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2014 में पटरी से उतरी रही पर्यटन की गाड़ी

Tue, 23 Dec 2014 04:14 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 23 Dec 2014 04:14 PM IST
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tourism year ender 2014.

उत्तराखंड में आपदा का असर इस साल भी पर्यटन पर देखने को मिला। पर्यटक उम्मीद के मुताबिक नहीं पहुंचे।

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गर्मियों की छुट्टियां यहां बिताने वाले सैलानियों की संख्या बीते साल के मुकाबले तकरीबन ढाई प्रतिशत कम रही। पहाड़ों की रानी मसूरी के प्रति आकर्षण भी कम रहा। हालांकि पर्यटन को बढ़ाने के लिए कार रैली, बाइक रैलियां आयोजित की गईं।

पर्यटन विभाग की ओर से सैलानियों को लुभाने के लिए टिहरी में एडवेंचर वाटर स्पोर्ट्स भी हुए, लेकिन इससे कोई बहुत फर्क नहीं पड़ा। ऐसा भी हुआ कि उत्तराखंड टाप-10 पर्यटन स्थलों की सूची से ही बाहर हो गया। खुद सरकारी आंकड़ों ने इस बात की गवाही दी।
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अगर चारधाम यात्रा की बात करें तो यहां भी श्रद्घालुओं की संख्या औसतन कम रही। केवल पर्यटन ही नहीं, तीर्थाटन की बात करें। सरकार की पहल पर जिला प्रशासन की मदद से बदरीनाथ धाम के लिए मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ योजना का शुभारंभ किया गया, लेकिन इसका फायदा उठाने वाले भी मुट्ठी भर रहे।
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अकेले दून की बात हो तो यहां केपर्यटन स्थल सहस्त्रधारा, गुच्चूपानी अबकी भी मूलभूत सुविधाओं की कमी, गंदगी की समस्या से जूझते रहे। पर्यटकों को सूचना मुहैया कराने वाले स्थलों पर ताला ही पड़ा रहा।

सपने जो रह गए अधूरे

tourism year ender 2014.

अधूरे सपने
1- सहस्त्रधारा मसूरी रोपवे का इस साल भी श्रीगणेश नहीं हो सका। आलम यह है कि पर्यटन विभाग को जहां जमीन मिली है, वहां की झाड़ियां तक अभी नहीं कटी हैं।
2- आदिबद्री-सिमली-कर्णप्रयाग, चमोली-पीपलकोटी-वृद्ध बद्री, जोशीमठ-भविष्यबद्री-योगध्यान बद्री (पांडुकेश्वर), तपोवन-मलारी-नीति सर्किट पर काम शुरू नहीं हो सका।

अमर उजाला ने दिखाई गड़बड़ियां, हुआ असर
- पर्यटन विभाग की ओर से छापी गई चार धाम यात्रा गाइड में विभाग पर्यटकों को कई गलत जानकारियां दे रहा था। पर्यटन गाइड में अशुद्घियों की भरमार थी। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। 8 अप्रैल के अंक में वसुधारा प्रपात को बनाया पशुधारा प्रपात शीर्षक से खबर छपी।

असर यह रहा कि विभाग को दोबारा गाइड छपवानी पड़ी। लेकिन लाखों खर्च कर फिर से छापी गई चार धाम यात्रा गाइड में गड़बड़ियां करने को भी फालोअप केरूप में अमर उजाला ने लाखों के सुधार में फिर गड़बड़ी शीर्षक से 10 मई के  अंक में प्रकाशित किया। एक बार फिर विभाग को सुधार को मजबूर होना पड़ा।

झांकियां दिखाते रहे, जमीन पर काम नहीं
प्रदेश से बाहर होने वाले मेलों के जरिए राज्य में पर्यटकों को खींचने के लिए झांकियां तो विभाग की तरफ से खूब दिखाई गई। इसका प्रचार-प्रसार भी किया गया। लेकिन झांकियों को पसंद करने के बावजूद पर्यटकों ने यहां की तरफ रुख करने में बहुत रुचि नहीं दिखाई।

उम्मीदें- 2015
1. पर्यटक सहस्त्रधारा-मसूरी रोपवे के जरिए मसूरी का एक  नया रास्ता पा सकेंगे।
2. पर्यटक सूचना केंद्रों की हालत सुधरेगी, यहां कोई जवाबदेह बिठाया जाएगा।
3. पर्यटन केंद्रों को युवाओं को देने की विभाग अपनी महत्वाकांक्षी योजना को शुरू कर सकेगा।
4. विंटर कार्निवाल के माध्यम से पर्यटकों को पहाड़ों की रानी खींचने के प्रयासों को बल मिलेगा।

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