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Tungnath Temple: अपने स्थान से खिसक रहे हैं तुंगनाथ मंदिर के कुंड, ASI ने मंदिर के झुकाव की खबरों को नकारा

Thu, 18 May 2023 10:42 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 18 May 2023 10:42 PM IST
सार

देहरादून सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् मनोज कुमार सक्सेना ने मंदिर के 10 डिग्री झुकाव की खबरों को खंडन करते हुए कहा कि यह कितना झुका है, इसका किसी स्ट्रक्चरल इंजीनियर से अध्ययन नहीं हुआ है। 

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Tungnath Temple Kunds are moving from their place but ASI denied the news of tilting of temple
तुंगनाथ - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

करीब 1000 साल पुराने दुनिया के सबसे ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर के कुंड अपने स्थान से खिसक रहे हैं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने प्राथमिक सर्वेक्षण के बाद इस बात को स्वीकार करते हुए इसे संरक्षित करने के लिए अधिसूचना जारी की है। इस अधिसूचना पर आपत्तियां लेने को दो माह का समय दिया गया है। वहीं, देहरादून सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् मनोज कुमार सक्सेना ने मंदिर के 10 डिग्री झुकाव की खबरों को खंडन करते हुए कहा कि यह कितना झुका है, इसका किसी स्ट्रक्चरल इंजीनियर से अध्ययन नहीं हुआ है। 

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वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने केंद्र को तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण के संबंध में प्रस्ताव भेजा था। केंद्र सरकार (संस्कृति मंत्रालय) के निर्देश पर तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. पटेल ने वर्ष 2018 में मंदिर का निरीक्षण किया। उन्होंने मंदिर की स्थिति में सुधार की जरूरत बताई थी। कुछ समय पहले केंद्र ने मरम्मत संबंधी कार्यों पर मुहर लगाते हुए प्रस्ताव तैयार करने को कहा था। इस प्रस्ताव के आधार पर संस्कृति मंत्रालय ने 29 मार्च को तुंगनाथ मंदिर को संरक्षित करने के लिए अधिसूचना जारी की थी जो कि भारतीय पुरातत्व विभाग को अप्रैल माह में मिली।

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इसी महीने विभाग ने इस पर आपत्तियों की सूचना जारी कर दी। दो माह के भीतर इस पर आपत्तियां व सुझाव मांगे गए हैं, जिसका विश्लेषण करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी हो जाएगी। एएसआई के देहरादून सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् मनोज कुमार सक्सेना ने कहा कि चूंकि अभी इस मंदिर का प्राथमिक अध्ययन उनकी टीम ने किया था, जिसमें यह स्पष्ट हुआ था कि मंदिर के कुंड व कुछ अन्य हिस्से अपने स्थान से खिसक रहे हैं। उधर, बदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय का कहना है कि मंदिर के संरक्षण में वह सक्षम है। लिहाजा, संरक्षण की अधिसूचना पर मंदिर समिति कड़ा विरोध जताएगी।

पंच केदार में से एक है तुंगनाथ

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में समुद्रतल से 3460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर पंच केदार में से एक है। इसे तृतीय केदार माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया था। तुंगनाथ को दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है, जिसे 8वीं शताब्दी में कत्यूरी शासकों ने बनवाया था।

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