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प्राइवेट स्कूलों के बेतहाशा फीस वृद्धि पर भड़का उक्रांद, किया प्रदर्शन
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प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी से नाराज उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने डीएम कार्यालय में प्रदर्शन किया और अपर सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से डीएम को ज्ञापन भेजा। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि प्राइवेट स्कूलों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।
मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्राइवेट स्कूल हर वर्ष फीस वृद्धि कर मनमानी करने लगे हैं। बेलगाम स्कूलों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। यही नहीं, प्राइवेट स्कूलों और प्रकाशकों की मिलीभगत से किताबों के दामों में भी वर्षवार वृद्धि की जा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सख्त निर्देश हैं कि भारत के किसी भी राज्य में कोई भी निजी स्कूल तीन वर्ष में अधिकतम 10 फीसदी ही फीस वृद्धि कर सकता है। हर स्कूल वेबसाइट पर फीस का ढांचा देगा। जिलेवार कमेटी बनाने के भी निर्देश हैं जिसके चेयरमैन डीएम होेंगे और यह कमेटी आयोग की गाइडलाइन का पालन करवाएगी लेकिन उत्तराखंड में आयोग की गाइडलाइन का कहीं पालन नहीं हो रहा है। इससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं सरकार प्राइवेट स्कूलों को संरक्षण दे रही है।
आरोप लगाया कि कोरोनाकाल के बाद सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में फीस कम करने की जगह मनमानी करने की छूट का आदेश दे दिया है। इसके तहत प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा अन्य चार्ज भी पहले की तरह ले सकते हैं। अपर सिटी मजिस्ट्रेट मायाराम जोशी को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नियमावली अविलंब लागू करने, जिलेवार फीस नियंत्रण कमेटी का गठन कर आयोग की गाइडलाइन लागू करवाने की मांग की है। प्रदर्शन करने वालों में केंद्रीय महामंत्री सुनील ध्यानी, जय प्रकाश उपाध्याय, लताफत हुसैन, विजय बौड़ाई, विपिन रावत, अनिल डोभाल, किरन रावत, सुलोचना ईष्टवाल, देवेंद्र रावत, पंकज उनियाल, टीकम राठौर, मनोज मिश्रा, जितेंद्र, संजीव शर्मा, मनोज कांबोज शामिल थे।
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मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्राइवेट स्कूल हर वर्ष फीस वृद्धि कर मनमानी करने लगे हैं। बेलगाम स्कूलों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। यही नहीं, प्राइवेट स्कूलों और प्रकाशकों की मिलीभगत से किताबों के दामों में भी वर्षवार वृद्धि की जा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सख्त निर्देश हैं कि भारत के किसी भी राज्य में कोई भी निजी स्कूल तीन वर्ष में अधिकतम 10 फीसदी ही फीस वृद्धि कर सकता है। हर स्कूल वेबसाइट पर फीस का ढांचा देगा। जिलेवार कमेटी बनाने के भी निर्देश हैं जिसके चेयरमैन डीएम होेंगे और यह कमेटी आयोग की गाइडलाइन का पालन करवाएगी लेकिन उत्तराखंड में आयोग की गाइडलाइन का कहीं पालन नहीं हो रहा है। इससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं सरकार प्राइवेट स्कूलों को संरक्षण दे रही है।
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आरोप लगाया कि कोरोनाकाल के बाद सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में फीस कम करने की जगह मनमानी करने की छूट का आदेश दे दिया है। इसके तहत प्राइवेट स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा अन्य चार्ज भी पहले की तरह ले सकते हैं। अपर सिटी मजिस्ट्रेट मायाराम जोशी को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने प्राइवेट स्कूलों की फीस वृद्धि के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नियमावली अविलंब लागू करने, जिलेवार फीस नियंत्रण कमेटी का गठन कर आयोग की गाइडलाइन लागू करवाने की मांग की है। प्रदर्शन करने वालों में केंद्रीय महामंत्री सुनील ध्यानी, जय प्रकाश उपाध्याय, लताफत हुसैन, विजय बौड़ाई, विपिन रावत, अनिल डोभाल, किरन रावत, सुलोचना ईष्टवाल, देवेंद्र रावत, पंकज उनियाल, टीकम राठौर, मनोज मिश्रा, जितेंद्र, संजीव शर्मा, मनोज कांबोज शामिल थे।
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