{"_id":"6a63ccf92538220413043d6c","slug":"two-members-of-an-inter-state-cyber-fraud-gang-arrested-dehradun-news-c-5-drn1008-1025400-2026-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
विज्ञापन
देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों राहुल मोहम्मद और शिवांश उपाध्याय को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सोशल मीडिया पर नौकरी और आसान लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। बाद में उन्हीं खातों का इस्तेमाल ओएलएक्स फ्रॉड समेत विभिन्न साइबर अपराधों में किया जाता था। एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, इंडसइंड बैंक की पांच बैंक किट (एटीएम कार्ड व चेकबुक सहित), एक आधार कार्ड, 15 हजार रुपये नकद और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि फाइनेंशियल फ्रॉड यूनिट को साइबर शिकायतों के विश्लेषण के दौरान इंडसइंड बैंक का एक संदिग्ध खाता मिला। तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल इंटेलिजेंस के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई तो पता चला कि खाते का इस्तेमाल कई साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में किया जा रहा है। बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर, लाभार्थी खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से एक सक्रिय अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का खुलासा हुआ। इसके सक्रिय सदस्यों की एसटीएफ ने जांच शुरू की तो और आशारोड़ी चेकपोस्ट पर घेराबंदी कर राजस्थान नंबर की स्कॉर्पियो को रोक लिया। वाहन में सवार राजस्थान के डींग निवासी राहुल मोहम्मद और गोरखपुर निवासी (हाल निवासी लखनऊ) शिवांश उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर निजी कंपनियों में नौकरी और आसान लोन दिलाने के आकर्षक विज्ञापन चलाते थे। इच्छुक लोगों से व्हाट्सएप के जरिये संपर्क कर उनके नाम से ऑनलाइन इंडसइंड बैंक में खाते खुलवाए जाते थे। हालांकि खातों से जुड़े मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग और पूरा नियंत्रण आरोपी अपने पास रखते थे। बैंक किट डाक के माध्यम से मंगाकर इन्हीं खातों का इस्तेमाल ओएलएक्स पर फर्जी तरीके से वाहन और अन्य सामान खरीदने-बेचने के नाम पर लोगों से ठगी की रकम हासिल करने और अन्य साइबर अपराधों में किया जाता था।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
फर्जी सौदों के जरिये लोगों को ठगने वाले की तलाश
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का एक अन्य सदस्य ओएलएक्स पर फर्जी सौदों के जरिये लोगों को ठगता था, जबकि गिरफ्तार आरोपी बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम निकालने का काम करते थे। एसटीएफ के अनुसार आरोपी राहुल मोहम्मद वर्ष 2024 में राजस्थान में साइबर धोखाधड़ी के एक मामले में जेल भी जा चुका है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है तथा बरामद मोबाइल फोन, बैंक किट और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे साइबर अपराधों के और मामलों का खुलासा होने की संभावना है। आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाना देहरादून में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
विज्ञापन
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि फाइनेंशियल फ्रॉड यूनिट को साइबर शिकायतों के विश्लेषण के दौरान इंडसइंड बैंक का एक संदिग्ध खाता मिला। तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल इंटेलिजेंस के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई तो पता चला कि खाते का इस्तेमाल कई साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में किया जा रहा है। बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर, लाभार्थी खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से एक सक्रिय अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का खुलासा हुआ। इसके सक्रिय सदस्यों की एसटीएफ ने जांच शुरू की तो और आशारोड़ी चेकपोस्ट पर घेराबंदी कर राजस्थान नंबर की स्कॉर्पियो को रोक लिया। वाहन में सवार राजस्थान के डींग निवासी राहुल मोहम्मद और गोरखपुर निवासी (हाल निवासी लखनऊ) शिवांश उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया गया।
विज्ञापन
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर निजी कंपनियों में नौकरी और आसान लोन दिलाने के आकर्षक विज्ञापन चलाते थे। इच्छुक लोगों से व्हाट्सएप के जरिये संपर्क कर उनके नाम से ऑनलाइन इंडसइंड बैंक में खाते खुलवाए जाते थे। हालांकि खातों से जुड़े मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग और पूरा नियंत्रण आरोपी अपने पास रखते थे। बैंक किट डाक के माध्यम से मंगाकर इन्हीं खातों का इस्तेमाल ओएलएक्स पर फर्जी तरीके से वाहन और अन्य सामान खरीदने-बेचने के नाम पर लोगों से ठगी की रकम हासिल करने और अन्य साइबर अपराधों में किया जाता था।
विज्ञापन
फर्जी सौदों के जरिये लोगों को ठगने वाले की तलाश
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का एक अन्य सदस्य ओएलएक्स पर फर्जी सौदों के जरिये लोगों को ठगता था, जबकि गिरफ्तार आरोपी बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम निकालने का काम करते थे। एसटीएफ के अनुसार आरोपी राहुल मोहम्मद वर्ष 2024 में राजस्थान में साइबर धोखाधड़ी के एक मामले में जेल भी जा चुका है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है तथा बरामद मोबाइल फोन, बैंक किट और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे साइबर अपराधों के और मामलों का खुलासा होने की संभावना है। आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाना देहरादून में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।