उमा की दो टूक, पहले केदारनाथ फिर तीर्थ पुरोहित
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केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने केदारनाथ पुनर्निर्माण में मंदिर की पवित्रता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ किसी भी समझौते के साथ इनकार किया है।
उमा भारती विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ केदारनाथ के दौरे पर पहुंचीं थीं। केंद्रीय मंत्री ने तीर्थ पुरोहितों की मांगों पर पहले डांटा फिर पुचकारा भी।
तीर्थ पुरोहितों ने उनके समक्ष तीन मांग रखी, तो उमा ने भी तीन शर्त रख दी। उमा भारती ने साफ कह दिया कि पहले केदारबाबा है, दूसरे स्थान पर तीर्थ पुरोहित। हालांकि तीर्थ पुरोहितों के हक के साथ अहित नहीं होने दिया जाएगा।
तीर्थ पुरोहित समाज ने आपदा से बचे भवनों को यथावत रखने, क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत और जिन लोगों के भवन ध्वस्त हो गए हैं, उनको दोबारा उसी स्थान पर बसाने की मांग की।
जवाब में उमा ने साफ कह दिया कि देवदर्शनी से मंदिर के आगे स्थापित नंदी बैल की प्रतिमा दिखाई दे, यह रूप होना चाहिए। सरस्वती और मंदाकिनी नदी के संगम के बीच के स्थान पर मलमूत्र विसर्जन (यानि कि होटल निर्माण न हो) नहीं होना चाहिए। मंदिर समीप सिर्फ एक मंजिल दुकानों का निर्माण हो। ऐसा न हो कि मंदिर ढंक जाए।
पुरोहित बोले, दीदी हमारा साथ मत छोड़ना
उन्होंने कहा कि हक-हकूकधारियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। जो प्रभावित व्यापारी जहां का है, उसको उसी स्थान पर पुनर्वासित किया जाएगा। उनकी भूमि पर बाहरी व्यक्ति को नहीं बसने दिया जाएगा।
पुराने स्थान पर बसाने कि जिद पर उन्होंने कहा कि वह उनकी बेटी-बहन हैं और इसी रूप में आई है। यदि जबरदस्ती करेंगे, तो उनको मुख्यमंत्री हरीश रावत (यानि कि सरकारी तंत्र) के हवाले कर दूंगी। तब सब कुछ सरकारी हिसाब से होगा।
वह किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगी। उमा का मूड देखकर तीर्थ पुरोहित भी बोल उठे कि ‘दीदी आप हमारा साथ मत छोड़ना’।
कुंडों के जीर्णोद्धार पर जोर
जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने आपदा से क्षतिग्रस्त और तबाह हो चुके पवित्र कुंडों के जीर्णोद्धार की बात कही है। उन्होंने कहा कि कुंडों का पौराणिक महत्व है। तीर्थयात्री इन कुंडों में पूजा कराते हैं। इसलिए उनका जीर्णोद्धार और पुनर्जीवित करना जरूरी है।