायक मदन कौशिक और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल का नाम बीच-बीच में आता जरूर है। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में कौशिक का टिकट संत के चलते ही ऐन वक्त पर वापस ले लिया गया था। इसी का फायदा कांग्रेस को मिला और हरीश रावत वहां से सांसद बनने में कामयाब रहे। लेकिन अब हरीश रावत की छटपटाहट भी हरिद्वार में उमा के आने का संकेत दे रहे हैं।

हरिद्वार में इस बार हरीश रावत की स्थिति बहुत अच्छी नहीं आंकी जा रही है। गन्ना किसान नाराज हैं। विधानसभा और निकाय चुनावों में टिकट बंटवारे में हरीश की भूमिका से स्थानीय कांग्रेसियों में नाराजगी है। इसी नाराजगी में ही हरीश के एक नजदीकी ने कांग्रेस से अलग होकर बसपा का साथ पकड़ा लिया।

मुस्लिम वोटरों में चमक खोने लगे हरीश
बसपा ने भी चुनावी दांव खेला और हाजी को हरिद्वार लोकसभा का प्रत्याशी बना दिया। इस घटना ने यह भी संकेत दे दिया कि हरिद्वार के मुस्लिम वोटरों में हरीश की आभा चमक खोने लगी है। इन सब से हरीश भी अनभिज्ञ नहीं हैं।


पार्टी सूत्रों का कहना है कि परिस्थितियों को देखते हुए ही हरीश अब हरिद्वार से खिसकने की तैयारी में हैं। वे अपना अगला पड़ाव नैनीताल लोकसभा सीट को बनाने की जुगत में हैं। खाद्य सुरक्षा योजना पर हुई कार्यशाला में रविवार को रुद्रपुर में उनकी मौजूदगी और क्षेत्रीय सांसद केसी सिंह बाबा की गैरमौजूदगी के भी राजनीतिक मायने साफ हैं।

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