तीन तलाक पर उलमा के तेवर कड़े, कहा 'ये शरीयत में खुली दखलंदाजी'
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तीन तलाक के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार को लगातार मुस्लिम धर्मगुरुओं का विरोध झेलना पड़ रहा है। यह विरोध अब देहरादून में भी शुरू हो गया है। शहर और देहात के उलमा की बैठक में तय किया गया कि जुमे की नमाज से पहले लोगों को तीन तलाक में मसले पर तफ्सील से समझाया जाएगा।
इसके बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा तैयार किये गए एक फार्म पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। इन फार्मों को बोर्ड के दफ्तर भेजा जाएगा।
एक इंदर रोड स्थित तस्मिया अकादमी में दारुल कजा देहरादून और इसलाहे मुआसरा कमेटी, आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उत्तराखंड की ओर से शहर और देहात के उलमा की एक बैठक हुई।
‘शरीयत के मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं’
उलमाओं ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में तीन तलाक समेत इस्लामी शरीयत के कुछ कानूनों के सिलसिले में एक मुकदमा चल रहा है। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपना हलफनामा दाखिल कर दिया है और अब हुकूमत ने भी शपथपत्र दाखिल करके तीन तलाक को औरतों के बुनियादी अधिकारों के खिलाफ करार दिया है।
यह शरीयत में खुली दखलंदाजी है जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शरीयत में तीन तलाक के मामले को और गहराई से समझने की जरूरत है।
इस्लाम में निकाह करना आसान है, तलाक देना बहुत मुश्किल है। मगर मुसलमानों में अशिक्षा और जागरूकता की कमी की वजह से सारी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।
शुरू किया हस्ताक्षर अभियान
इसी को लेकर देशभर में एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया है। उत्तराखंड में भी जुमे की नमाज के बाद इसकी शुरुआत की जाएगी। मदरसों में भी अभिभावकों को बुलाकर मसले पर जागरूक किया जाएगा।
शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी, शहर मुफ्ती सलीम अहमद, पर्सनल ला बोर्ड के स्टेट कन्वीनर मौलाना रिसालुद्दीन हक्कानी, मौलाना अब्बास, मौलाना अकबर, मौलाना मासरूम, मौलाना इस्तखार, मौलाना इरशाद, मौलाना अब्दुल रज्जाक, मुफ्ती वसीउल्लाह, मौलाना सलीम आदि मौजूद रहे।