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नियो मेट्रो : यूकेएमआरसी का टूटा धैर्य, पूछा- कितना और इंतजार
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दून में नियो मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर इंतजार लंबा होने से प्रोजेक्ट खतरे में पड़ गया है। खुद उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूकेएमआरसी) और राज्य सरकार प्रोजेक्ट को लेकर संशय में हैं। पिछले कई महीनों से नियो की फाइल दिल्ली में लंबित है। यूकेएमआरसी के अफसरों ने दिल्ली में नियो प्रोजेक्ट पर अपनी जिज्ञासा जाहिर की तो मंत्रालय ने जवाब दिया कि अभी परीक्षण जारी है, इंतजार करिए।
गौरतलब हो कि देहरादून में नियो मेट्रो के प्रोजेक्ट को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पहले फ्लॉप हो चुके कई प्रोजेक्ट की तरह इस प्रोजेक्ट पर भी खतरे के बादल मंडराने की आशंका जताई जा रही है। यूकेएमआरसी भी समझ नहीं पा रहा है कि आखिर इस प्रोजेक्ट का भविष्य क्या है। इस प्रोजेक्ट की फाइल दिल्ली भेजने के बाद से ही शहरी विकास मंत्रालय में इस पर परीक्षण चल रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार की हर शंका का समाधान यूकेएमआरसी कर चुका है।
नियो मेट्रो प्रोजेक्ट पर कुछ सवालों पर मंथन जारी है। जिनमें केंद्र का सवाल था कि देहरादून में कम चौड़ी सड़कें नियो के संचालन में बाधा बन सकती हैं। दरअसल, मंत्रालय चाहता है कि नियो को जमीन पर चलाया जाए, लेकिन सड़क कम चौड़ी होने के कारण यह संभव नहीं है। इसीलिए यूकेएमआरसी चाहता है कि नियो एलिवेटेड पिलर्स पर चलाई जाए। सबसे पहला पेच यहीं पर फंसा है।
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दूसरा पेच दून में मेट्रो से होने वाली आय हो लेकर है। कई शहरों में घाटे के बाद केंद्र सरकार देहरादून में नियो मेट्रो के भविष्य को लेकर रिसर्च कर रही है। यहां पर नियो लाभ या हानि का सौदा रहेगा, इस पर परीक्षण जारी है। वहीं देहरादून का कम क्षेत्रफल और अन्य शहरों की अपेक्षा कम आबादी भी बड़ा पेच है। इन तमाम बिंदुओं को लेकर केंद्र सरकार मंथन कर रही है। इन सबके अलावा नियो की तकनीक को लेकर भी केंद्र सरकार सशंकित है। देश में पहली बार दून में नियाे चलाई जाएगी तो यह तकनीक कितना कारगर रहेगी, इसे लेकर भी सरकार मंथन कर रही है। ये तमाम पेच हैं, जो दून में नियो को आगे नहीं बढ़ने दे रहे।
केंद्र में 17 शहरों की फाइल रुकीं
सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार की ओर से यूकेएमआरसी को कह दिया गया है कि अभी नियो को लेकर धैर्य रखें। पहले जिन शहरों में मेट्रो प्रोजेक्ट चल रहे हैं और वहां विस्तार हो रहा है। पहले उन पर काम किया जाएगा। उसके बाद ही नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा। बताया जा रहा है कि दिल्ली में करीब 17 शहरों की फाइल हरी झंडी के इंतजार में हैं।
दून के नियो मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर फाइल केंद्र सरकार के पास भेजी गई है। इसे हरी झंडी मिलने का इंतजार है। केंद्र की स्वीकृति मिलते ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू कराया जाएगा। - जितेंद्र त्यागी, एमडी, उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन
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गौरतलब हो कि देहरादून में नियो मेट्रो के प्रोजेक्ट को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पहले फ्लॉप हो चुके कई प्रोजेक्ट की तरह इस प्रोजेक्ट पर भी खतरे के बादल मंडराने की आशंका जताई जा रही है। यूकेएमआरसी भी समझ नहीं पा रहा है कि आखिर इस प्रोजेक्ट का भविष्य क्या है। इस प्रोजेक्ट की फाइल दिल्ली भेजने के बाद से ही शहरी विकास मंत्रालय में इस पर परीक्षण चल रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार की हर शंका का समाधान यूकेएमआरसी कर चुका है।
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नियो मेट्रो प्रोजेक्ट पर कुछ सवालों पर मंथन जारी है। जिनमें केंद्र का सवाल था कि देहरादून में कम चौड़ी सड़कें नियो के संचालन में बाधा बन सकती हैं। दरअसल, मंत्रालय चाहता है कि नियो को जमीन पर चलाया जाए, लेकिन सड़क कम चौड़ी होने के कारण यह संभव नहीं है। इसीलिए यूकेएमआरसी चाहता है कि नियो एलिवेटेड पिलर्स पर चलाई जाए। सबसे पहला पेच यहीं पर फंसा है।
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दूसरा पेच दून में मेट्रो से होने वाली आय हो लेकर है। कई शहरों में घाटे के बाद केंद्र सरकार देहरादून में नियो मेट्रो के भविष्य को लेकर रिसर्च कर रही है। यहां पर नियो लाभ या हानि का सौदा रहेगा, इस पर परीक्षण जारी है। वहीं देहरादून का कम क्षेत्रफल और अन्य शहरों की अपेक्षा कम आबादी भी बड़ा पेच है। इन तमाम बिंदुओं को लेकर केंद्र सरकार मंथन कर रही है। इन सबके अलावा नियो की तकनीक को लेकर भी केंद्र सरकार सशंकित है। देश में पहली बार दून में नियाे चलाई जाएगी तो यह तकनीक कितना कारगर रहेगी, इसे लेकर भी सरकार मंथन कर रही है। ये तमाम पेच हैं, जो दून में नियो को आगे नहीं बढ़ने दे रहे।
केंद्र में 17 शहरों की फाइल रुकीं
सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार की ओर से यूकेएमआरसी को कह दिया गया है कि अभी नियो को लेकर धैर्य रखें। पहले जिन शहरों में मेट्रो प्रोजेक्ट चल रहे हैं और वहां विस्तार हो रहा है। पहले उन पर काम किया जाएगा। उसके बाद ही नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू होगा। बताया जा रहा है कि दिल्ली में करीब 17 शहरों की फाइल हरी झंडी के इंतजार में हैं।
दून के नियो मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर फाइल केंद्र सरकार के पास भेजी गई है। इसे हरी झंडी मिलने का इंतजार है। केंद्र की स्वीकृति मिलते ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू कराया जाएगा। - जितेंद्र त्यागी, एमडी, उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन