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UKSSSC: सीएम धामी का बड़ा एक्शन, वन दरोगा की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में छह लोगों पर मुकदमा दर्ज

Mon, 05 Sep 2022 12:46 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 05 Sep 2022 12:46 AM IST
सार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी  की जीरो टॉलरेंस करप्शन की नीति और नकल माफियाओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाई के निर्देश के क्रम में आज एक और बड़ी कार्रवाई हुई है।

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Uksssc: Lawsuit filed against six Applicants for rigged in Forest Inspector online recruitment exam
सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पिछले साल हुई वन दरोगा की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में नकल के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर दर्ज हुए इस इस मुकदमे की जांच डीजीपी ने एसटीएफ को सौंपी है। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज मुकदमे में छह लोगों को नामजद किया गया है।  

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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से 316 पदों के लिए हुई यह परीक्षा 16 सितंबर से 25 सितंबर तक 18 शिफ्टों में आयोजित की गई थी। परीक्षा मैमर्स एनएसईआईटी लिमिटेड एजेंसी के माध्यम से विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी।  
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी  की जीरो टॉलरेंस करप्शन की नीति और नकल माफियाओं के विरुद्ध कठोर कार्यवाई के निर्देश के क्रम में आज एक और बड़ी कार्रवाई हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने ऑनलाइन वन दरोगा भर्ती की  जांच कराने के लिए पुलिस महानिदेशक को निर्देशित किया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद डीजीपी ने उक्त प्रकरण की जांच एसटीएफ को सौंपी है। मामले में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।  

मुख्यमंत्री ने लगातार जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन की नीति से कोई समझौता न करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में यदि कोई अनियमितता है, तो इसमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी। कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेश के ईमानदार और परिश्रमी युवाओं के साथ सरकार अन्याय नहीं होने देगी। 

एसएसपी  एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि वन दरोगा के 316 पदों पर भर्ती परीक्षा 16 सितंबर21 से 25 सितंबर 21 के बीच 18 शिफ्टों में ऑनलाइन आयोजित हुई थी। परीक्षा में अनियमितता और कुछ छात्रों द्वारा अनुचित साधनों के प्रयोग की जांच के बाद पुष्टि हुई है। जिसके बाद साइबर थान में उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा नकल निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया कि इसमें कुछ छात्रों को चिन्हित भी कर लिया गया है। साथ ही इसमें सम्मिलित कुछ नकल माफियाओं  को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ भी चल रही है।

इस परीक्षा को कराने वाली एजेंसी मैमर्स एनएसईआईटी लिमिटेड की  संलिप्तता होने के साक्ष्य प्राथमिक जांच से प्रकाश में आए है। बताया कि कुछ प्राइवेट इंस्टीट्यूट जहां पर परीक्षाएं आयोजित हुई,उनको भी चिन्हित कर लिया गया है। बताया कि ऑनलाइन नकल माफिया गैंग में हरिद्वार देहात,पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली के लोग शामिल पाए जाने के संकेत मिले है। ऑनलाइन नकल परीक्षा गैंग में प्राइवेट इंस्टीट्यूट जहां नकल के सेंटर थे,ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली एजेंसी के कुछ लोग,कक्ष निरीक्षक, व परीक्षा से जुड़े कुछ लोग जांच में संदिग्ध प्रकाश में आए है।

आठ संदिग्ध अभ्यर्थियों में से छह ने एक केंद्र पर दी थी परीक्षा 

वन दरोगा  की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में जिन आठ अभ्यर्थियों को संदिग्ध मानकर जांच की गई थी, उनमें से छह ने एक ही केंद्र पर परीक्षा दी थी। इनमें से चार को अलग-अलग तिथियों में एक ही आईपी दी गई जबकि दो को एक जैसी। पता चला कि ऑनलाइन उत्तर क्लिक करते समय सभी ने एक जैसा एग्जामिनेशन लॉग (एक समय में समान प्रश्न का उत्तर) किया था। बताया जा रहा है परीक्षा में ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन भी नकल कराई गई।

सितंबर 2021 में वन दरोगा की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। आठ अभ्यर्थियों के नंबर काफी ज्यादा आए थे। अन्य की तुलना में आठ परीक्षार्थियों के नंबरों में काफी अधिक अंतर के बाद आयोग को शक हुआ। चार अगस्त को उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सचिव संतोष बडोनी ने एसटीएफ और साइबर क्राइम पुलिस को पत्र लिखकर परीक्षा में धांधली की आशंका जताई थी। परीक्षा एनएसईआईटी एजेंसी के माध्यम से कराई गई थी।

परीक्षा 16 से 25 सितंबर तक 18 शिफ्टों में आयोजित हुई। एसटीएफ ने प्राथमिक जांच में पाया कि आठ अभ्यर्थियों में से छह ने स्वामी दर्शनानंद इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में परीक्षा दी थी। इनमें से चार को विभिन्न तिथियों में एक ही आईपी दी गई जबकि दो को एक जैसी अलग आईपी। एक अभ्यर्थी ने अल्मोड़ा स्थित नंदा देवी इन्फोटेक सॉल्यूशन और एक ने नैनीताल स्थित राधाकृष्ण एसेसमेंट सेंटर पर परीक्षा दी थी। जांच में सामने आया कि आठ में से छह अभ्यर्थियों का परीक्षा केंद्र समान था। उनका एग्जामिनेशन लॉग एक जैसा पाया गया यानी एक समय में एक ही प्रश्न का उत्तर दिया था। 

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